Wednesday, May 20, 2026
Homeकला खबरेंनया रंगानुभव बन गया 'अनुकृति रंगमंडल' कानपुर का राष्ट्रीय नाट्य समारोह

नया रंगानुभव बन गया ‘अनुकृति रंगमंडल’ कानपुर का राष्ट्रीय नाट्य समारोह

कला संवाददाता, इंदौर स्टूडियो। नाट्य मंडलियों के 8 समूह, उन मंडलियों में शामिल 120 से अधिक कलाकार और विभिन्न विषयों पर केंद्रित 11 विचारोत्तेजक नाटक। कानपुर में ‘अनुकृति रंगमंडल’ का यह छह दिवसीय राष्ट्रीय नाट्य समारोह था जो 14 से 19 अक्टूबर तक स्थानीय मर्चेंट चेंबर ऑडिटोरियम में संपन्न हुआ। समारोह में छह राज्यों से आये कलाकारों ने प्रभावशाली प्रस्तुतियां दीं। इस तरह यह समारोह रंगकर्मियों और प्रेक्षकों के लिये एक नया रंगानुभव बन गया। समारोह में कानपुर के अलावा वाराणसी,प्रयाग राज,नवी मुंबई,दिल्ली,जयपुर और भुवनेश्वर के रंगकर्मियों ने अलग-अलग अंदाज़ की यादगार प्रस्तुतियाँ मंचित कीं।संदीप नाथ ने किया समारोह का शुभारंभ: नाट्य समारोह संगीत नाटक अकादमी और संस्कृति मंत्रालय के साझा सहयोग से संपन्न हुआ। समारोह का शुभारंभ ख्यात गीतकार, कवि और कंपोज़र संदीप नाथ ने किया। पहले दिन ‘सम्बोधन’ और ‘नि:शब्द’, दूसरे दिन ‘दशावतार’, तीसरे दिन ‘दूसरा आदमी-दूसरी औरत’ तथा ‘ज़हर’, चौथे दिन ‘त्रियात्रा’ और ‘मुहब्बत के साइड इफेक्ट्स’, पाँचवे दिन ‘2025’ और ‘सैलाब’ और छठे दिन ‘मोह’ और ‘पंछी ऐसे आते हैं’ नाटक खेले गये। विभिन्न विषयों पर केंद्रित इन विचारोत्तेजक प्रयोगों ने समारोह को देखने वालों के लिये यादगार बना डाला।पहले दिन ‘सम्बोधन’ से जुड़े सवाल और ‘नि:शब्द त्रासदी: सुनील राज लिखित और डॉ. ओमेन्द्र कुमार द्वारा निर्देशित ‘सम्बोधन’ पहले दिन प्रस्तुत नाटक था। इसमे 20 साल की एक बेटी अपने पिता को न सिर्फ तलाशती है बल्कि वह उनसे यह भी जानना चाहती है कि आख़िर पिता ने उसकी माँ को क्यों छोड़ दिया था। पिता से किये सवालों में वह उन जवाबों को पा लेती है जिसे उसकी माँ अपने सम्बोधनों में जीवन भर से तलाश रही थी। नाटक में  शुभी मेहरोत्रा ने पत्नी श्रृद्धा,आरती शुक्ला ने बेटी श्रुति और दीपक राज राही ने पति और पिता राजेश्वर की भूमिका बखूबी निभायी। नाटक ‘नि:शब्द’ में कोरोना आघात का जीवंत चित्रण है। यह एक ऐसे परिवार की कहानी है जिसमें पत्नी के कोरोना पॉज़िटिव होने के बाद ऑक्सीजन सिलेंडर ख़रीदने में धोखाधड़ी होती है और निधन के बाद अंतिम संस्कार करना भी मुश्किल सवाल बन जाता है। इस दुखांत नाटक में शैलेन्द्र अग्रवाल, आरती शुक्ला, संध्या सिंह, हर्षित शुक्ला, दिलीप सिंह ने जीवंत अभिनय किया। मंच परे दीपिका सिंह, महेश जायसवाल, विजय भास्कर (संगीत) का योगदान रहा। लेखक राजेश कुमार इस नाटक का निर्देशन एवं प्रकाश संचालन कृष्णा सक्सेना ने किया।कलयुग में मानवता की रक्षा करेगा ‘दशावतार: उड़िया लेखक शंकर प्रसाद त्रिपाठी और निर्देशक धीरेन्द्र नाथ मलिक के इस नाटक में दिखाया गया है कि भगवान विष्णु के दस अवतार, निर्दोष लोगों को राक्षसों के उत्पीड़न से बचाने और मानव धर्म की स्थापना के लिए पृथ्वी पर उतरते हैं।  