कला प्रतिनिधि,इंदौर स्टुडियो। धरती पर पानी की भीषण समस्या के कारण मानव जाति हाहाकार करने लगी है। पृथ्वीवासियों की चीत्कार पर इंद्र देव का सिंहासन भी डोलने लगा है। इसी कथ्य पर आधारित इंदौर के अनंत टेरेस थियेटर में नाटक ‘जल चक्कर’ का मंचन हुआ। वरिष्ठ रंगकर्मी प्रांजल श्रोत्रिय द्वारा निर्देशित इस सामयिक नाटक ने दर्शकों को पानी के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी का अहसास तो कराया ही, हालात की गंभीरता के प्रति भी सचेत किया।
जल संकट से जब परेशान हुये नारद : नाटक की कथा के अनुसार, जल संकट से परेशान लोगों के हालात देखकर नारद मुनि इंद्र देव से इस विषय में जानकारी प्राप्त करने का अनुरोध करते हैं। इंद्र देव के कहने पर मुनिराज अपना अध्ययन प्रारंभ करते हैं, उन्हें पृथ्वी पर इस संबंध में अनेक समस्याएं नज़र आती हैं। तब वे स्वंय इंद्र देव को पृथ्वी पर आने का आग्रह करते हैं। परंतु इंद्रदेव एक मीटिंग में बिज़ी होने की बात कहकर पृथ्वी लोक पर आने से मना कर देते हैं।
नारद पहुँचे स्माप डेम वाले गाँव : इधर पृथ्वी लोक में नारद एक ऐसे गाँव में पहुँचते हैं जहाँ गाँव के लोग नाले का गहरी करण और उस पर स्टाप डेम बना रहे है। तब उन्हें कुछ संतुष्टि होती है और वे समझ जाते हैं कि मनुष्य ने एक बार फिर पानी की समस्या के समाधान के लिये अपने स्तर पर प्रयास प्रारंभ कर दिये हैं। वह किसी के भरोसे नहीं अपितु एक बार फिर अपने श्रम और संगठन की एकता से इस काम को पूरा करने में जुटे हैं। इस तरह नाटक समस्या के साथ एक समाधान के रूप में भी सामने आता है। 
प्रांजल श्रोत्रिय का कल्पनाशील निर्देशन: निर्देशक प्रांजल श्रोत्रिय ने नाटक के विभिन्न दृश्यों को किसी कोलाज की तरह रचा था। नाटक में दर्शक हास्य, करुण,भय, क्रोध, वीर रस के सागर में गोते लगाते हुए गुज़रते हैं। राजकमल नायक रचित गीत एवं संतोष कौशिक का संगीत इस नाटक की एक और बड़ी ख़ूबी रहे। नाटक में नारद, इंद्र की भूमिका में क्रमशः धनवंत्री द्विवेदी, प्रगल्भ श्रोत्रिय ने दर्शकों को प्रभावित किया। इसी तरह सुषमा कोल बहादुर, सुषमा श्रोत्रिय, अरविंद पोरवाल, मोनिका शर्मा ने भी अपने अभिनय वाली विभिन्न भूमिकाओं के साथ न्याय किया। नाटक में आनंद गुप्ता, आकाश पंथी ने भी अलग-अलग भूमिकाएं निभाकर दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। कार्यक्रम के उदघोषक गौतम मालवीय की रहे।
आपको बता दें कि अनंत टेरेस थियेटर में नाट्य मंचन की हाल की यह दूसरी विशिष्ट प्रस्तुति रही। इससे पहले यहां पर मुंबई की विभा रानी ने मिथिला कथा की एकल प्रस्तुति दी थी। प्रांजल की इस प्रस्तुति में उनके द्वारा तैयार कलाकारों ने अभिनय किया। इसमें उनके परिजन भी शामिल रहें। वे यहां पर लगातार रंगकर्म के प्रशिक्षण की कार्यशालायें भी आयोजित करते रहे हैं। इनके माध्यम से शहर के दर्जनों युवा कलाकारों ने रंगकर्म का प्रशिक्षण हासिल किया है।
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