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भारत रंग महोत्सव के समापन के एक दिन बाद ही राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) की रेपर्टरी टीम राजस्थान में नाटकों का प्रदर्शन करने के लिये रवाना हो गई है। लगभग पचास कलाकार राज्य के ग्रामीण और शहरी इलाकों में दस प्रमुख नाटकों का मंचन करेंगे।
संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने रेपर्टरी के ‘रंग-रथ’ को हरी झंडी दिखाकर शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने 25वें भारत रंग महोत्सव के सफल आयोजन के लिये भी सभी को बधाई दी। इस अवसर पर एनएसडी के निदेशक चितरंजन त्रिपाठी ने ‘रंग मंडल’ के इस नये सफर ‘रंग-राजस्थान’ की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विभिन्न राज्यों में नाटकों का यह सफ़र असल में एनएसडी रेपर्टरी के साठ साल पूरे होने का उपक्रम है। थियेटर इनिशियेटिव के तहत यह सिलसिला अगस्त दो हज़ार चौबीस से जारी है। कार्यक्रम में एनएसडी के रजिस्ट्रार प्रदीप के. मोहंती भी मौजूद थे।
राजस्थान के टूर में रेपर्टरी का पहला शो पच्चीस फरवरी को बीकानेर में होगा। नाटक का नाम है ‘माई री मैं कासे कहूँ’। यह नाटक राजस्थान के प्रसिद्ध लेखक विजयदान देथा की कहानी पर आधारित है। इसका निर्देशन अजय कुमार ने किया है। इसके बाद रेपर्टरी के कलाकार जयपुर, अजमेर, भीलवाड़ा और जोधपुर जैसे शहरों में प्रस्तुतियाँ देंगे।
रेपर्टरी चीफ़ राजेश सिंह के अनुसार, राजस्थान के टूर के दौरान अंधा युग, बायन, बाबूजी, बंद गली का आख़िरी मकान, लैला मजनूँ, समुद्र मंथन, ताजमहल का टेंडर, तमस और थीव्स कार्निवल जैसे नाटकों का मंचन होगा। विभिन्न शैलियों पर आधारित एनएसडी रेपर्टरी के इन नाटकों के पहले भी शोज़ होते रहे हैं। रेपर्टरी के आर्टिस्ट मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, अरुणाचल प्रदेश, पंजाब, चंडीगढ़ के साथ रूस और सिंगापुर में भी अपनी प्रस्तुतियाँ दे चुके हैं। इंदौर स्टूडियो की रिपोर्ट।

