मध्यप्रदेश के शिवपुरी में जन्मी मोहिनी श्री गौर एक ऐसी प्रतिभाशाली गायिका हैं जिन्होंने मुंबई में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। आज वो फिल्मों, टीवी धारावाहिकों के साथ स्टेश शोज़ के कार्यक्रमों के लिये जानी जाती हैं। मोहिनी सुगम और शास्त्रीय संगीत में प्रशिक्षित गायिका हैं लेकिन उन्होंने फिल्मी गायिकी के अनुरूप खुद को ढालने के लिये भी ट्रेनिंग ली है। फिल्म-“मुसाफिर’ के उनके गाये इस वर्ज़न- ‘ज़िदंगी में ना कोई आये रब्बा’ को देख और सुनकर आप यह महसूस कर सकते हैं। पढ़िये शकील अख़्तर से उनकी बातचीत के अंश। एमपी के संगीत कलाकार साथी mpartisthelp@gmail.com के ज़रिये मोहिनी से जुड़ सकते हैं। अपनी प्रतिक्रियाएं भेज सकते हैं। फिल्म,टीवी और स्टेज शोज़ को लेकर उनके लंबे तजुरबे का लाभ ले सकते हैं।

मोहिनी तो अपनी संकेतिका है !
मुंबई में कम ही लोग जानते हैं कि मोहिनी को शिवपुरी,ग्वालियर,इंदौर और भोपाल जैसे शहरों में आज भी संकेतिका नाम से जाना जाता है। वो ही उनका असली नाम है। उन्होंने बताया, ‘पापा-मम्मी ने बहुत प्यार से मेरा नाम संकेतिका रखा था। वाकई वो अलग हटकर रखा गया नाम था लेकिन मुंबई में महसूस हुआ कि मेरा नाम लोगों को याद रखने या बोलने में परेशानी आती है। इसी बात को ध्यान में रखकर मैंने अपना नाम मोहिनी रखने का फैसला किया और फिर इसी नाम से मुंबई में दूसरी पारी की शुरूआत की। हालांकि मेरी शादी हो चुकी थी लेकिन मेरे हसबैंड ने मेरा हर कदम पर साथ दिया और मैं स्टेज कार्यक्रमों के साथ ही टेलिविज़न और फिल्मों के लिये गायन करने लगी।
फिल्म,टीवी,स्टेज का सफ़र जारी
आपको बता दें, मोहिनी ने रिवाज,आईसी एंड स्पाइसी,कॉलेज कैम्पस जैसी हिंदी और भोजपुरी,मराठी फिल्मों और कुमकुम, रब्बा इश्क ना होवे,नागिन जैसे कई सीरियल्स के टाइटल गाये हैं। हाल ही में पाकिस्तानी मूवी वो और स्टार सिंगर्स के साथ अपने स्टेज शोज़ से चर्चा में आई हैं। मोहिनी कहती हैं, बेहतर काम पाने और बरसों से रियाज़ का सफ़र आज भी उसी शिद्धत से जारी है। मैं गायन के लिये परेश चंद्र जी से वोकल ट्रेनिंग ले रही हूं। चंदन दास जी से ग़ज़लों की बारीकियां सीख रही हूं। मोहिनी स्टेज पर अपनी ग्लैमरस प्रेजेंस और गायिकी के लिये ही नहीं जानी जाती उनकी बड़ी विशेषता बेहद संजीदगी और सादगी से दिये जाने वाले ग़ज़लों और गोल्डन हिट्स के प्रोग्राम है। मोहिनी बताती हैं, ‘मुझे लताजी के गाये कई गीत, ख़ासकर मदन मोहन के संगीत में गाई ग़ज़लें बेहद पसंद हैं। इसके साथ ही शुरू से ही पापा ( अशोक चौकसे ) की वजह से अच्छी पोएट्री और ग़ज़ल गायिकी की तरफ रूझान रहा है। पापा की सिंगिंग का भी मुझपर प्रभाव रहा है। इसलिये ग़ज़लों के मेरे कार्यक्रम सराहे जाते हैं। मुंबई में ही नहीं पूरे देश में ग़ज़लों के साथ गोल्डन हिट्स के स्टेज शोज़ चलते रहते हैं।‘


मोहिनी शिवपुरी के केंद्रीय विद्यालय स्कूल की स्टुडेंट रही हैं, वहीं से उन्होंने गायन की शुरूआत की थी। उन्होंने ग्वालियर घराने के श्रीपद देवकर और विश्वनाथ राव से शास्त्रीय संगीत सीखा। पिता अशोक चौकसे ने उनकी प्रतिभा को संवारा। इसी ट्रेनिंग और समझ की वजह से मोहिनी यानी संकेतिका को स्कूली दौर में ही शिवपुरी,ग्वालियर और इंदौर में लता मंगेशकर अलंकरण और नई दुनिया प्रतिभा खोज जैसे कई अवार्ड मिले। 2003 में सारेगमा के कई एपीसोड्स में इनकी गायन प्रतिभा को सराहना मिली। इंदौर में तब की संकेतिका और आज की मोहिनी से मेरी मुलाक़ात नईदुनिया प्रतिभा प्रतिस्पर्धा ( 1994 ) के दौरान ही हुई थी। इसके बाद 1995-96 में इंदौर में पहली बार सिटी केबल नेटवर्क के लिये संकेतिका से बातचीत का मौका मिला था। उनकी विविधता भरी गायिका ने उन्हें भोजपुरी गायन में भी लोकप्रिय बनाया वहीं लोकभजन गायन के क्षेत्र में भी उन्हें अवार्ड मिले। मोहिनी कहती हैं, ‘ मेरा संगीत में ही दिल लगता है, यहां ज़िदंगी मिलती है, इसलिये इस काम को करते कितनी भी मेहनत,मशक्कत हो,जुनून कम नहीं होता। सुकून मिलता है।“
( मोहिनी के कार्यक्रमों के लिये आप इंदौर स्टुडियो को mpartisthelp@gmail.com पर मेल कर सकते हैं।)

