बढ़ते तनावों का प्रबन्धन बेहद ज़रूरी
किशोरों-युवाओं को बचा सकते हैं जानलेवा तनाव से
प्रेरणा-संवाद में लाइफ कोच मनीष शर्मा ने रखी अपनी बात
किशोरों को जीवन आनन्द से जोड़ने की अनूठी मिसाल
बच्चों को बेहतर इंसान बनाने का एकल जतन
इंदौर। बढ़ते तनाव के बोझ से लोग परेशान हैं। यहाँ तक कि किशोर तथा युवा भी इससे अछूते नहीं हैं। हम चाहें तो बहुत छोटे प्रयोगों से इस जानलेवा तनाव और काम के बोझ को कम कर सकते हैं। तनाव के सहज प्रबंधन का तरीका सकारात्मक दृष्टि के साथ ही नैसर्गिक आनन्द वाली राह में ही छुपा है। स्वयं के मूल स्वभाव को जान, अपनी वैयक्तिकता के साथ हम जीवन में सहज आनंद को पा सकते हैं।
यह बात वरिष्ठ तनाव प्रबंधक मनीष शर्मा ने शहर के एकलव्य आवासीय विद्यालय में आयोजित प्रेरणा संवाद कार्यक्रम के दौरान व्याख्याताओं व विद्यार्थियों के सामने रखी। उन्होंने बताया कि इस प्रतियोगी समय में हम सहजता से दूर होते जा रहे हैं। अपने मूल स्वभाव को नकारने और दूसरों से प्रभावित होने की प्रवृत्ति के कारण वर्तमान समय में हम चारों तरफ तनाव महसूस कर रहे हैं। और जीवन में अवसाद , कुंठा और नकारात्मकता से घिरते जा रहे हैं। पढाई और काम अब हमें बोझ की तरह लगने लगे हैं।
उन्होंने बताया कि हमारे दिमाग के दो हिस्से हैं। बायाँ हिस्सा तर्क और बौद्धिकता से संबंधित तथा दाहिना हिस्सा भाव , कला और कल्पना प्रधान होता है। सफलता और तनावमुक्ति के लिए हमें बाएँ और दाएँ के बीच संतुलन बनाने की ज़रूरत है, यह संतुलन ही जीवन में लय और समस्वरता लाता है। माइंडफुलनेस , ब्रीदिंग टेक्निक्स के साथ कई प्रविधियाँ उन्होंने बताई जिन्हें दैनिक जीवन में प्रयोग में लाकर हम सहज ही तनावमुक्त हो सकते हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि समाज के ऐसे लोग जिन्हें हम आमतौर पर सुखी और सफल मानते हैं, उनमें भी अवसाद , तनाव और कुंठाएँ बढती जा रही हैं। यहाँ तक कि विद्यार्थी भी पढाई को तनाव की तरह महसूस करने लगे हैं। तकनीक और मोबाइल फोन ने दुनिया की दूरी घटाई है लेकिन ऊर्जा के सतत बहिर्मुख प्रवाह के कारण हम स्वयं से और प्रकृति से भी दूर होते जा रहे हैं और सृजनात्मकता बाधित हो निष्क्रिय जीवन शैली हावी होती जा रही है।अगर तनाव की ऊर्जा को सकारात्मक रूप से नियोजित किया जाये तो ये जीवन में सृजनात्मक खिलावट ला सकती है।