भोपाल, इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम। आलोक चटर्जी ने मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय की कमान संभालते ही काफी तेज़ गति से काम करना शुरू कर दिया है। नये कार्यक्रमों की रूपरेखा बनाने के साथ ही वे रंगमकर्मियों से खुलकर मुलाकात भी कर रहे हैं। उनके लिए बेहतर काम करने के साथ ही अच्छा वातावरण देने की कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने रंगकर्मियों को अपना घर दिए जाने की योजना बनाने की दिशा में भी काम करने का फैसला किया है। यह अच्छी बात है। देखना यह है कि उनके कार्यकाल में रचनात्मक धरातल के साथ ही रंगकर्मियों के हित में कितने काम हो पाते हैं।
आलोक चटर्जी नेशनल ड्रामा ऑफ स्कूल से गोल्ड मेडिलिस्ट हैं। अभिनय और निर्देशक दोनों ही रूप में वे सफल रहे हैं। आलोक राज्य के कलाकारों के साथ लगातार काम करते रहे हैं। अपने वीडियो के ज़रिये उन कलाकारों के बीच पहुंचने का काम करते रहे हैं, जो दूर हैं और रंगकर्म के बारे में जानना चाहते हैं। हाल ही में जयंत देशमुख के साथ नटसम्राट जैसे नाटक से जबरदस्त चर्चा में रहे। इनके शोज़ को खासा कवरेज मिला। दर्शकों ने नाटक की दिल खोलकर प्रशंसा की। सभी जानते हैं आलोक चटर्जी भी दूसरे कलाकारों की तरह मध्यप्रदेश के बाहर अपना बेहतर स्थान बना सकते थे लेकिन उन्होंने प्रदेश में ही काम करना ज़रूरी समझा। आलोक दा के नाम से अपने लोगों के बीच मशहूर आलोक प्रयोगधर्मी नाट्य निर्देशक हैं। वे परम्परा पर उतना ही भरोसा करते हैं तो नए प्रयोग भी करने से पीछे नहीं हटते।
आलोक ने जिन शीर्षस्थ रंग निर्देशकों के साथ काम किया है, उनमें ब व.कारन्त, प्रसन्ना, श्यामानन्द जालान, बी. एम. शाह, रोबिन दास, मोहन महर्षि, रामगोपाल बजाज, के. एन. पाणिकर, रतन थियम, बंसी कौल, जॉन मार्टिन, फ्रिट्ज़ बेनेविट्स, कैथरीन, ज्यां लेबोडे, सायरा एस्सा, सिसली, बेरी इयातोम्बी, ब्योने मोंजालिस और बैरी जॉन जैसे मशहूर थिएटर डायरेक्टर शामिल हैं। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा और एफटीआई में उन्होंने कई वर्ष विजिटिंग प्रोफेसर पढ़ाया है। आलोक को बलराज साहनी, नसीरुद्दीन शाह, रॉबर्ट डिनेरो, टॉम हेंस और अल पचीनो का अभिनय अच्छा लगता है। उन्हें रवींद्र नाथ ठाकुर, रघुवीर सहाय और एजरा पाउंड की कविताएँ पढ़ना पसंद हैं।

