Saturday, September 12, 2026
Homeकला खबरेंनाटक ‘बसामन मामा’ में दिखी बघेलखण्ड लोक-संस्कृति की अद्भुत झलक

नाटक ‘बसामन मामा’ में दिखी बघेलखण्ड लोक-संस्कृति की अद्भुत झलक

इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम। सीधी में ग्यारह दिवसीय राष्ट्रीय नाट्य कार्यशाला का समापन ‘बसामन मामा’ के मंचन के साथ संपन्न हुआ। नाटक में बघेलखंड के लोक संस्कृति की अद्भुत झलक देखने को मिली। नाट्य प्रस्तुति और कलाकारों के अभिनय ने दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। नाटक का लेखन रोशनी प्रसाद मिश्र ने किया है। इसका निर्देशन रजनीश जायसवाल ने किया। इसमें कार्यशाला में आठ राज्यों समेत स्थानीय कलाकारों ने अभिनय किया।पीपल के पेड़ को समर्पित कहानी : नाटक जनश्रुति पर आधारित है। नाटक का नायक बसामन शुक्ला पीपल के पेड़ को ईश्वर से भी ज्यादा मानता है। परंतु राजा अहंकार वश बसामन के विवाह के अवसर पर इस पेड़ को कटवा देता है। इस बात से आहत बसामन अपनी नई-नवेली दुल्हन को अकेली छोड़कर राजा से बदला लेने चल देता है। रास्ते में उसे भाँट मिल जाता है जो उसे वापस लौटने को कहता है लेकिन वह नहीं मानता। राजमहल के सामने और राजा को ललकारता है। पर राजा सारे दरवाजे बंद करवा देता है जिससे बसामन निराश होकर स्वयं को कटार मारकर आत्महत्या कर लेता है। इस बात से भाँट को आत्मग्लानि होती है। वह भी खुदको कटार मारकर आत्महत्या कर लेता है। इसके बाद राजा दोनों का दाह संस्कार करा देता है। इस बीच राजमहल में अद्भुत चमत्कार होता है। रसोई में बना हुआ एवं थाली में परोसा भोजन गायब हो जाता है। इसे देखकर राजा सहित समस्त मंत्री-संत्री भयभीत हो जाते हैं। तभी बसामन की आत्मा आकर राजमहल सहित मंत्री-संत्री सब को नष्ट कर देता है।अतिथियों ने की नाटक की सराहना :नाटक में बतौर मुख्य अतिथि संस्कार भारती मध्य क्षेत्र के संगठन मंत्री प्रमोद झा शामिल हुए। उनके साथ विशिष्ट अतिथि डॉ. शिवशंकर मिश्र सरस, अजीता द्विवेदी, विवेक सिंह तथा इंद्रवती नाट्य समिति के संरक्षक डॉ. अनूप मिश्र ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की। तदुपरांत मां वीणावादिनी स्वर संगम के बाल कलाकार सृजन मिश्र ने सरस्वती वंदना से वाणी की देवी की आराधना की।नाटक के उपरांत डॉ. अनूप मिश्र ने अपना उद्बोधन देते हुए कहा कि इस कार्यशाला से मुझे भी बहुत कुछ सीखने को मिला,मैंने अपनी आँखों के सामने परकाया प्रवेश के माध्यम से चरित्र का निर्माण होते बहुत नजदीकी से देखा है जो मेरे लिए नया अनुभव था। वरिष्ठ साहित्यकार शिवशंकर मिश्र ने कहा कि नाटक में लोकगीतों का प्रयोग नई पीढ़ी को लोक संस्कृति के संरक्षण का संदेश देता है तो बसामन का प्रकृति प्रेम पर्यावरण को बचाने की बात कहता है जो आज की महती आवश्यकता है। मुख्य अतिथि प्रमोद झा ने कहा कि मैंने ऐसा अद्भुत नाटक अपने जीवन पहली बार देखा है इस नाटक को देखकर विस्थापन के मामले में सरकार के कई अहम फैसले बदल सकते हैं ।नाटक में सम्मिलित कलाकार: बसामन की भूमिका में रहे उत्कर्ष गुप्ता,राजा के चरित्र को जिया अंकित कश्यप ने, रानी निकिता रावत, राजकुमार अनुभूति कुंदेर,मंत्री थे अमित पाण्डेय,भाँट व सूत्रधार एक पीयूष लोनारे, सेनापति गौरव भदौरिया,बसामन की माँ थी हर्षा शर्मा, पत्नी शिवानी माचवै,ससुर शुभम भारती,सैनिक एक सत्य प्रकाश, सैनिक दो व सूत्रधार तीन सर्वेश यादव,सूत्रधार दो सागर भडगर,कुमार मंगलम पाण्डेय,अभिषेक शर्मा,ग्रामीण एक भगवानदास अहिरवार, ग्रामीण दो हर्षित मिश्र, ग्रामीण तीन एवं पंडा लकी चतुर्वेदी,हाथी राजा सोनारतिया,पेंड़ अभय सिंह,शुभम राजपूत, सत्य प्रकाश,सौरव दीक्षित, समूह:-सोमेश शर्मा, राजकुमार यादव,सत्यम शुक्ला, ऋषभ शर्मा, अतुल बुधौलिया,अभिनय कुंदेर। नेपथ्य के कलाकार : वस्त्र विन्यास शिवानी माचवे, प्रजीत साकेत, मंच सामग्री अजय चौकसे, अनिल डेहरिया, कपिल मालवीय, रूपसज्जा राजा सोनारतिया, मंगलम, प्रकाश एवं संगीत संयोजन प्रजीत साकेत, गायन एवं हारमोनियम वादन सृजन मिश्र, ढोलक हिमांशु मिश्र, बॉसुरी वादन सागर भडगर, मांदर अमन चौधरी, गुदुम्ब हरिप्रसाद घासी, ढफली दान बहादुर घासी, टिमकी मिठाईलाल, शहनाई शेषमन घासी। परिकल्पना,प्रबंधन और सहयोग: कार्यशाला का आयोजन इंद्रवती नाट्य समिति सीधी एवं संस्कार भारती मध्यक्षेत्र के संयुक्त तत्त्वधान में किया गया। कार्यशाला का प्रबंधन आर्ट ऑन क्लिक, संयोजन एक्सट्रीम आर्ट एण्ड एजुकेशनल सोसाइटी, समन्वयन रंगपटल परफार्मिंग आर्ट सोसाइटी द्वारा किया गया तथा प्रायोजन वैष्णवी गार्डेन ने किया। कार्यशाला की परिकल्पना नीरज कुंदेर ने की। उन्होंने इंद्रावति नाट्य समिति के निदेशक रूप में सभी अतिथियों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। विशेष सहयोग डॉ. अनूप मिश्र, इंजी. आर. बी.सिंह,अजीता द्विवेदी, सुनील भुर्तिया,सुनील चौधरी,कुंदन साफा,अक्षत रेसीडेंसी, राजकुमार गुप्ता,जगत बहादुर सिंह व संतोष द्विवेदी,विवेक सिंह मधुसूदन फिटनेस क्लब का रहा।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments

जावेद अहमद शाह ख़ान "अल-हिंदी" on रंगमंच की नई उड़ान…सौम्या व्यास