कच्छप अवतार (कछुआ) के रूप में, भगवान विष्णु दूध महासागर (खिरोसिंधु) को मंथन करने में मदद करते हैं, और बुद्ध अवतार के रूप में, विष्णु निस्वार्थता सिखाते हैं।  दसवां अवतार कल्कि अभी आना बाकी है। ऐसा कहा जाता है कि जब सत्ताधीश कमज़ोरों के साथ अन्याय और उत्पीड़न की हदें पार कर देते हैं तब भगवान विष्णु ऐसे पापियों को दंडित करने के लिए कल्कि के रूप में प्रकट होंगे। नाटक में लोकप्रिय लोक रूपों का उपयोग किया गया है। नाटक में विधांशु त्रिपाठी, सौम्या रंजन महापात्र, अपूर्वा साहू, अशोक साहू, शुभम, मनोज कुमार, चंद्र नारायण, विश्वजीत, सत्यप्रकाश जेना, आलोक अग्निवेश, संग्राम महाराणा, नेहा रंजन, संतोष मोहंती, कार्तिक चंद्र, अनिल कुमार, संवित राउत, भारत भूषण पांडा, मोनीदीपा मलिक, प्रियंका, आभा ने प्रमुख भूमिकाएं निभायीं। रूप सज्जा नरेन्द्र सेनापति, संगीत प्रताप राउत व प्रकाश परिकल्पना दर्प नारायण सेठी की रही।‘दूसरा आदमी,दूसरी औरत’ और रिश्तों की डोर में पड़ी गांठ: विभा रानी लिखित नाटक ‘दूसरा आदमी,दूसरी औरत’ हमें जीवन के खालीपन से उपजे नए संबंधों की कहानी की ओर लेकर जाता है। नाटक कहता है कि तन इतना भी महत्वपूर्ण नहीं कि जिसके लिये रिश्तों को परे रख दिया जाये या उसे ख़त्म ही कर दिया जाये। दो पात्रीय यह नाटक हमें रिश्तों के प्रति अपने चिंतन और विचारधारा को एक सही और सार्थक दिशा प्रदान करता है। नाटक की संवेदनशील भूमिकाओं के साथ सोनिया गुप्ता और  रवि वैद्य ने न्याय किया। म्यूजिक एवं ड्रामा सर्कल मुंबई की इस प्रस्तुति का निर्देशन विवेक भगत ने किया। मंच निर्माण डा.राजेन्द्र वर्मा, प्रकाश-रितेष सिंह, संगीत-नरेंद्र सिंह , प्रापर्टी-भूप खन्ना और समन्वयक-केएम गुप्ता रहे।इंसान को नहीं, उसके भीतर भरे ‘जहर’ को खत्म करना जरूरी:  नाटक ‘ज़हर’ एक ऐसे इंसान की कहानी है जो प्रेम विवाह करने के बाद पारिवारिक और कारोबार की समस्याओं में ऐसा उलझता है कि उसकी ज़िदंगी कब तार-तार हो जाती है, उसका उसे पता ही नहीं चलता। जीवन में कड़वाहट इतनी बढ़ जाती है कि वो ज़हर खरीदने केमिस्ट के पास पहुंच जाता है। अनुभवी केमिस्ट चतुराई से धीरे-धीरे उसके भीतर के ज़हर को निकाल फेंकता है। मनोरंजन, सस्पेंस से भरपूर इस दो पात्रों वाले नाटक में व्यक्ति की भूमिका महेंद्र धुरिया और  केमिस्ट का किरदार प्रवीण अरोड़ा ने बखूबी निभाया। निर्देशन प्रवीण अरोड़ा का था। प्रकाश परिकल्पना, संचालन अश्वनी ‘मक्खन’, संगीत विजय भास्कर और प्रस्तुति सहायक श्री दिलीप रहे ।त्रियात्रा’ ने खींचा मानवीय स्वभाव का खाका: नाटक ‘त्रियात्रा’ के जरिये ‘क्यूरियो जयपुर’ के कलाकारों ने मानवीय स्वभाव का खाका खींचा। नाटक का निर्देशन गगन और प्रियदर्शिनी मिश्रा ने किया। परंपरागत नाटकों से हटकर यह तीन कथाओं के कोलाज का नाटक है। इसमें तीन देश के तीन लेखकों की कहानियों का समावेश है। इनमें अमेरिका के ओ हेनरी की ‘बारबर शॉप’, भारत के गगन मिश्रा लिखित ‘अंत की शुरुआत’ और रूस के मक्सिम गोर्की की कहानी ‘उसका प्रेमी’, को एक सूत्र में पिरोया गया है। तीनों ही कथाओं में माननीय स्वभाव एवं मनोभावनाओं का बेहद खूबसूरत और सहज चित्रण देखने को मिलता है। मंच पर कपिल शर्मा, अभिषेक झांकल, प्रियदर्शिनी मिश्रा, महमूद अली, साची जैन, गगन मिश्रा ने विभिन्न भूमिकाएं अभिनीत कीं। रूप सज्जा-सूर्यभान, प्रकाश परिकल्पना-नरेन्द्र सिंह, ध्वनि प्रभाव-प्रियदर्शिनी का था।