Tuesday, June 16, 2026
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मुंशी प्रेमचंद की 22 कहानियों का 22 भाषाओं में मंचन

कला प्रतिनिधि, इंदौर स्टूडियो। 31 जुलाई को मुंशी प्रेमचंद का जन्म दिन था। इस मौके पर उनकी 22 कहानियों पर आधारित 22 भाषाओं में नाटकों के मंचन हुए। इन कहानियों के मंचन का सिलसिला तीन दिनों तक (31 जुलाई से 2 अगस्त) तक चला। कार्यक्रम के परिकल्पनाकार और निर्देशक मुजीब ख़ान हैं। उन्होंने इस फेस्टिवल का नाम ‘प्रेम उत्सव 2024’ दिया है। प्रेम उत्सव’ में देश भक्ति का संदेश: आइडिया ड्रामा एकाडेमी, मुंबई  का यह आयोजन माटूंगा के मैसूर एसोसियेशन सभागार में हर दिन शाम को हुआ। सहयोग दिनकर स्मृति न्यास, दिल्ली का रहा। देशभक्ति की प्रबल भावना वाली कहानियां: फेस्टिवल में मुंशी जी की उन कहानियों को शामिल किया गया जिनमें देशभक्ति की भावना स्वर प्रबल हो। श्री मुजीब ख़ान ने कहा कहा कि ‘आइडिया ड्रामा ग्रुप’ बीते 20 सालों से मुंशी प्रेमचंद की कहानियों का मंचन करते आ रहा है। इस विशिष्टता की वजह से ‘आइडिया’ का नाम ‘लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड तथा वर्ल्ड वाइड रिकॉर्ड’ में भी पहले से दर्ज है। उर्दू -हिन्दी के महान लेखक मुंशी प्रेमचंद:  मुंशी प्रेमचंद (मूल नाम धनपतराय) का जन्म 31 जुलाई 1880 तो वाराणसी के लमही गाँव में हुआ था। उन्होंने अपने जीवन काल में 15 उपन्यास, 3 नाटक, 7 बाल पुस्तकों के अलावा 300 से अधिक कहानियां भी लिखी थीं। इसके अलावा हज़ारों लेख, संपादकीय, भाषण, भूमिका और पत्र आदि शामिल हैं। उन्होंने ज़्यादातर लेखन उर्दू और हिन्दी में किया है।मुंशी जी पर अभिनव प्रयोग का उत्सव: श्री मुजीब ख़ान ने कहा, ‘दुनिया में शेक्सपियर के नाटक अलग-अलग देशों और भाषाओं में हुए हैं लेकिन एक ही देश में, एक ही समय पर, विभिन्न भाषाओं में, किसी एक लेखक पर ऐसा कार्यक्रम कही नहीं हुआ। इस नज़रिये से हम इसे वैश्विक रिकॉर्ड का प्रयास कह सकते हैं’। आइये जानते हैं तीनों दिनों में किस दिन मुंशी प्रेमचंद की किस कहानी पर हुआ मंचन ?पहला दिन, 31 जुलाई 2024 : पंजाबी- ग्रहन्ति। ओड़िया- अभागन। तमिल- आत्मा संगीत। मराठी- सदगति। असमी- नादान दोस्त। बोडो- राष्ट्र का सेवक। हिन्दी- बड़े घर की बेटी।दूसरा दिन, 1 अगस्त 2024 :  मराठी- दुर्गा का मंदिर। कन्नड़- यही मेरा वतन है। तेलुगु– प्रेरणा। संस्कृत– पूस की रात। संथाली- सवा सेर गेहूँ। मलयालम- प्रतिशोध। मणिपुरी– पगला हाथी। बंगाली- भूत। तीसरा दिन, 2 अगस्त 2024: नेपाली- अनुभव। सिंधी- मुक्ति दान। कश्मीरी- सुहाग की साड़ी। कोनकी- जादू। मारवाड़ी– बेटी का धन। उर्दू- ग़ैरत की कटार। डोगरी- खुदी। गुजराती– ज्वालामुखी। (Help Indore Studio serving art activities and artists. Donate – https://indorestudio.com/donate/)

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