इंदौर स्टुडियो, कला संवाददाता। एनएसडी,दिल्ली के चेयरमैन परेश रावल के आश्वसान के बाद राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में छात्र-छात्राओं ने भूख हड़ताल ख़त्म कर दी थी। छात्र अब पहले की तरह ही अध्ययन और निर्माण से जुड़े व्यावहारिक कामों में जुट गये हैं। छात्रों का कहना है कि उनकी हड़ताल पूरी तरह से ख़त्म नहीं हुई है। परंतु जिस तरह से परेश रावल ने उनकी समस्याओं को सुना, एनएसडी सोसाइटी के साथ बैठक किये जाने और इंस्टीट्यूशन के हित में क़दम उठाने का भरोसा दिया, इसके बाद छात्रों की यूनियन ने भूख हड़ताल खत्म कर दी। अपना धरना,प्रदर्शन रोक दिया। फिलहाल छात्रों की हड़ताल प्रतीकात्मक रूप से जारी है। इस बीच एनएसडी के वर्तमान कार्यकारी निर्देशक प्रो. डॉ.रमेश गौड़ ने भी कहा है कि वे छात्रों की मांगों को लेकर उनके साथ चर्चा करेंगे।
3 अक्टूबर से शुरू हुई थी
छात्रों की हड़ताल: राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के विद्यार्थियों ने 3 अक्टूबर से अपनी हड़ताल शुरू की थी। उन्हें जब ऐसा लगा कि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है, तब उन्होंने 6 अक्टूबर की सुबह से भूख हड़ताल भी शुरू कर दी थी। वे कैम्पस में ही एक मंडप के नीचे स्कूल प्रशासन के खिलाफ़ धरने पर बैठ गये थे। छात्रों का कहना था कि देश में रंगमंच का यह सबसे बड़ा इंस्टीट्यूशन ठीक तरह से काम नहीं कर रहा है। इसकी ज़रूरतों को अनदेखा किया जा रहा है। वामन केंद्रे के बाद से ही संस्थान में कोई स्थायी निदेशक नहीं है, छात्रों को पढ़ाने के लिये शिक्षक भी नहीं है। कुल 11 पद खाली पड़े हैं। सेवानिवृत्त होने के बाद भी शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की जा रही है। कार्यकारी निदेशक के रूप में पहले सुरेश शर्मा रह चुके हैं। वे नाट्य विद्यालय में रेपेटरी प्रमुख थे। परंतु उनकी जगह आये प्रो. डॉक्टर रमेश गौड़ को रंगमंच संबंधी कोई अनुभव नहीं है। वे न तो संस्थान की ज़रूरत को समझ पा रहे हैं, न ही छात्रों की शिकायतों को ही।
एनएसडी आर्थिक संकट के भँवर में: छात्रों ने नाट्य विद्यालय की बजट संबंधी दिक्कतों को लेकर भी मीडिया में चर्चा की है। उन्होंने कहा, शिक्षण ही नहीं नाटकों के निर्माण का काम भी लगातार बाधित हो रहा है। निर्माण का बजट घटाया जा रहा है, प्रॉपर्टी खरीदने अथवा सामग्री तैयार करने के लिये राशि मंज़ूर नहीं की जा रही है। कुछ समय से संस्थान की सारी अकादमिक गतिविधियां थम सी गई हैं। छात्र एनएसडी के एक्जीक्युटिव डायरेक्टर के साथ ही डीन और रजिस्ट्रार के पदों पर भी नई उपयुक्त नियुक्तियों की मांग कर रहे हैं। ऐसा न होने पर छात्र संस्थान और अपने भविष्य को लेकर चिंता जता रहे हैं।
परेश रावल की वजह से सुधार का विश्वास: फिलहाल एनएसडी के चेयरमैन परेश रावल छात्रों की समस्याएं सुन चुके हैं। देर से ही सही उन्होंने छात्रों के दर्द और हालात को समझा है। छात्र उनसे मिलकर काफी ख़ुश भी हैं। उन्हें यकीन है कि परेश रावल जी के दखल से हालात में सुधार आयेगा। छात्र अब फिर से अपनी पढ़ाई और व्यावहारिक तैयारियों के काम में जुटे गये हैं। छात्र, परेश रावल जी से काफी समय से मिलना चाहते थे, वे मई के महीने से ही उन्हें पत्र लिख रहे थे। आपको बता दें, बीजेपी के सांसद और लोकप्रिय फ़िल्म अभिनेता परेश रावल को 2020 में एनएसडी का चेयरमैन नियुक्त किया गया था। वे एनएसडी के विद्यार्थी भी रहे हैं। ऐसे में उम्मीद है कि वे इस प्रतिष्ठित इंस्टीट्यूट की समस्याओं को समयबद्ध तरीके से दूर करने में अपनी सकारात्मक भूमिका निभा पायेंगे। (चित्र सौजन्य,एनएसडी वेबसाइट)