मुहब्बत से ही बंध सकेगी एक सूत्र में दुनिया: ‘मुहब्बत के साइड इफेक्ट’ में सलीम – अनारकली के माध्यम से समाज की विसंगतियों को रेखांकित किया गया है। नाटक में सलीम अनारकली और बादशाह अकबर के बहाने आशिक़ की मुहब्बत और नफरत के बीच की जंग के बज़रिये ये संदेश दिया गया कि मौजूदा दौर में दुनिया को एक सूत्र में बांधना सिर्फ मुहब्बत से ही मुमकिन है। नाटक में पात्रों के नाम सलीम अनारकली वगैरा-वगैरा रखे गए हैं। यदि पात्रों के नाम बदल भी दिए जाएं तब भी क्या फर्क पड़ता है। फर्क इस बात का नहीं कि कौन क्या बोल रहा है और क्यों बोल रहा है। महत्त्व इस बात का है कि वह क्या बोल रहा है। लेखक अख्तर अली के इस नाटक का निर्देशन अजय केसरी ने किया। यह आधारशिला रंगमंडल,प्रयागराज की प्रस्तुति थी। मंच पर बादशाह का अभिनय अजय केसरी, सलीम-नजिम खान, अनारकली-दिव्या शुक्ला, दुर्जन सिंह-अनुराग केशरी, बशीर टेलर और सिपाही एक-नरेंद्र कुमार, मुर्दा-अमित श्रीवास्तव, मुख्य गायक, रंगकर्मी और गमगीन-अमित यादव, नेता-कल्याण सिंह, सिपाही 2- हरि नारायण पांडे ने किया। संगीत संचालन एवं ढोलक राकेश सिंह, प्रकाश सुजॉय घोषाल, रूप सज्जा संजय चौधरी का थी।‘2025’ में उठा लेखक के रहस्यमय जीवन से पर्दा:  दिवाकर नवीन निर्देशित,रूपांतरित नाटक दो हज़ार पच्चीस में ‘सूफी’ एक जासूस है, जो अखबारों की कतरनों से अपने मशहूर उपन्यासों की सच्चाई की पुष्टि करता है। यह जासूस एक दिन लेखक ब्रम्हात्मे के पास आकर कहता है कि मुझे पता है कि आपने हत्या की जो कहानियां लिखी हैं, वे सब आपकी अपनी हैं। लेखक इस आरोप को स्वीकार कर लेता है। इससे पहले कि जासूस, लेखक से कुछ पाने की शर्ते थोपता, लेखक उसे पिस्तौल के इशारे पर बालकनी से गिरकर मरने के लिए मजबूर कर देता है। यह लघु नाटक हमें सच और झूठ की परतों के बीच एक नया चेहरा दिखाता है। मंच पर आदित्य शर्मा (ब्रम्हात्मे), अभि राणा (सूफी) का अभिनय दर्शकों को बांधने में सफल रहा। बेला थियेटर कारवाँ का यह मंचन फ्रेडरिक ड्यूरेनमेट के नाटक ‘गोधूलि’ पर आधारित है। इसका हिन्दी रुपांतरण पीयूष मिश्रा और कुशल निर्देशक अमर साह ने किया। प्रकाश परिकल्पना-भरत कुमार, संगीत-आरव सिंह, मंच व्यवस्था-करन कुकरेजा, बैंक स्टेज सहयोग – अमर सिंह का रहा।‘सैलाब’ में दिखा दो सहेलियों का संघर्ष: अंजलि काजल की कहानी पर आधारित नाटक ‘सैलाब’ दो सहेलियों पम्मी और नैना के संघर्ष की कहानी है। दोनों पात्रों के माघ्यम से यह बताने की कोशिश की गई है कि स्त्रियों के प्रति समाज में अभी और बदलावों की ज़रूरत है। यह नाटक नाटकशाला कंपनी,दिल्ली की प्रस्तुति था। नाटक में मनीषा मल्होत्रा (पम्मी) और ममता कर्नाटक (नैना) ने उत्कृष्ट अभिनय किया है। प्रकाश परिकल्पना-गौरव सेन, मंच प्रबंधन- सचिन सोनी, संगीत-नवीन दिवाकर ने दिया।