कला प्रतिनिधि, इंदौर स्टूडियो। “कुछ मीठा हो जाए” जैसी कालजयी पंक्तियों से भारतीय विज्ञापन जगत को नई और वैश्विक पहचान दिलाने वाले दिग्गज, पद्मभूषण स्वर्गीय पीयूष पांडे की यादें एक बार फिर राजधानी में ताज़ा होने जा रही हैं। उनकी 71वीं जयंती के अवसर पर उनकी बहन और प्रख्यात रंगकर्मी रमा पांडे उन्हें एक अनूठी ‘नाट्यांजलि’ अर्पित कर रही हैं। 17 और 18 अप्रैल 2026 को दिल्ली के मंडी हाउस स्थित श्री राम सेंटर में दो दिवसीय ‘पीयूष रंग महोत्सव’ का आयोजन किया जा रहा है। यह महोत्सव महज़ एक आयोजन नहीं, बल्कि एक ऐसे शख्सियत का जश्न है, जिसने अपने वन-लाइनर्स से करोड़ों हिंदुस्तानियों के दिलों पर राज किया।
युवाओं की भागीदारी और ‘ट्रेडमार्क मूंछों’ वाला फोटो कॉर्नर: पीयूष पांडे हमेशा युवाओं के सशक्त समर्थक रहे। उनका मानना था कि भविष्य की मशाल नौजवानों के हाथों में होनी चाहिए। उनकी इसी सोच को जीवंत रखते हुए इस महोत्सव में उनके अपने शिक्षण संस्थान, सेंट स्टीफंस कॉलेज सहित दिल्ली के पांच प्रमुख कॉलेजों के छात्र-छात्राएं हिस्सा ले रहे हैं। आयोजन स्थल पर दर्शकों के लिए एक विशेष “फोटो कॉर्नर” बनाया जा रहा है, जो पीयूष पांडे की विशिष्ट पहचान यानी उनकी ‘ट्रेडमार्क मूंछों’ को समर्पित होगा। इसके अलावा, छात्रों के बीच उनकी मशहूर लाइन “कुछ मीठा हो जाए” की तर्ज पर कैडबरी डेयरी मिल्क चॉकलेट भी बांटी जाएगी।
मंच पर जीवंत होंगी दो शानदार कहानियाँ: संस्था ‘रतनव’ (रमा थिएटर नाट्य विद्या) द्वारा आयोजित इस महोत्सव में प्रतिदिन शाम 6:30 बजे से नाटकों का मंचन होगा: 17 अप्रैल – “दरख़्त-ए-आज़ाद-ए-हिंद”: 1920 के दशक के उत्तर प्रदेश के एक गाँव की कहानी, जो 200 साल पुराने एक नीम के पेड़ के इर्द-गिर्द घूमती है। यह नाटक विकास के नाम पर प्रकृति के विनाश और उसके संरक्षण के संघर्ष के साथ-साथ नई उम्मीदों का संदेश देता है। 18 अप्रैल – “ठाकुर ज़ालिम सिंह”: यह नाटक सत्ता, लोभ और आत्मबोध का एक सशक्त चित्रण है। निर्दयी शासक ठाकुर ज़ालिम सिंह की यह कहानी दर्शकों को अपने असली स्वरूप की ओर लौटने और प्रायश्चित के महत्व पर सोचने को मजबूर करेगी।
विशिष्ट हस्तियों का होगा सम्मान: इस महोत्सव में कला और साहित्य के क्षेत्र में अहम योगदान देने वाली दो विभूतियों को सम्मानित भी किया जाएगा। भारतीय संस्कृति के संरक्षण के लिए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) के सदस्य सचिव श्री सच्चिदानंद जोशी को ‘संस्कृतिशील फॉर प्रिज़र्विंग कल्चर ऑफ इंडिया’ पुरस्कार से नवाज़ा जाएगा। वहीं, 98 वर्षीय पद्मश्री श्रीमती शीला झुनझुनवाला को उनके साहित्यिक अवदान के लिए ‘साहित्यश्री’ सम्मान अर्पित किया जाएगा। इस गरिमामयी आयोजन में नेपाल, मॉरीशस और गुयाना के राजदूतों के भी शामिल होने की संभावना है।
उनके शब्द दिलों से संवाद करते थे: आयोजक और पीयूष पांडे की बहन रमा पांडे ने भावुक होते हुए कहा, “मेरे भाई अपने एक-एक वन लाइनर से लोगों के दिलों को छू लेते थे। वे कम शब्दों में गहरी बात कहने की अद्भुत क्षमता रखते थे। रंगमंच भी लोगों से संवाद करने का वही माध्यम है। इसी भावना के साथ हम उन्हें यह नाट्यांजलि दे रहे हैं।”
रचनात्मक ऊर्जा और भावनात्मक चेतना का संगम: श्री सचिदानंद जोशी ने इस आयोजन को रचनात्मक ऊर्जा और भावनात्मक चेतना का अनूठा संगम बताया। पद्मश्री शीला झुनझुनवाला ने पीयूष पांडे को याद करते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय विज्ञापन जगत को वैश्विक पटल पर स्थापित करने में अद्वितीय भूमिका निभाई। दूरदर्शन के चर्चित कार्यक्रम “जाने अपना देश” की सूत्रधार और प्रख्यात रंगकर्मी रमा पांडे ने ‘रतनव’ संस्था की स्थापना की है, ताकि थिएटर और स्टोरी टेलिंग के ज़रिए लोक कलाओं को नई पहचान दिलाई जा सके। आगे पढ़िये -चार ख़ामोश औरतें जो बयान करती हैं अपने अँधेरों का सच https://indorestudio.com/something-like-truth-play-review/

