Wednesday, May 13, 2026
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नाटक ‘मोनिया दि ग्रेट’ के बारे में क्या कहते हैं बाल कलाकार और उनके पैरेंट्स ?

नई दिल्ली,इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम। महात्मा गाँधी के बचपन पर आधारित नाटक- ‘मोनिया दि ग्रेट’ में अभिनय को इस ड्रामा के बाल कलाकारों ने उनके जीवन का सबसे सुंदर अनुभव बताया है। नाटक के दो शोज़ 23 जनवरी 2019 को दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के ‘चहुँमुख’ प्रेक्षागृह में हुए हैं। शोज़ के बाद उनके अनुभवों के बारे में नाटक के रचनाकार शकील अख़्तर ने अनौपचारिक तौर पर उनसे बातचीत की। इस बातचीत का वीडियो रजनी केसरवानी ने बनाया है, जो इस नाटक में अहम भूमिका निभाने वाले एक बाल कलाकार शौर्य की मां भी हैं। आप भी देखिये बच्चों ने इस बातचीत में क्या कहा ? इस बातचीत के वीडियो दो पार्ट में आप देख सकते हैं।

बातचीत के दौरान बच्चों ने माना कि इससे पहले महात्मा गाँधी की समझ बहुत कम थी लेकिन इस नाटक ने उनके लिये महात्मा गाँधी के जीवन के विचारों को समझने में मदद की। यह समझाया कि आख़िर बापू मोनिया उर्फ मोहन से महात्मा गाँधी कैसे बने। कुछ बच्चों ने रंगमंच के अनुभव पर कहा, यहां उन्हें सबसे अच्छे दोस्त और टीचर मिले। रजनी केसरवानी के इस वीडियो में मोनिया के जिन प्रतिभाशाली बच्चों ने अपने विचार रखे हैं उनके नाम हैं-अंश वासवानी,शौर्य केसरवानी, आरव रैना, आयुष्मान कुमार,दीपाली ठाकुर, रिषी छाबड़ा,धृति गोयल,सर्वस्व,रूपेश,सिद्धांत शर्मा,तनवरी सिंह अरोरा,दिव्य लक्ष्य बैसोया,प्रथम खन्ना,युवराज शर्मा,त्विषा शर्मा,रेहा भटनागर, शरण्या शंकर,चहक राना।

माता-पिता ने भी नाटक पर जताई अपनी खुशी: बाल कलाकार के पैरेंट्स ने भी नाटक की प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि इस नाटक को बच्चों के साथ मंचन के लिये चुना जाना एक बड़ी बात है। महात्मा गाँधी की 150 वीं जयंति वर्ष में यह सबसे दिलचस्प और सराहनीय बात रही। महात्मा गाँधी के बचपन को जान समझकर बच्चे संस्कारित हुए हैं और उऩमें एक नया विश्वास जागा है। उन्होंने इस नाटक में अपने बच्चों को काम के दौरान उनके अनुशासित दिनचर्या के साथ ही सोच और व्यवहार में बदलाव होने को महसूस किया। पैरेंटेस के इन विचारों को भी आप रजनी केसरवानी के बनाये वीडियो़ज़ में देख और सुन सकते हैं।

पैरेंट्स ने महात्मा गाँधी की 150 वीं जयंती वर्ष में इस नाटक को लिखे जाने और मंच पर लाने को एक बड़ी उपलब्धि बताया है। कुछ पैरेंट्स यह भी कहा कि वे चाहते हैं इस नाटक के लगातार मंचन होते रहे और इसमें वे अपने  बच्चों के साथ हर तरह से साथ रहने और सहयोग करने को तैयार हैं। कुछ पैरेंट्स नाटक के शोज़ अपने दम पर आयोजित करने की जिम्मेदारी भी ली।

आपको बता दें यह नाटक दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ़ड्रामा ( nsd,delhi) की चिल्ड्रन थिएटर वर्कशॉप में लिखा और तैयार किया गया है। इस वर्कशॉप के प्रभारी और सूत्रधार नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के रजिस्ट्रार प्रदीप के मोहंती हैं। नाटक निर्देशन हफीज़ खान ने किया है। नाटक का शोध और लेखन सीनियर टीवी जर्नलिस्ट और लेखक शकील अख़्तर ने किया है। डिज़ाइन कैलाश चौहान का है। निर्देशन सहयोग आशीष देवचरण का है। नाटक में दिल्ली के स्कूलों के तकरीबन 25 बच्चों ने काम किया है। संगीत कलीम जाफर और वादन सहयोग नीलेश मनोहर और गगन सिंह बैस का है। #moniathegreat,#mahatmagandhi,#gandhichildhood,#nsd,#shakeelakhter,#drama,    #theatre,#मोनियादिग्रेट,#नाटक,#महात्मागांधी

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