इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम। ग्वालियर में हाल ही में वरिष्ठ चित्रकार ओम प्रकाश जड़िया की स्मृति में कला प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इसमें 17 कलाकारों ने अपनी कला कृतिया प्रदर्शित की। प्रदर्शनी में ग्वालियर के प्रख्यात मूर्तिकार और सेवानिवृत संयुक्त संचालक ( जनसंपर्क) सुभाष चंद्र अरोरा की मिक्स मीडिया में बेबी बूमर नाम की तीन चेहरों वाली मूर्ति भी प्रदर्शित की गई। इसके प्रति भी दर्शकों ने विशेष दिलचस्पी दिखाई।
अपनी इस मूर्ति के विषय में सुभाष चंद्र अरोरा ने बताया, यह पीढ़ी अंतराल को दर्शाने वाली मूर्ति है। इस मूर्ति में 1946 से लेकर 1964 के दौरान उत्पन्न हुई पीढ़ी और उससे पहले की पीढ़ी जो एक्स जनरेशन कहलाती है को दर्शाया गया हैl पीढ़ी अंतराल (जनरेशन गैप ) यद्धपि पुरानी पीढ़ी को असहनीय लगता है परंतु विकास की दृष्टि से इस अंतराल का विशेष महत्व रहता है। सुभाष अरोरा कहते हैं आज़ादी के बाद 26 जनवरी 1950 को हमने प्रजातांत्रिक संविधान अंगीकार किया जो बहुत बड़ा बदलाव था । देश में 1950 से 1970 के दौरान जन्मी संतानों को खुला वातावरण और तेजी से आगे बढ़ने का रास्ता मिला। नतीजतन इस पीढ़ी के रचनात्मक बदलाव का मार्ग प्रशस्त हुआ । आगे चलकर यह पीढ़ी देश में बदलाव की मुख्य कारक बनी । वर्तमान में प्रधानमंत्री सहित इस पीढ़ी के बहुत से नागरिक (स्त्री और पुरुष ) विभिन्न क्षेत्रों में स्मरणीय योगदान के लिए इतिहास में अपना स्थान बना चुके हैं । मैंने इस मूर्ति में इसी जनरेशन गैप की तरफ ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की है।