Wednesday, May 13, 2026
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खंडवा के पाठ प्रसंग में हुआ मालिनी अवस्थी का लोक गायन और नट सम्राट का मंचन

इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम।  खंडवा में प्रदेश के नामचीन कथाकारों और कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। डॉ. सीवी रमन विश्वविद्यालय और वनमाली सृजनपीठ के संयुक्त प्रयासों से यह आयोजन किया गया। टैगोर अंतरराष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव ‘विश्वरंग’ से पूर्व गतिविधि के तहत यह कार्यक्रम हुआ। इसमें प्रतिरोध रचती मनुष्यता के पक्ष में खड़ी विविधवर्णी रचनाओं का पाठ किया गया। इसी क्रम में ख्यात लोक गायिका मालिनी अवस्थी का गायन और प्रसिद्ध नाटक नट सम्राट की प्रस्तुति भी दी गई।

कहानी पाठ सत्र की अध्यक्षता कथाकार हरि भटनागर ने की। मंच पर कुलपति डॉ रवि चतुर्वेदी तथा वनमाली सर्जन केंद्र के अध्यक्ष शरद जैन भी उपस्थित थे। यहाँ मनीष वैद्य, प्रदीप जिलवाने, कैलाश मंडलेकर, अमिता नीरव तथा शशिभूषण ने कहानी पाठ किया। इसी प्रकार विनय उपाध्याय, अरुण सातले, वसंत सकरगाए, गोविन्द शर्मा, बहादुर पटेल, शैलेन्द्र शरण और श्रुति कुशवाह ने कविता पाठ किया।

 

गौरी कुञ्ज में आयोजित मालिनी अवस्थी ने अपनी प्रस्तुति का प्रारम्भ लोकगीत ‘उड़ी जाओ से सोना गंगा पार’ से किया। उन्होंने दशरथ के घर पुत्र जन्म पर सोहर गीत की भी सुंदर प्रस्तुति दी। इसके बाद भगवान राम और जानकी के विवाह प्रसंग पर आधारित लोकगीत ‘झुक जाईबो रघुवीर, ललिनी मेरी छोटी है, बारह बरस की मोर जानकी, अरे सत्रह बरस के हैं रघुबीर…’ सुनाया तो समूचा सभागार तालियों की गडगडाहट से गूँज उठा। पद्मश्री मालिनी की आवाज़ में अंचल की मिट्टी की खुशबू उनके गायन में साफ़ महसूस की जा सकती है।

उन्होंने अमीर खुसरो साहब की स्मृति को याद करते हुए सात सौ साल पुराना बेटी के लिए बिदाई गीत भैया को दीना महला, हमको दीना परदेश, अरे बाबुल मोहे काहे को ब्याही विदेश…तो श्रोताओं ने भी उस पीर को भीतर तक महसूस किया। ब्याह की खुशियों से भरा गीत द्वारे पर आई बरात …रंगीला बन्ना ब्याहन आया… सुनकर श्रोता भी उत्साहित हो उठे। लम्बे समय तक श्रोता उनके भावों और गीतों में मंत्रमुग्ध लोकगीतों का आनन्द लेते रहे।

इसी तरह प्रसिद्ध फ़िल्म और दूरदर्शन के कला निर्देशक और नाटककार जयंत देशमुख के निर्देशन में वरिष्ठ मराठी नाटककार वीवी शिरवाडकर के प्रसिद्ध नाटक नट सम्राट का मंचन किया गया। इसमें एक रंगकर्मी के जीवन का संघर्ष रूपायित किया गया है। इसे दर्शकों से खूब दाद मिली। मप्र नाट्य विद्यालय के निदेशक आलोक चटर्जी ने मुख्य पात्र गणपतराव की भूमिका निभाई. उन्होंने अपने जीवंत अनुभव से दर्शकों के मन में अपनी जगह बनाई. समापन मशहूर सूफी बैंड मुर्शिदाबादी प्रोजेक्ट की सरस प्रस्तुति के साथ हुआ।

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