Saturday, May 9, 2026
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मोनिया दि ग्रेट: बापू के बचपन की अनकही कहानी, महात्मा गाँधी की 150 वीं जयंती पर पीरियड ड्रामा

नई दिल्ली,इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम । ‘मोनिया दि ग्रेट’ राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) के बाल रंगमंच वर्कशॉप में तैयार दिल्ली के स्कूली बच्चों का नया दिलचस्प ड्रामा है। शोध पर आधारित इस नाटक का लेखन सीनियर टीवी जर्नलिस्ट और लेखक शकील अख़्तर ने किया है। डिज़ाइन कैलाश चौहान का है। कॉन्सेप्ट और निर्देशन सीनियर थियेटर पर्सनैलिटी हफीज़ ख़ान का है। सह निर्देशन आशीष देवचारण और संगीत कलीम ज़फर का है। महात्मा गाँधी की 150 वीं जयंति पर यह एक उपलब्धि नाटक है जो एक बार फिर बताता है राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के विचारों की आज और भी जरूरत है। एनएसडी के चहुँमुख में नाटक के दो शोज़ हो चुके हैं।

चिल्ड्रन वर्कशॉप,एनएसडी में तैयार नाटक : यह नाटक नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा चिल्ड्रन थियेटर वर्कशॉप में तैयार किया गया है।  नाटक में दिल्ली के 23 बच्चों ने ऊर्जा भरा अभिनय किया है। बच्चे करीब तीन महीने तक इस नाटक के बनने और इसे अपने स्तर पर परखने,समझने की प्रक्रिया से जुड़े रहे। निर्देशकीय टीम के सहयोग से नाटक को मंच पर प्रस्तुति के रूप में लाने का अभ्यास करते रहे। शुरू के कई दिनों तक लेखक और निर्देशक बच्चों को खुद ही महात्मा गाँधी के बारे में पढ़ने,लिखने,उनकी फिल्में-डाक्युमेंट्री देखने लिये प्रेरित करते रहे। उसके बाद उन्हें गाँधी के बचपन की रियल स्टोरी सुनाई गई, इसी प्रक्रिया में धीरे-धीरे बच्चे नाटक बुनने की प्रक्रिया का हिस्सा बनने लगे।

महात्मा गाँधी के बचपन की रियल स्टोरी : नाटक डेढ़ सौ साल पहले महात्मा गाँधी के उस बाल जीवन के सफर पर दिलचस्प सफ़र पर ले जाता है जो राजकोट और पोरबंदर में बीता था। 2 अक्टूबर 1869 में गुजरात के पोरबंदर में महात्मा गाँधी का जन्म हुआ था। उस वक्त उन्हें परिवार मोहनदास नाम दिया था लेकिन प्यार का नाम था मोनिया। नाटक बताता है खेल कूद की उम्र से लेकर नौजवान बनने के उस दौर में ही मोनिया में महात्मा बनने के संस्कार पड़ चुके थे। यह सब कैसे हो रहा था, वो कौन सी बातें थीं, जो मोनिया को महात्मा बना रही थीं,यही इस नाटक की विषय वस्तु है। इसमें ऐसे प्रसंग है जो सहज ही हरेक को उसके बाल जीवन में ले जाते हैं।

गीत-संगीत से नाटक को रफ़्तार : नाटक की बहुत बड़ी खूबी इसका गीत संगीत है। कुछ गीत लेखक शकील अख़्तर ने लिखे हैं, जबकि कुछ पारंपरिक गीतों का निर्देशकीय टीम ने चयन किया है। यह गीत नाटक को जोड़ने, किसी ख़ास बात को उभारने और नाटक को गति देने का काम करते हैं। खास बात यह भी है कि मंच पर यह गीत खुद बाल कलाकार गाते हैं। बच्चों को संगीतकार कलीम जफर ने गायन की ट्रेनिंग दी। सहयोग संगीत कलाकार नीलेश मनोहर और गगन सिंह बैस का रहा। उन्हें अपनी अनुभवी कला से बाँधने का काम कैलाश चौहान ने किया। #moniathegreat,#nsd #theatre, #drama, #gandhi, #mahatmagandhi, #ShakeelAkhter

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