संवेदनशील कवि और पत्रकार आलोक श्रीवास्तव ने 2015 में यह गीत एक मासूम बच्ची के साथ हुए निर्मम बलात्कार कांड को लेकर लिखा था। यह गीत न्यूज़ चैनल ‘आज तक’ के कार्यक्रम ‘गुड़िया’ के ज़रिये देश के दर्शकों तक पहुंचा था। आसिफ़ा के साथ हुए बर्बर बलात्कार और हत्याकांड ने इस गीत को फिर प्रासंगिक बना दिया है। इस गीत को संगीतकार स्व. आदेश श्रीवास्तव ने कंपोज़ किया था। इसे अपर्णा पंडित ने गाया है। यह गीत देश में बेटियों के साथ हो रहे सुलूक के साथ उनके दर्द को भी बयान करता है। इंदौर स्टुडियो पर हम यही गीत आपके लिये साभार शेयर कर रहे हैं। इस उम्मीद के साथ कि कोई बेटी अपनी मां से यह ना कहे- नज़र आता है डर ही डर, तेरे घर-बार में अम्मा ।
नज़र आता है डर ही डर,
तेरे घर-बार में अम्मा
नहीं आना मुझे इतने बुरे
संसार में अम्मा
यहाँ तो कोई भी रिश्ता
नहीं विश्वास के क़ाबिल
सिसकती हैं मेरी साँसें
बहुत डरता है मेरा दिल
समझ आता नहीं ये क्या छुपा है
प्यार में अम्मा
नहीं आना मुझे इतने बुरे
संसार में अम्मा
मुझे तू कोख में लाई
बड़ा उपकार है तेरा
तेरी ममता, मेरी माई
बड़ा उपकार है तेरा
न शामिल कर जनम देने की ज़िद
उपकार में अम्मा
नहीं आना मुझे इतने बुरे
संसार में अम्मा
उजाला बनके आई हूँ जहाँ से
मुझको लौटा दे
तुझे सौगंध है मेरी, यहाँ से,
मुझको लौटा दे
अजन्मा ही तू रहने दे मुझे
संसार में अम्मा
नहीं आना मुझे इतने बुरे
संसार में अम्मा
नज़र आता है डर ही डर
तेरे घर-बार में अम्मा
नहीं आना मुझे इतने बुरे
संसार में अम्मा
-आलोक श्रीवास्तव

