इश्क़-मुश्क के शेर सुनाने थे मुझको इश्क़-मुश्क में देखो क्या-क्या भूल गया पहला मिसरा पढ़कर तेरी याद आ क्या था मेरा पहला मिसरा भूल गया
इंदौर प्रेस क्लब में मध्यम सक्सेना की इन पंक्तियों को सुनकर ‘कविता हम और आप’ के कार्यक्रम में दर्शकों ने जमकर दाद दी। बरेली के इस शायर के साथ ही इस कार्यक्रम में अमन अक्षर, विनीत शुक्ला, निवेश असर, धीरज चौहान और रितेश रजवाड़ा जैसे 20 से ज़्यादा नये और पुराने कवि शामिल हुए। कार्यक्रम दो चरणों में रखा गया था। पहला था, ओपन माइक इवेंट और दूसरा- कविता हम और आप।

ओपन माइक का संचालन मयंका दादू ‘कायनात’ द्वारा किया गया। इसके बाद कवि सम्मलेन का संचालन शहर के जाने पहचाने गज़लकार विनीत शुक्ला जी ने किया। कवि सम्मलेन कि शुरुआत युवा कवि अवधेश शर्मा ‘ध्रुव’ के काव्यपाठ से हुई। अवधेश ने “सितारा हूँ मगर फलक से टूट जाऊं क्या, तुम उदास लग रहें हो, मैं लौट आऊँ क्या.” पंक्तियाँ पढ़कर महफ़िल को तालियों से सराबोर कर दिया। धीरज चौहान ने “दफ़न करने का तरीका तुम बताओं, ये ज़मीं पर दिल रखा मिट्टी रखी है” सुनाकर प्रेम को एक अनूठे अंदाज़ बयान किया।

सुल्तानपुर से आये गीतकार रितेश रजवाडा ने अपनी रचना पढ़ी- “जल्दी का कोई काम गवारा नहीं हमें, इस बात से अब तक तो ख़सारा नहीं हमें, उलझी हुई तरतीबियाँ बिखरे हुए से हम, तोहमत लगाई सबने संवारा नहीं हमें!! भोपाल से आये निवेश असर ने कहा – “सुना है जिस्म ही मेरा मकाँ है, सो जिस कमरे में चाहूँ घूमता हूँ! बड़ा हैरान हूँ वहशत में आकर, तिरे पैरों के तलवे चूमता हूँ!” कवि सम्मेलन में इंदौर मे गीतों के सशक्त हस्ताक्षर अमन अक्षर ने “तोड़कर कोई मानक नहीं आये हैं, अपने हिस्से कथानक नहीं आये हैं! ज़िन्दगी ने मुसलसल पुकारा हमें, हम यहाँ तक अचानक नहीं आये हैं!” गीत पढ़कर शुद्ध हिंदी गीतों के नए रूप से परिचित करवाया। मध्यम सक्सेना विशेष रूप से बरेली से इस कार्यक्रम में पहुंचे। उन्होंने “इश्क़ – मुश्क के शेर सुनाने थे मुझको। इश्क़ – मुश्क में देखो क्या क्या भूल गया।। पहला मिसरा पढ़कर तेरी याद आई। क्या था मेरा पहला मिसरा भूल गया।।“ जैसे शेरों से सभी श्रोताओ की तालिया बटोरी। अंत में कार्यक्रम के संचालक विनीत शुक्ला ने सभी कि फरमाइश पर निदा फ़ाज़ली की ग़ज़ल “होश वालों को ख़बर क्या, बेखुदी क्या चीज़ है” पेश की।

