Wednesday, May 13, 2026
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नाटक ‘पंचभगत’ का सवाल…शहीद भगत सिंह ने जिस आज़ादी की कल्पना की थी, क्या वह आज़ादी हमें मिल गई है ?

कला प्रतिनिधि,इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम। शहीद भगत सिंह के बलिदान पर आधारित नाटक ‘पंचभगत’ का सीधी के बैजनाथ सभागार में मंचन हुआ। नाटक सवाल उठाता है कि देश के लिये अपनी जान कुरबान कर देने वाले भगत सिंह ने जिस आज़ादी की कल्पना की थी, क्या वैसी पूरी आज़ादी हमें मिल गई है ? यह सवाल का उत्तर ही दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देता है। जवाब हम सब जानते हैं..नहीं। नरेन्द्र बहादुर सिंह लिखित इस नाटक का निर्देशन नीरज कुंदेर ने किया। नाटक की प्रभावी प्रस्तुति की दर्शकों ने सराहना की। अतिथियों ने कहा, युवा पीढ़ी के लिये यह एक प्रेरक नाटक है। नाटक ‘पंचभगत’ का मंचन यहां आयोजित पंद्रह दिवसीय नाट्य कार्यशाला में प्रशिक्षण के बतौर किया गया। नाटक में पंच यानी पांच पात्र हैं। यही इसकी विशेषता है। पांचों पात्र भगत सिंह के हैं जो पंचतत्वों से बने शरीर को परमेश्वर का दर्जा दिलाते हैं। पंचतत्वों का अंतरद्वन्द भगत सिंह के मन का अंतर द्वन्द साबित होता है, भगत सिंह आस्तिक और नास्तिक की भावना से ऊपर उठकर देश को सम्पूर्ण आजादी दिलाने के लक्ष्य लेकर आगे बढ़ते हैं। भले महात्मा गांधी से उनके विचार भिन्न थे परंतु दोनों का उद्देश्य एक ही था भारत को अंग्रेंज़ों की गुलामी से आज़ाद कराना। इसके लिये फिर चाहे बलिदान ही क्यों न देना पड़े। आख़िरकार भगत सिंह देश के लिये 23 साल की उम्र में हंसते-हंसते फांसी का फंदा चूम लेते हैं। उनका बलिदान आंदोलनकारियों के लिये प्रेरणा बन जाता है।नाटक सवाल उठाता है, क्या जिस तरह की आज़ादी की शहीद भगत सिंह ने कल्पना की थी ? क्या वैसी संपूर्ण आज़ादी आज हम सबको मिल सकी है। ज़ाहिर है कि इसका उत्तर नहीं है। यही सवाल दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देता है। नाटक में पियूष लोनारे, लकी चतुर्वेदी, अमन रॉय, नईम अंसारी और विशाल सिंह ने पंच भगत की भूमिकाओं में सराहनीय अभिनय किया। प्रकाश परिकल्पना रजनीश जायसवाल, वेशभूषा और संगीत संयोजन प्रजीत साकेत,गायन सृजन मिश्र,परिकल्पना, निर्देशन नीरज कुंदेर का रहा। इस मंचन से पहले आमंत्रित अतिथियों सर्वश्री इन्द्रशरण सिंह, डॉ. अनूप मिश्र, डॉ. शिवशंकर मिश्र सरस, विवेक सिंह, कनिष्क तिवारी और अजीता द्विवेदी ने दीप प्रज्जवलित किया। नाटक की डॉ. अनूप मिश्र और युवा समाज सेवी विवेक सिंह ने प्रशंसा की। अपनी प्रतिक्रिया में आशा जताई कि यह नाटक युवा पीढ़ी को प्रेरित करेगा। देश और समाज हित के लिये वे कुछ अच्छा करने का प्रण लेंगे। संबोधन के बाद पंद्रह दिन की नाट्य कार्यशाला में शामिल हुए सभी कलाकारों को प्रमाण पत्र भेंट किये गये। सभी का अजीता द्विवेदी ने आभार जताया।सीधी में इस कार्यशाला का आयोजन इंद्रवती नाट्य समिति सीधी एवं एक्सट्रीम आर्ट एण्ड एजुकेशनल सोसायटी ने किया था। प्रबंधन आर्ट ऑन क्लिक और संयोजन रंगपटल परफ़ार्मिंग आर्ट सोसायटी का रहा। कार्यशाला के प्रशिक्षक दल में रोशनी प्रसाद मिश्र, नीरज कुंदेर, शिवनारायण कुंदेर,रजनीश जायसवाल, प्रजीत साकेत में सम्मिलित रहे। जबकि कार्यशाला के निर्देशक रोशनी प्रसाद मिश्र रहे।

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