नई दिल्ली,इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय,दिल्ली में तीन दिवसीय चिल्ड्रन थियेटर फेस्टिवल का आयोजन किया गया। नाटक में बच्चों की नई रंग ऊर्जा से भरे तीन नाटकों का मंचन हुआ। ‘भूत नगरी’ में भूतों के खौफ़ के खिलाफ डंका बजा। नाटक-’ इस प्रश्न का उत्तर दो’ में आज के हालात पर सवाल उठे और ‘मोनिया दि ग्रेट’ जैसे पीरियड नाटक में दर्शकों ने देखी बापू के बचपन की अनकही कहानी।
22 जनवरी से 24 जनवरी के बीच यह फेस्टिवल संपन्न हुआ। ख़ास बात यह रही कि तीनों ही नाटकों के हर दिन दो-दो शो हुए। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि संस्कृति मंत्रालय के संयुक्त सचिव बीएस बर्मा मौजूद थे। उन्होंने बाल कलाकारों के परफॉरमेंस की सराहना की। उनकी मौजूदगी के प्रति राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के रजिस्ट्रार प्रदीप के मोहंती ने आभार जताया।
तीन नाटकों के तीन रंग : नाटक – ‘भूत नगरी’ का निर्देशन गुलशन वालिया,मोनिया दि ग्रेट’ का निर्देशन हफीज़ खान और ‘इस प्रश्न का उत्तर दो’ का निर्देशन अखिलेश खन्ना ने किया है। तीनों ही राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में पिछले तीन महीने से जारी स्कूली बच्चों के संडे चिल्ड्रन थियेटर वर्कशॉप में तैयार किये गये। ‘भूत नगरी’ में सबसे कम उम्र के बच्चों और ‘इस प्रश्न का उत्तर दो’ नाटक में सबसे बड़ी उम्र के स्कूली बच्चे ने भाग लिया। निर्माण और प्रस्तुति के स्तर पर तीनों ही नाटकों का अपना रंग था। ‘भूत नगरी’ में बच्चों ने बच्चों पार्क में खेलने वाले बच्चों से भूत को डरते देखा। वहीं गीत-संगीत से सजे नाटक -‘इस प्रश्न का उत्तर दो’ ने आज़ादी के असली मायनों की सीख दी। सवाल पूछा कि स्त्री का असम्मान कर, ईमानदारी और भ्रष्टाचार से मुंह फेरकर ,हिंसा औ नफरत की बुनियाद पर आख़िर ये देश कैसे सही मायनों में आज़ादी के सपनों को पूरे कर सकेगा ?
महात्मा गाँधी की 150 वीं जयंती पर पीरियड नाटक : फेस्टिवल में ‘मोनिया दि ग्रेट’ नाटक के माध्यम से दिल्ली के स्कूली बच्चों ने महात्मा गाँधी के बचपन को याद किया। बच्चों और निर्देशकीय टीम के साथ मिलकर शोध पर आधारित इस नाटक का लेखन शकील अख़्तर ने किया है।
नाटक का निर्देशन हफीज़ खान और डिज़ाइन कैलाश चौहान ने तैयार किया है। नाटक सहज ही महात्मा गाँधी के बाल जीवन की झांकी प्रस्तुत करता है। पोरबंदर और राजकोट में डेढ सौ साल पहले बीते बचपन के सफ़र पर ले जाता है। इस बात को बताता है बचपन में ही सत्य और अहिंसा के पुजारी राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी को ऐसे संस्कार मिल चुके थे जिसने उन्हें मोनिया यानी मोहन से महात्मा बना दिया। नाटक यह याद दिलाना नहीं भूलता कि आज भी गांधी के विचारों की सख्त आवश्यकता है। गांधी के विचारों की हत्या भारतीय आत्मा और संस्कृति की हत्या है। नाटक के सह निर्देशन आशीष देवचारण का है और संगीत कलीम जाफर ने तैयार किया है। #moniathegreat, #nsd,# indorestudio,#मोनियादिग्रेट, #theatre, #drama,#महात्मागाँधी,#रंगमंच,#नाटक,#mahatmagandhi,#shakeelakhter

