कला प्रतिनिधि, इंदौर स्टूडियो। नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा (NSD) ने हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (HUDCO) के साथ मिलकर अभिमंच ऑडिटोरियम में बच्चों का थिएटर फेस्टिवल ‘रंग आरंभ’ पेश किया। इसमें दिल्ली-NCR के अलग-अलग हिस्सों के बच्चों के चार नाटक दिखाए गए। इस फेस्टिवल में युवा प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें से कई इनफॉर्मल हाउसिंग कम्युनिटीज़ से थे, और यह NSD द्वारा पहले आयोजित थिएटर वर्कशॉप का समापन था।
रंग आरंभ में 132 बच्चों ने 4 नाटकों में बड़े उत्साह के साथ परफॉर्म किया। ‘प्रकृति है सुपरस्टार’। इस नाटक को दिल्ली में अन्ना नगर रेलवे ऑफिस के पास ASHI के साथ मिलकर तैयार किया गया। ‘चाहिए थोड़ा प्यार’, बाल सहयोग ऑर्गनाइज़ेशन के साथ मिलकर तैयार किया गया।
‘रोटी और किताब’ नामक नाटक, नोएडा के सेक्टर 73 के सरफवाद के बच्चों ने पेश किया। इसके साथ ही ‘बस एक छुट्टी’ सूर्य नगर के ‘एक कोशिश स्पेशल स्कूल’ के साथ मिलकर तैयार और प्रस्तुत की गई।
इस अवसर पर NSD के डायरेक्टर, चित्तरंजन त्रिपाठी ने कहा – “बच्चे हमारे देश के भविष्य हैं। उनकी क्रिएटिव और इमोशनल ग्रोथ को बढ़ावा देना हम सभी की ज़िम्मेदारी है। हमें खुशी है कि HUDCO का नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा के साथ कोलाब्रेशन आस-पास के पिछड़े समुदायों के बच्चों को थिएटर के ज़रिए सीखने, एक्सप्लोर करने और खुद को एक्सप्रेस करने में मदद करता है। यह पहल न सिर्फ़ कॉन्फिडेंस और इमेजिनेशन बढ़ाती है बल्कि कल्चरल समझ को भी मज़बूत करती है। युवा दिमाग को एक बेहतर कल के लिए तैयार करती है।”
HUDCO के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर, संजय कुलश्रेष्ठ ने कहा – “हम इस पहल पर नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा के साथ कोलेबोरेट कर बहुत खुश हैं। यह पिछड़े समुदायों के बच्चों में कॉन्फिडेंस, क्रिएटिविटी और टीमवर्क को बढ़ावा देने के लिए थिएटर को एक पॉवर फुल मीडियम के तौर पर इस्तेमाल करता है। यह प्लेटफॉर्म उन्हें आज़ादी से खुद को एक्सप्रेस करने, अपने नज़रिए को शेयर करने और मीनिंग फुल सोशल इन्क्लूजन का अनुभव करने में मदद करता है।”
नियति राठौड़ का निर्देशित नाटक ‘प्रकृति है सुपरस्टार’ दिखाता है कि कैसे खेलने की जगहों की कमी बच्चों की साधारण खुशियों को प्रकृति से जुड़े संघर्षों में बदल देती है। यह नाटक बढ़ती असहिष्णुता और संघर्ष को दिखाता है। साथ ही दर्शकों को याद दिलाता है कि प्रकृति की रक्षा करना हमारे हाथ में है। इंसानी लापरवाही इसे ख़तरे में डाल रही है।
विजय कुमार सिंह निर्देशित नाटक ‘चाहिए थोड़ा प्यार’, कार्लो गोज़ी की परी-कथा स्टाइल कॉमेडी से प्रेरित है। इसे बच्चों को अपने किरदार, आत्मविश्वास और कल्पनाशील एक्सप्रेशन बनाने में मदद करने के लिए फिर से बनाया गया है। फैंटेसी को असल ज़िंदगी की भावनाओं के साथ मिलाकर, यह नाटक युवा कलाकारों को चंचल और मिलकर किए जाने वाले थिएटर के ज़रिए कहानी कहने का आनंद खोजने के लिए प्रोत्साहित करता है।
तसब्बर अली द्वारा निर्देशित नाटक ‘रोटी और किताब’, गरीब परिवारों के उन बच्चों की अधूरी ख़्वाहिशों को दिखाता है, जिन्हें अच्छी शिक्षा नहीं मिल पाती और जो अक्सर आर्थिक तंगी के कारण बाल मजदूरी का शिकार हो जाते हैं।
कंचन का डायरेक्टेड नाटक ‘बस एक छुट्टी’, एंटोन चेखव के ‘गिरगिट’ से प्रेरित है। बच्चों का यह सेंसिटिव प्ले एक ऐसे लड़के की कहानी है जो नियमों से परेशान है और एक दिन की आज़ादी चाहता है, लेकिन उसे एहसास होता है कि उसके माता-पिता का डिसिप्लिन प्यार से आता है। यह प्ले बच्चों और माता-पिता के बीच समझ और प्यार की अहमियत को धीरे से दिखाता है। आगे पढ़िये – TIE का कमाल भूत की आत्मकथा – https://indorestudio.com/bhoot-ki-atmakatha-nsd-tie-bharat-rang-mahotsav-2026/
रंग आरंभ: NSD-HUDCO का चिल्ड्रन थियेटर फेस्टिवल
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