शकील अख़्तर, इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम। कला-संस्कृति के प्रति बचपन से समर्पित इंदौर के जयंत भिसे अब उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी भोपाल के निदेशक नियुक्त किये गये हैं। इंदौर में वे नई उम्मीदों का कारवां रहे हैं। वे कई सामाजिक,सांस्कृतिक,खेल और सियासी संस्थाओं से भी जुड़े हैं। वे नगर बीजेपी के उपाध्यक्ष भी है। जयंत भिसे बचपन से ही राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ से जुड़े रहे। संघ परिवार से जुड़े अनेक कार्यक्रमों और प्रकल्पों का भी भार संभालते रहे हैं । इसमें शक नहीं कि अकादमी को उनके अनुभव और प्रबंधन क्षमता का बेहतर लाभ मिल सकेगा।

‘सानंद’ से बने चहेती कला शख़्सियत: जयंत भिसे युवा दिनों में खो-खो खेल से अपनी पहचान बना चुके थे। वे राष्ट्रीय स्तर पर खेले। परंतु मराठी कला जगत में वे तब एक चहेती शख़्सियत बनकर उभरे जब उन्होंने इंदौर में 11 सहयोगियों के साथ मिलकर ‘सानंद’ नाम की संस्था का दायित्व संभाला। देखते-देखते सानंद की गतिविधियां शहर में एक बड़ा सांस्कृतिक आंदोलन बन गईं। बड़ी बात यह थी कि कुछ ही समय में मराठी समाज के 4 हज़ार कला प्रेमी सदस्य इस न्यास से जुड़ गये। इस ट्रस्ट के माध्यम से बेहतरीन नाटक और संगीत आयोजन होने लगे। उन दिनों मैं नई दुनिया में सेवारत था। कई कला आयोजनों को कवर करता था। मुझे याद है उन दिनों हिन्दी नाट्य जगत से जुड़े लोगों के लिये सानंद के आयोजन रश्क की बात हुआ करती थी। विशेषकर न्यास का कला विधाओं के लिये जिस तरह से प्रबंधन किया जा रहा था,वह सीखने की बात थी। संस्था अपने सदस्यों के लिये तब से ही लगभग हर महीने नामी कलाकारों और रंग समूहों के नाटक दिखाने लगी थी, शास्त्रीय गायन के आयोजन करने लगी थी। सदस्यों की जैसे-जैसे संख्या बढ़ी कार्यक्रमों की आवृति भी बढ़ी। सदस्यों को पांच ग्रुप्स में बनाकर एक ही नाटक के पांच-पांच मंचन किये जाने लगे।

सानंद न्यास की कल्पना से मिली प्रेरणा : सानंद की कल्पना ऐसी थी कि उसका बड़ा असर शहर के दूसरे आयोजनों और संस्थाओं पर पड़ा। बाद में कई दूसरी संस्थाओं ने भी कोऑपरेटिव संस्कृति के इस प्रयोग को अपनाया । कला के इस जीवंत शहर में कुछ और अच्छे आयोजन होने लगे। माहौल ऐसा बना कि देश के कई दिग्गज कलाकार और कला संस्थाएं इंदौर में अपने परफॉरमेंस को उत्सुक होने लगे। बेशक यहां के सजग दर्शक भी इसकी बड़ी वजह रहे। जल्द ही कोऑपरेटिव कल्चर माहौल बना और शहर में मुंबई,दिल्ली या राष्ट्रीय स्तर के ख्याति प्राप्त कलाकारों का आगमन आसान हो गया।