बूढ़ी चाह में ‘मोह’ और अकेलेपन का दर्द: सलीम राजा निर्देशित नाटक ‘मोह’ की बुज़ुर्ग दादी अपने बेटे और बहू के वियोग का दर्द किसी तरह पी रही है। बेटे के बिछोह से टूटा हुआ मन, नन्हें से पोते को पाकर फिर जुड़ जाता है। अम्मा का घर,आंगन गुनगुनाने लगता है लेकिन यह सुख भी क्षणिक है। गांव में दादी के अनावश्यक लाड़ में पला बेटा बिगड़ न जाए, इस डर से उसे ज्यादा देर तक दादी के पास रुकने नहीं दिया जाता। आखिर अम्मा का ममतामयी आंचल सूना रहा जाता है। ‘सेतु सांस्कृतिक केंद्र वाराणसी की यह प्रस्तुति मन्नू भंडारी की कहानी पर आधारित है, जिसका नाट्य रूपांतरण प्रतिमा सिन्हा ने किया। नाटक में कुसुम मिश्रा – दादी, राजलक्ष्मी -नर्मदा, ममता मिश्रा- बहू, वत्सल शर्मा- बेटा, शेख प्यारे अहमद- वैद्यराज, मदन मोहन मिश्रा- दूधवाला, शिवम राय- सीबू, लाक्षी मिश्रा – बड़ा पोता, चैतन्या मिश्रा – छोटा पोता के किरदारों को जीवंत किया। संगीत- अमित राय, मेकअप – मनोज मलिक  प्रकाश – सत्यम, मंच प्रबंधन -शिवम् का रहा। अरुण ने जगाया सरस्वती का आत्म सम्मा: पंछी ऐसे आते हैं’ विजय तेंदुलकर लिखित मराठी नाटक ‘अशी पाखरे येती’ का हिन्दी रूपांतरण है। नाटक में दिखाया गया है कि अरूण जिस लड़की सरस्वति के घर में जगह बनाने के लिये चला आया है। उस लड़की का स्वभाव उन लड़कों की वजह से बदल गया है जो उसे देखने आते हैं और बार-बार उसे नापसंद कर चले जाते हैं। अरूण अब सरस्वती को बदलने की कोशिश करता है। वह उसका आत्मसम्मान जगाता है। सरस्वती भी एक बार फिर उसे देखने आ रहे विश्वास नाम के एक लड़के के सामने जाने को राजी हो जाती है। विश्वास उसे पसंद कर लेता है। मगर सरस्वती इस नये रिश्ते से इनकार कर देती है। वह अपने परिवार के साथ ही लड़के के सामने अरूण के प्रति अपने लगाव को ज़ाहिर करती है। आख़िर परिजन अरूण से उसकी शादी को तैयार हो जाते हैं। सुनील राज निर्देशित इस अविराम भोपाल की इस प्रस्तुति में सुनील राज,श्रृतिक शर्मा,संतोष पंडित,शाद काला,पूजा और सरू विश्वकर्मा,विभांशु ने अपने किरदारों में सराहनीय अभिनय किया है। रूप सज्जा- भरत साहू, वस्त्र विन्यास – आरती और समृद्धि त्रिपाठी, मंच सामग्री – योगेश, पियूष, वैष्णवी राज, मंच निर्माण – ऋतिक, पियूष, सहायक – हिमांशु, सार्थक,  शाद लाला, भारती, मंच व्यवस्थापक – नीलेश और योगेश, ख्याति धोलपुरे, रिकॉर्डेड म्यूजिक – पीयूष सैनी, प्रकाश परिकल्पना – मुकेश जिज्ञासी, प्रस्तुति प्रबंधक – आरती विश्वकर्मा रहीं।
(लिंक पर क्लिक कर पढ़िये,लखनऊ में अनुकृति की प्रस्तुति निशब्द की विस्तृत समीक्षा रिपोर्ट।)  https://indorestudio.com/nishabd-me-corona-ki-trasadi-ka-chitran/

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments

जावेद अहमद शाह ख़ान "अल-हिंदी" on रंगमंच की नई उड़ान…सौम्या व्यास