Saturday, May 9, 2026
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मर्डर मिस्ट्री पर बेहद रोमांचक उपन्यास है ‘नैना’

राजेश बादल, इंदौर स्टूडियो। हाल ही में संजीव पालीवाल का जासूसी उपन्यास नैना पढ़ने को मिला। यह उपन्यास बेहद रोमांचक,सनसनीखेज़ और आख़िरी पन्ने तक बांधकर रख देने वाला है। मैं दावा कर सकता हूँ कि पिछले चार दशकों में ऐसा कोई जासूसी उपन्यास कम से कम मैंने तो नहीं पढ़ा। यह एक मर्डर मिस्ट्री है। भारत के सर्वाधिक लोकप्रिय टीवी चैनल की एक खूबसूरत स्टार एंकर नैना की हत्या सुबह की सैर के वक़्त हो जाती है। इसके बाद कहानी टीवी चैनल के कामकाज ,उनमें काम करने वालों के अंतरंग क़िस्सों के इर्द गिर्द घूमती है और संदेह की सुई एक के बाद एक पात्रों पर आकर रूकती जाती है। एक घरेलू गृहणी के तेज़ तर्रार,महत्वाकांक्षी और उन्मुक्त यौन संबंधों के ज़रिए करियर आगे बढ़ाने वाली युवती में बदलने की कहानी पल-पल रहस्य और उत्सुकता जगाती है।मौजूदा दौर का एक दस्तावेज़ नैना:  नैना मौजूदा दौर का एक दस्तावेज़ है। संजीव ने इसे अदभुत क़िस्सागोई के ज़रिए हमारे सामने पेश किया है। इसमें शॉर्ट कट सक्सेस के फार्मूले ,प्यार की कारोबारी परिभाषाएँ ,बिखरते परिवार, रिश्तों की टूटन , जिस्म और भावना के घिनौने रिश्ते – सब कुछ आप इसमें पाएँगे। मुझे नहीं लगता कि   संजीव पालीवाल ने इसमें चैनलों की अंतर कथाओं का कोई अतिरंजित रूप पेश किया है। बहुत कुछ तो मेरे सामने घटता रहा है। कह सकता हूँ कि संजीव ने कमाल का लिखा है। मैंने कहानियां कम ही लिखी हैं। शायद चार या पांच। एक कहानी सत्रह साल पहले राजेंद्र यादव जी के अनुरोध पर ‘हंस’ के लिए लिखी थी – ‘उसका लौटना’। ‘हंस’ के उस विशेषांक में टीवी चैनलों के भीतर की ऐसी ही बदशक्ल होती दुनिया पर टीवी पत्रकारों ने कहानियाँ लिखी थीं। नैना पढ़ते हुए कई बार उस विशेषांक की याद आई।
बाक़ी सब कुछ जन गण मन: बहरहाल ! जब चैनल इंडस्ट्री की जब तस्वीर बदल रही थी तो मैंने लगभग अठारह साल पहले एक तुक बंदी लिखी थी। उसकी कुछ पंक्तियाँ अभी तक याद हैं –
ये है भट्टी , हम हैं ईंधन , बाक़ी सब कुछ जन गण मन
न कुछ तेरा , न कुछ मेरा , बीवी बच्चे जन गण मन
काम किए जा, काम किए जा और झौंक दे तन मन धन
क्योंकि चैनल दौड़ रहा है , इसीलिए सब जन गण मन
ढूँढ़ते रह जाओगे ख़बरें , बरस रहे हैं विज्ञापन
बनी ज़िंदगी एक मशीन , चैनल बन गया नंबर वन 

और भी इससे आगे लंबी रचना है। फिर कभी उसके परदे के पीछे की कहानी सुनाऊँगा। फिलवक़्त तो यही कहूँगा कि नैना आज की टीवी इंडस्ट्री के सच को उजागर करने वाला नायाब शाहकार है। जो भी इस पेशे से जुड़े हैं,उनके लिए भी संग्रहणीय है।

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