विनोद कुमार शुक्ल को श्रद्धांजलि के साथ ‘NLF 25’ का समापन

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कला प्रतिनिधि, इंदौर स्टूडियो। राजगीर में पहले नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल का सफल समापन हुआ। समापन दिवस की शुरुआत हिंदी साहित्य के महान लेखक और ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित विनोद कुमार शुक्ल को भावपूर्ण श्रद्धांजलि के साथ हुई। प्रतिभागियों ने उनकी लेखनी को साधारण जीवन के अनुभवों को असाधारण साहित्यिक ऊँचाई देने वाली बताया। प्रवासी संस्कृति और भाषा: दिनभर चले सत्रों में नालंदा की वैश्विक विरासत, भारत की पांडुलिपि परंपरा, गांधी विचार और भारतीय लिपियों की धरोहर पर चर्चा हुई। साथ ही समकालीन मुद्दों जैसे ट्रांसजेंडर प्रतिनिधित्व, प्रवासी संस्कृति और बदलती पहचान की कहानियों को भी प्रमुखता मिली। “इंटरैक्टिव सेशन: लेगेसी” में डॉ. सच्चिदानंद जोशी और मॉरीशस की डॉ. सरिता बूधू ने भारतीय प्रवासी संस्कृति और भाषाई निरंतरता पर सारगर्भित संवाद किया। डॉ. बूधू ने कहा – “जब भाषा खो जाती है, तो पहचान भी खो जाती है।”नालंदा : ज्ञान की खिड़की: नालंदा: विश्व की ओर एक खिड़की” सत्र में डॉ. शशांक शेखर सिन्हा ने नालंदा को जीवंत ज्ञान परंपरा बताया। अभय के. ने इसे विश्व के प्रारंभिक वैश्विक ज्ञान नेटवर्कों में से एक कहा। चरखा से चौपाल तक” सत्र में अरविंद मोहन और पुष्यमित्र ने गांधी विचारों का बिहार के लोक जीवन पर प्रभाव बताया। चरखा और खादी को आत्मनिर्भरता का प्रतीक तथा औपनिवेशिक शोषण के प्रतिरोध का साधन बताया गया।साहित्य में विविधता: बियॉन्ड द बाइनरी” सत्र में विजयाराज मल्लिका ने ट्रांसजेंडर और LGBTQ+ लेखकों को साहित्यिक पुरस्कारों में मान्यता देने की अपील की। उन्होंने सांस्कृतिक समावेशन और सामाजिक न्याय की आवश्यकता पर जोर दिया। “चोखा और गमछा से आगे की कहानियाँ” सत्र में अखिलेंद्र मिश्रा ने बिहार के खानपान को स्मृति और नैतिकता का वाहक बताया। उन्होंने पारंपरिक भोजन को टिकाऊ और संतुलित बताया तथा मखाना, तिलकुट, अनरसा और सिलाव खाजा जैसे GI टैग उत्पादों के संरक्षण पर बल दिया।कविता की सच्चाई: वेरासिटीज ऑफ पोएम” लाइव शो में पद्मश्री हलधर नाग और अन्य कवियों ने कविता की भावनात्मक शक्ति और वैश्विक प्रासंगिकता पर विचार साझा किए। एनएलएफ की यात्रा और प्रेरक आयाम” सत्र में डी. आलिया और संजय कुमार ने महोत्सव की परिकल्पना और विकास यात्रा पर प्रकाश डाला। इसे दलित, महिला, आदिवासी और ट्रांसजेंडर साहित्य को मंच देने वाला बताया गया।समापन और सम्मान: निदेशक गंगा कुमार ने कहा कि यह महोत्सव नालंदा की ऐतिहासिक भूमिका को पुनः स्थापित करता है। समापन समारोह में वक्ताओं, संचालकों और कलाकारों को सम्मानित किया गया। आगे पढ़िये – जबलपुर के आर्ट फेस्टिवल जलम 2025 में कई कार्यक्रम जारी https://indorestudio.com/alam-festival-2025-jabalpur-grand-opening-report/

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