इंदौर स्टूडियो डॉट कॉम। दो दिनी पाखी महोत्सव में साहित्य और कला के ऐसे रंग बिखरे कि यहाँ मौजूद कला और साहित्य प्रेमी मंत्रमुग्ध हो गए। साहित्यिक पत्रिका ‘पाखी’ हर साल यह आयोजन करती है। इस बार लंबे अंतराल के बाद हुए इस भव्य आयोजन की थीम ‘उम्मीदों का उत्सव’ पर केन्द्रित थी। अँधेरों के घटाटोप के बीच पाखी की यह पहल काफी सराही गई। इसमें देश के जाने-माने साहित्यकारों, रंगमंच और कला के क्षेत्र से बड़े नाम भी शामिल हुए। यहाँ बेहतर साहित्य के लिए लेखकों को सम्मानित भी किया गया।
वरिष्ठ राजनेता पहुंचे : नोएडा के इंदिरा गांधी कला केंद्र में आयोजन का शुभारम्भ शूटर दादी ने किया। उन्होंने कहा कि अब जनपद स्तर तक शूटिंग को भी खेलकूद में शामिल किया जाना चाहिए। सरकारी स्कूल के बच्चों ने शास्त्रीय संगीत, झुग्गी के बच्चों ने मार्शल आर्ट तथा मनोरम नृत्य प्रस्तुत किए। आयोजन में वरिष्ठ राजनेता हरीश रावत, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, जुझारू पत्रकार पुण्यप्रसून वाजपेयी, शेषनारायण सिंह, विनोद अग्निहोत्री, फ़िल्म कलाकार राजपाल यादव, फैजान मुस्तफा, अग्निशेखर, अशोक कुमार पाण्डेय के साथ साहित्य जगत के मदन कश्यप, सुधीश पचौरी, सूर्यबाला, अनामिका, भालचंद जोशी, प्रो. श्योराजसिंह बेचैन और मनीषा कुलश्रेष्ठ ने विचारोत्तेजक विषयों पर अपनी बात रखी।
प्रतिष्ठित लेखकों को किया सम्मानित : इस अवसर पर हिन्दी साहित्य के लिए प्रतिष्ठित लेखकों को शब्द साधक सम्मानों से भी अलंकृत किया गया। ‘पाखी महोत्सव’ में 2016, 2017 तथा 2018 के सम्मान प्रदान किए गए। वर्ष 2016 का ‘शब्द साधक शिखर सम्मान’ मूर्धन्य कवि स्व। केदार नाथ सिंह, वर्ष 2017 का हिन्दी कथा साहित्य के मशहूर रचनाकार असगर वजाहत तथा 2018 का ‘शब्द साधक शिखर सम्मान’ अग्रणी कथाकार स्वयं प्रकाश को प्रदान किया गया।
वर्ष 2017 का ‘शब्द साधक रचना सम्मान’ कथाकार मनीष वैद्य को उनके महत्त्वपूर्ण व चर्चित कहानी संग्रह ‘फुगाटी का जूता’ के लिए दिया जायेगा। वे सामाजिक सरोकार, प्रतिबद्धता और सक्रिय रचनात्मक अवदान के लिए पहचाने जाते हैं। इधर कुछ सालों में उन्होंने कथा के अपने नए मुहावरे और सहज लेकिन अप्रतिम भाषा से हमारे समय और समाज की नब्ज़ पर हाथ रखते हुए बेहतरीन कहानियाँ रची हैं।
2016 का ‘शब्द साधक अनुवाद सम्मान’ अजय चौधरी को उनकी पुस्तक ‘शस्त्र विराम’ (लियो टॉलस्टॉय की विश्व प्रसिद्ध कृति “वार एंड पीस”) के लिए, ‘शब्द साधक अन्य भाषा रचना सम्मान’ उर्दू के ख्याति प्राप्त लेखक खालिद जावेद को उनकी पुस्तक ‘मौत की किताब’ पर, ‘शब्द साधक रचना सम्मान’ युवा कथाकार मनोज रूपड़ा तथा ‘शब्द साधक कविता सम्मान’ सूरज सहरावत को, वर्ष 2017 का ‘शब्द साधक अनुवाद सम्मान’ डॉ। प्रभाती नैटियाल को, ‘शब्द साधक आलोचना सम्मान’ बजरंग बिहारी तिवारी तथा ‘शब्द साधक कविता सम्मान’ महेश आलोक को दिया जायेगा। इसी क्रम में वर्ष 2018 का ‘शब्द साधक रचना सम्मान’ मीनाक्षी नटराजन को उनकी पुस्तक ‘अपने-अपने कुरुक्षेत्र’ के लिए दिया जाएगा। ‘शब्द साधक आलोचना सम्मान’ पल्लव, ‘शब्द साधक अनुवाद सम्मान’ संतोष अलेक्स तथा ‘शब्द साधक कविता सम्मान’ ज्योति चावला को प्रदान किया गया। इस वर्ष से प्रारंभ हुए साहित्य के लिए समर्पित जीवन जीने वाले विभूतियों को ‘शब्द साधक जीवन मानक’ लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड पहली बार भारत भारद्वाज को प्रदान किया गया।
शिक्षा के प्रति समर्पण ज़रूरी : इस अवसर पर दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया ने कहा कि बड़े और संपन्न राष्ट्र के लिए शिक्षा के प्रति समर्पण ज़रूरी है। राष्ट्रीय स्तर पर एक ऐसा नियम बनाना चाहिए, जिससे यह तय हो सके कि देश के सभी स्कूलों में न्यूनतम सुविधाएँ और गुणवत्ता के मानक तय हो सकें। भविष्य का भारत (उम्मीदें और आशंकाएं) विषय पर आयोजित गोष्ठी में मनीष सिसौदिया ने कहा कि फैंटेसी से बचते हुए बच्चों को पढ़ाने का फैसला और उस फैसले पर अड़े रहने का संकल्प ही भावी पीढ़ी को शिक्षित बनाने का मूलमंत्र है। उन्होंने कहा कि हमारी किसी एक पीढ़ी ने मुश्किल फैसला किया होगा। जिस पीढ़ी ने बच्चों को शिक्षित बनाने का फैसला किया, उसके बाद आगे की पीढ़ी तर गई और उसके आगे की पीढ़ी तरती चली जाएगी। मौजूदा समय में जो सफल हैं, उनके किसी एक पीढ़ी ने ऐसा ही फैसला लिया होगा।
