(शकील अख़्तर)। दिल्ली के त्रिवेणी सभागार में नटरंग प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित नेमिचंद्र जैन नाट्य लेखन पुरस्कार में नाटकों का ‘रंगपाठ’ एक अभिनव प्रयोग बन गया। दिल्ली के तीन अलग-अलग नाट्य समूहों ने ‘रंगपाठ’ को मंच पर जिस तरह से प्रस्तुत किया, उसने कम खर्च में नये नाटकों को दर्शकों के बीच लाने की नई आधारशिला रख दी है। वरिष्ठ रंग निर्देशिका कीर्ति जैन ने इस तरह के रंगपाठ को बेहद प्रभावी और रंगमंच के लिये नई आशा जगाने वाला कहा है। गौर तलब है कि नेमिचंद्र जैन नाट्य लेखन पुरस्कार से कोलकाता के एसएम अज़हर आलम, मुंबई की विभा रानी और दिल्ली के अशोक लाल सम्मानित किये गये हैं। तीनों नाटककारों के पुरस्कृत नाटकों का रंगपाठ हुआ है।
*रंगपाठ की नई ‘रूह!’ पहले दिन एसएम अज़हर आलम के लिखे उर्दू नाटक ‘रूहें; का रंगपाठ हुआ। दिल्ली ट्रेज़र आर्ट के कलाकारों ने साजिदा के निर्देशन में यह रोचक पाठ प्रस्तुत किया। उन्होंने स्क्रिप्ट को प्रमुखता दी, परंतु ज़रूरी दृश्यों की रचना भी की। कुछ प्रभावशाली दृश्यों की दर्शकों के साथ ख़ुद नाटककार अज़गर आलम ने प्रशंसा की। उन्होंने कहा, 5-10 रिहर्सल के बाद यह नाटक दिल्ली में मंचन की स्थिति में पहुंच जाएगा। निर्देशिका साजिदा ने कहा, रंगपाठ को इस तरह से मंच पर लाना आसान नहीं था। एक वक्त ऐसा आया जब कलाकारों ने कहा कि उन्हें तकरीबन लाइनें याद हैं। स्क्रिप्ट के बिना भी वे रंगपाठ प्रस्तुत कर सकते हैं। परंतु मैं चाहती थी कि स्क्रिप्ट हाथ में ही रहे, आलेख को ही प्रमुखता मिले। कोई इम्प्रोवाइज़ेशन ना हो। ऐसा हमने किया भी। वरिष्ठ रंग निर्देशक ने एक और अहम बात कही, साजिदा ने कहा कि किसी भी नये नाटक को तैयार करने में रंग मंडलियों के सामने बजट या खर्च एक बड़ी रूकावट होती है। परंतु रंगपाठ में यह काम हम बहुत कम खर्च से कर सकते हैं। बाद में अपनी टिप्पणी में वरिष्ठ रंग निर्देशक कीर्ति जैन ने कहा, रंगपाठ के ऐसे प्रयोग भविष्य में बहुत से नाटकों को मंच तक लाने का मार्ग प्रशस्त करेंगे। रंगपाठ के ऐसे अभिनव प्रयोग हमें जारी रखना चाहिये। साजिदा ने कहा कि वे ऐसे प्रयोगों को जारी रखेंगी।
*मंच पर ‘प्रेग्नेंट फ़ादर’ और ‘शत्रु’ दूसरे दिन के 2 सत्रों में विभा रानी के नाटक ‘प्रेग्नेंट फादर’ और अशोक लाल के नाटक ‘शत्रु’ का रंगपाठ हुआ। ‘प्रेग्नेंट फादर’ का रंगपाठ ‘रेनेस्टांस’ के कलाकारों ने मोहित त्रिपाठी के निर्देशन में किया। ‘प्रेग्नेंट फ़ादर’ के ज़रिये नाटक में एक स्त्री के गर्भ धारण करने और उसके पति,परिवार और समाज के व्यवहार को बेहद मार्मिक तरीक से उठाया गया है। समाज की दकियानूस मानसिकता,मीडिया और डॉक्टरों के निहित स्वार्थों पर प्रहार किया गया है। रंगपाठ के बाद अपने वक्तव्य में विभा रानी ने कहा, मैं नहीं चाहती कि नाटक की कल्पना के अनुरूप पुरूष गर्भ धारण करे, परंतु घर में एक स्त्री के प्रेग्नेंट होने पर पति,परिवार,समाज उसके प्रति जो रवैया अपनाता है, उसपर गंभीरता से विचार करना और कमसेकम एक प्रेग्नेंट महिला की भावनाओं को समझना और उसका अहसास करना ज़रूरी है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया, नाटक की पांडुलिपी में मैंने दो अंत रखे थे। एक जिसमें प्रेग्नेंट हुए फादर का सपना टूटता है। जागते ही वो आम पुरूष की तरह पत्नी से व्यवहार करने लगता है। दूसरा जिसमें एक पिता सच में गर्भ धारण करता है। संतान को जन्म देता है। मां बनने से जुड़ी बातों का अहसास करता है। मैंने दूसरे अंत को ही किताब में रखा है। इस नाटक की रिहर्सल के दौरान कलाकारों ने भी अपने विचारों में जो बदलाव महसूस किये,उसको अपनी टिप्पणियों में साझा किया।

*भीतर के शत्रु पर विजय अंतिम सत्र में अशोक लाल रचित नाटक ‘शत्रु’ का नाट्य पाठ हुआ। इसमें ख़ुद अशोक लाल ने सक्षम थियेटर ग्रुप के कलाकारों के साथ भाग लिया। निर्देशन सुनील रावत ने किया। तकरीबन 2 घंटे की अवधि के इस नाटक के संपादन की ख़ुद लेखक ने जहां ज़रूरत बताई,वहीं आमतौर पर दर्शकों ने कहा कि उन्हें नाटक देखते वक्त समय का पता ही नहीं चला। नाटक के लेखन के संदर्भ में वरिष्ठ रंग निर्देशक अशोक लाल ने कहा, मैंने इस नाटक की रचना अजातशत्रु की बौद्ध दंत कथा के आधार पर की है। नाटक अपने नाम ‘शत्रु, दि एनिमि विदिन’ के अनुरूप ही लिखा है। यह अपने दुर्गुण रूपी शत्रुओं की पहचान करने, ख़ुद अपने भीतर झांकने की बात करता है। दूसरों पर दोषारोपण की नहीं। असल में मनुष्य की नियति का आधार उसके कर्म है। यही नाटक की मूल बात है।
आयोजन में रंगपाठ का यह सिलसिला दो दिन के तीन सत्रों तक चला। तीनों ही पाठ अपने-अपने स्तर पर प्रभावपूर्ण रहे। नाट्य या रंग पाठ कोई नई बात नहीं है। परंतु नटरंग के आयोजन में कलाकार समूहों ने साधारण पाठ से बढ़कर एक प्रस्तुति के रूप में रंगपाठ किया, यह बड़ी बात है। नाटक ‘रूहें’ और ‘प्रेग्नेंट फ़ादर’ की नाट्य प्रस्तुतियां इस नज़रिये से सराहनीय रहीं। रंगपाठ के अलावा दूसरे दिन के दोनों सत्रों में विभा रानी और अशोक लाल के पुरस्कृत नाट्य पुस्तकों का विमोचन भी हुआ।