कई संस्थाओं का संभाला दायित्व : सदस्य जोड़कर आपसी सहयोग की इस कला संस्कृति के पीछे यक़ीनन जयंत भिसे की अनुभवी दृष्टि भी काम कर रही थी। वे इंदौर क्लॉथ मार्केट सहकारी बैंक में वर्षों काम करते रहे। यहां के वे महाप्रबंधक भी बने। इस अनुभव का ऐसे बड़े काम और प्रबंधन में लाभ मिला। बहरहाल 2013 में आप स्वेच्छा से सेवानिवृत होकर अन्य कई गतिविधियों में समय लगाने लगे। वे अभ्यास मंडल, गणेश मंडल,लता अलंकरण समारोह समिति,इंदौर गौरव फाउंडेशन,प्रतिष्ठित महाराष्ट्र साहित्य सभा से भी जुड़े रहे। सभी चाहते थे कि उनकी प्रबंधन समझा का लाभ मिले। इसके अलावा शिशु मंदिर और सेवा भारती के लिये भी काम करते रहे हैं। जाने-पहचाने मराठी अभिनेता श्रीराम जोग बताते हैं, अपने युवा दिनों में भिसे साहब महाराष्ट्र कॉमर्स सभा नाम की एक संस्था भी चलाते थे। उन्होंने यह संस्था कॉलेज में पढ़ने वाले मराठी भाषी कॉमर्स स्टुडेंट्स के साथ मिलकर गठित की थी। इस संस्था के ज़रिये कॉमर्स के मराठी भाषी स्टुडेंट्स की अध्ययन और कोचिंग में मदद की जाती थी। इसका लाभ मुझे भी मिला। सभा में हुए एक नाटक के माध्यम से ही मैं स्व. बाबा डिके की संस्था ‘नाट्य भारती’ का कलाकार बना।
अकादमी में आयेगी नई जान : माना जा रहा है कि अब उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी के आयोजनों में उनकी मौजूदगी से नई जान आयेगी। इंदौर में अकादमी के बिना दर्शकों वाले राग अमीर के आयोजनों को लेकर पूर्व में नाराज़गी सामने आ चुकी है। शहर के कलाकारों ने बीते आयोजन में यह शिकायत भी की थी कि उन्हें अकादमी के आयोजनों में निमंत्रित नहीं किया जाता या सूचना नहीं दी जाती। कार्यक्रमों को बड़ी अव्यस्थित तरीके से किये जाने की भी बात आई थी। माना जा रहा है कि अब इस अव्यवस्था में भी सुधार आयेगा। कलाकारों के चयन में भी कमी पेशी दूर हो सकेगी। 
अकादमी का व्यस्त कला कैलेंडर : यहां यह जानना ज़रूरी है कि अकादमी संगीत के साथ दूसरी कला विधाओं पर केंद्रित कार्यक्रम आयोजित करती है और इसका व्यस्त सालाना कैलेंडर है। कोरोना की वजह से पिछले डेढ़ सालों में ऐसे आयोजनों पर असर पड़ा है। परंतु अब हायब्रिड आयोजन भविष्य में नई सोच के साथ आकार ले सकते हैं। अकादमी के दायित्वों में शास्त्रीय संगीत और नृत्य की प्रशिक्षण कार्यशालाएं, गुरु पूर्णिमा संगीत समारोह, नाना साहबे पानसे, उस्ताद लतीफ खाँ की स्मृति में वाद्य प्रसंग, पं.नंदकिशोर शर्मा स्मृति समारोह, राग अमीर समारोह, गढ़कुंडार महोत्सव, विरासत महोत्सव, पण्डित कृष्ण राव शकंर पंडित स्मृति समारोह, तानसेन समारोह, खजुराहो नृत्य समारोह, अलाउद्दीन खाँ संगीत समारोह मैहर, कुमार गन्धर्व समारोह देवास, राग अमीर समारोह इंदौर जैसे आयोजन हैं। इसके साथ ही अकादमी के अंतर्गत भोपाल और ग्वालियर का ध्रुपद केंद्र और भोपाल का चक्रधर नृत्य केंद्र भी है। ध्रुपद केंद्रों में जहां गायन तो वहीं चक्रधर नृत्य केंद्र में कथक का प्रशिक्षण दिया जाता है।