ज्ञान गाँवों से ही आता है : राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मनोज दीक्षित ने कहा कि ज्ञान गांवों से निकलता है। शहरों में सिर्फ़ कोर्स पूरा कराया जाता है। उन्होंने देश में समान शिक्षा प्रणाली की पैरवी करते हुए कहा कि देश में सच्चाई से जो शहर सबसे दूर है, वह दिल्ली है। नीति नियंताओं को समझना होगा कि देश दिल्ली से बड़ा है। फ़िल्म कलाकार राजपाल यादव ने अपने ख़ास अंदाज़ में अपनी बात रखी और श्रोताओं की दाद बटोरी। समन्वय भरत प्रसाद ने किया।
जनता अनपढ़ हो सकती है लेकिन बेवकूफ नहीं : भारत एक धर्म निरपेक्ष राज्य: अपेक्षाएँ तथा आशंकाएँ विषय पर आयोजित गोष्ठी में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने कहा मीडिया इस बात पर विचार नहीं कर रही कि उसके कार्य, बयान, विचार और सोच का असर समाज या देश पर क्या होगा। इस बाबत मौजूदा परिस्थितियों में हमें भी अपने से सवाल करना होगा। उन्होंने कहा कि आम जनता अनपढ़ हो सकती है, लेकिन बेवकूफ नहीं है। हमें बहुत चिंतित होने की ज़रूरत नहीं है। आम आदमी ही इन सवालों का जवाब खोजेगा।
टीवी चैनल अब माहौल बनाने लगे हैं : आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने कहा कि इस हालात को बनाने में पूंजी और दुर्भाग्य से टीवी चैनलों का बड़ा समूह भी शामिल है। इसके साथ लोगों की मानसिकता भी शामिल है। उन्होंने कहा कि आज एक पढ़ा लिखा तबका भी सांप्रदायिकता में शामिल हो गया है। इस भंवर से निकलने के लिए मीडिया के प्रकोप से बचना पड़़ेगा। ये मानसिक प्रदूषण फैला रही है। उनका एक मकसद सिर्फ़ एक है कि विविधता में एकता की जो संस्कृति है, उसे कैसे हम बर्बाद करें। ऐसे लोगों से पीछा छुड़ाना पड़ेगा। संगोष्ठी के समन्वयक डॉ। सैयद कल्वे रिजवी थे।
धर्म निरपेक्षता : वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्रिहोत्री ने कहा कि संविधान निर्माण के दौरान धर्म निरपेक्षता शब्द नहीं जोड़ा गया था। तब लोगों ने यही सोचा होगा कि भारत जैसे देश में इस शब्द का कोई मतलब नहीं है। इंदिरा गांधी ने वर्ष-1973 में संविधान के प्रस्तावना में धर्म निरपेक्ष शब्द को जोड़ा था। उन्हें शायद लग गया था कि अभी जिन शक्तियों का प्रादुर्भाव हुआ है, आने वाले समय में ये हावी हो जाएंगी। मीडिया को कोसना उचित नहीं है। वह भी हमारे बीच से ही आते हैं।
उन्होंने कहा कि धर्म निरपेक्षता हमारी जीवन शैली है और जीवन मूल्य है। धर्म निरपेक्षता की नींच तो वहाँ पड़ी, जब इस्लाम शासकों के राज में तुलसीदास, कबीर, रहीम जैसे कवि हुए, जिनकी रचना आज भी अमर है। हमें हिंदू और हिदुत्व में फर्क करना होगा। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म है और हिन्दुत्व राजनीतिक विचारधारा।
सेक्यूलरिज्म से धर्म का फायदा : विधि विशेषज्ञ फैजान मुस्तफा ने कहा कि सेक्यूलरिज्म से सबसे अधिक फायदा धर्म का है। यह बात देश को बताने की ज़रूरत है कि अगर हमें हिंदू धर्म पसंद है और हम चाहते हैं कि भारत हिंदू राष्ट्र हो जाए, तो इसमें सबसे ज़्यादा नुकसान हिंदू धर्म का होगा। जैसा कि इस्लामी राष्ट्रों में इस्लाम का हो चुका है। उन्होंने कहा कि जब कोई धर्म किसी देश का राष्ट्रीय धर्म बन जाएगा, तो राज्य उस धर्म को कंट्रोल करेगा, सरकार धर्म का इंटरप्रटेशन करेगी। सरकार बताएगी कि धर्म में ये शामिल करो, इसे निकाल दो।
पत्रकारिता कल, आज और कल विषय पर व्याख्यान देते हुए वरिष्ठ पत्रकार पुण्यप्रसून वाजपेयी ने वर्तमान दौर में मीडिया की दुर्गति पर चिंता ज़ाहिर करते हुए कहा कि हमें मीडिया की कठपुतली के पीछे छिपी ताकतों को पहचानना होगा।
पाखी के संपादक अपूर्व जोशी ने आभार माना। कथाकार शैलेय और शोभा अक्षर ने संचालन किया।

