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शकील अख़्तर, इंदौर स्टूडियो। ‘राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) दिल्ली में है, देश की राजधानी में है। थियेटर की राजधानी में नहीं। थियेटर की राजधानी मुंबई है। एनएसडी मुंबई में भी होना चाहिये’। एनएसडी सोसाइटी के अध्यक्ष और प्रख्यात अभिनेता परेश रावल ने यह बात कही। वे दिल्ली के कामानी सभागार में आयोजित 25 वें भारत रंग महोत्सव के समापन समारोह में,अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। समारोह में दिग्गज कला कर्मी, कला मर्मज्ञ और आलोचक मौजूद थे।
एनएसडी का विकेंद्रीकरण ज़रूरी: परेश जी ने कहा – ‘मैं पहले भी यह बात कह चुका हूँ। उन्होंने कहा जिस तरह देश के विभिन्न राज्यों में एम्स के अस्पतालों की कल्पना करते हैं, इसी तरह से देश के सभी राज्यों में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय होना चाहिये। मैं इसके पूरी तरह से विकेंद्रीकरण के पक्ष में है। समारोह में मौजूद संस्कृति मंत्रालय की संयुक्त सचिव श्रीमती उमा नंबूरी की इस बात से सहमति जताई कि दिल्ली में टिकट ख़रीदने का रिवाज़ नहीं है। यहां पर लोग पास लेकर नाटक या कला विधाओं के कार्यक्रम देखना चाहते हैं। इसके लिये अपनी धौंस तक दिखाते हैं। जबकि मुंबई में ऐसा नहीं है। मुंबई में दर्शक नाटक को टिकट ख़रीदकर देखने आते हैं। (नाटक ‘डियर फादर’ में परेश रावल।)
नाटक के नाम पर पैसे नहीं आते: वरिष्ठ अभिनेता ने कहा -‘ दिल्ली में 2003 से 2007 तक एमजे अकबर की सिस्टर गज़ाला जी हमारे नाटकों के आयोजन करती थीं। मगर बाद में उन्होंने हमारे नाटकों को आमंत्रित करना बंद कर दिया। वजह पूछने पर ग़ज़ाला जी ने कहा, आपको बुलाकर हमें पैसे देने ही पड़ते हैं। मगर पैसे आते नहीं है। पैसे मांगने पर रिलेशन अलग ख़राब हो जाते हैं’। श्री रावल ने कहा, उमा जी की बात का मैं पुरज़ोर समर्थन करता हूँ। हमें टिकट ख़रीदकर नाटक देखना चाहिये। कलाकारों का सहयोग करना चाहिये’। (एनएसडी, दिल्ली के कर्मचारी बने कलाकार। कर्मचारियों ने अपने लघु नाटक में विकसित भारत का संदेश दिया। सोने की चिड़िया देश में वापस लाने की बात कही। नाटक का निर्देशन निशा त्रिवेदी और उनकी टीम ने किया।)
नाटक बड़े कमाल की चीज़: परेश रावल ने नाट्य विधा की प्रशंसा करते हुए कहा – ‘नाटक बड़े कमाल की चीज़ है। इसके बारे में संस्कृत में एक श्लोक है – ‘नाट्यम भिन्न रूचेर जनस्य बहुधापि एकम् समाराधानाम’। यानी नाटक अलग-अलग रूचियों वाले लोगों को एक जगह पर समान मनोरंजन का समाधान,रस या संतोष देता है। ऐसे में हम कलाकारों की ज़िम्मेदारी भी बहुत बढ़ जाती है। मुझे याद है प्रख्यात रंग निर्देशक शम्भू मित्रा कहा करते थे कि दर्शक नाटक में ‘अनलिट लैम्प’ लेकर आते हैं। नाटक के ख़त्म होने के बाद उनका दिया जल उठता है। जब नाटक का परदा गिरता है, उनके दिलों से परदा हटता है। उन्हें नाटक के माध्यम से विषय की गहराई समझ में आती है। यहीं पर जाकर मैं कहता हूं कि वो नाटक खोखला है जो दर्शक को सोचने पर या विचार करने पर मजबूर ना करे। दर्शकों को विचारों और ज्ञान से प्रज्जवलित करना कलाकारों का धर्म है। एक नाटक ही है जो सबको जोड़ता है। (मुंबई के एनसीपीए में एक फरवरी 2024 को भारत रंग महोत्सव के शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान महाराष्ट्र के राज्यपाल रमेश बैस के साथ एनएसडी के अध्यक्ष परेश रावल, अभिनेता रघुवीर यादव, महोत्सव के राजदूत पकंज त्रिपाठी और एनएसडी के निदेशक चित्तरंजन त्रिपाठी।)
ज़िदंगी से अलग नहीं नाटक: अमेरिकी फिल्म और रंगमंच अभिनेता एल पचीनो कहते थे -‘मुझे तीन घंटे के लिये जो एक जगह का टुकड़ा मिलता है, मैं उसका राजा हूं, वहां मैं जो चाहे करता हूँ। वहां मैं सच को बोलूंगा। इसी तरह अमेरिकी नाटककार और राइटर आर्थर मिलर कहा करते थे –‘ Endlessly drama is endlessly fascinating, Because It’s So Accidental Just Like Life’. यही इसकी ख़ूबी और कमाल है’। परेश जी ने कहा – ’25 वें भारत रंग महोत्सव के दौरान एक साथ 1500 से जगहों पर 1500 से अधिक नाटकों के प्रदर्शन का जो विश्व रिकॉर्ड बनाया गया है, वह अद्वितीय घटना है। ऐसा कभी नहीं हुआ। इसमें वसुधैव कुटुम्बकम की झलक दिखी है। जी 20 समिट के दौरान वसुधैव कुटुम्बम की बात प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने कही थी। चूंकि यह बात प्रधानमंत्री जी ने कही थी, इसलिये इसपर किसी को आपत्ति नहीं होना चाहिये। यह उत्सव सबका है। किसी को इससे एतराज़ नहीं होना चाहिये’।
नया विश्व रिकॉर्ड एक उपलब्धि: आपको बता दें राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय ने एकसाथ 1500 से अधिक नाटकों का प्रदर्शन का एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है। एनएसडी, दिल्ली में आयोजित एक समारोह में बैंगलुरू से आई शैलजा ने संस्कृति सचिव गोविंद मोहन को वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स का सर्टिफिकेट भेंट किया। श्री गोविंद मोहन ने ही बटन दबाकर देश में नाटकों की प्रस्तुति के लिये बटन दबाकर प्रदर्शनों का शुभारंभ किया। इस अवसर पर परेश रावल और चित्तरंजन त्रिपाठी के साथ उपाध्यक्ष भरत गुप्त, संयुक्त सचिव उमा नंदूरी, अमिता साराभाई मौजूद थे। आगे एक और दिलचस्प रिपोर्ट –

