इंदौर स्टुडियो.कॉम। सिरेमिक आर्ट के कलाकार सीरज सक्सेना हाल ही में मध्य यूरोप के देश पोलैंड की कला यात्रा पर गये थे। सीरज पोलैंड के 3 शहरों अबोतेरम,गरबात्का और किल्से में हो रही इंटरनेशनल आर्ट वर्कशॉप्स और प्रदर्शनियों में वे हिस्सा लेने भारत से पहुंचे। तीनों शहरों में उनकी कृतियां भी प्रदर्शित की गई। वहां से उन्होंने इंदौर स्टुडियो के व्यूअर्स के लिये अपनी एक्सक्लुसिव कला रिपोर्ट्स भी हमें भेजी। यहां हम वही रिपोर्ट्स आपके लिए विशेषतौर पर एक साथ पब्लिश कर रहे हैं। इन्हें देखना और पढ़ना दिलचस्प अऩुभव है।
जब सीरज पोलैंड के अरनेस्को सेंट्रल स्कल्प्चर पार्क में पहुंचे, तब वहां ख्यात शिल्पकार हेनरी मूर पर केंद्रित एक शिल्प प्रदर्शनी चल रही है। वहां से सीरज ने आपके लिये खुद बनाए वीडियो भेेजे। ये वीडियो बेहद दिलचस्प हैं और मूर के एक अलग कला संसार में ले जाते हैं।
अबोतेरम के वीकलीना आर्ट वर्कशॉप में सीरज ने टहनियों से शिल्प कृतियां बनाईं। वीकलीना वर्कशॉप का संदेश था,हम प्रकृति से जो भी लें,फिर उसे लौटा दें। वर्कशॉप में यूक्रेन और पोलैंज के भी 16 कलाकार भी शामिल हुए।
पत्थर पर जीव विज्ञान के प्रोफेसर का चेहरा
चित्रकार सीरज सक्सेना की कला यात्रा की इस ऋंखला में हमें सीरज सक्सेना ने पोलैंड के शहर शमिश के करीब एक गांव से मूर्तिकला को लेकर चल रहे काम की एक रिपोर्ट भेजी । यहां पर जीव विज्ञान के मशहूर प्रोफेसर योलोगी का बनाया उपवन है। जहां पर याचक नाम के एक मूर्तिकार प्रोफेसर योलोगी के चेहरे को एक पत्थर को बना लेने की कोशिश में जुटे । उनसे सीरज सक्सेना ने बात की ।
यहूदियों की स्मृति संग्रहालय में पहुंचे सीरज सक्सेना…नाज़ियों ने किया था भीषण नरसंहार
सीरज सक्सेना पोलैंड की यात्रा के दौरान बालज़ैक के उस स्मृति संग्रहालय भी पहुंचे जो नाज़ियों द्वारा यहूदियों के भीषण नरसंहार की स्मृति में बनाया गया है। यह संग्रहालय यूक्रेन के लिविन और पोलैंड लबलिन के बीच रेलवे ट्रैक के पास मौजूद है। जहां पर यहूदियों को यूक्रेन,स्लोवाकिया,जर्मनी और पोलैंड से लाया गया था। संग्रहालय में दिये गये तथ्यों के मुताबिक, यहां पर तकरीबन साढ़े चार लाख यहूदियों को मौत के घाट उतार दिया गया था। हिटलर के इशारे पर यहां यहूदियों की तीन नस्लों को खत्म करने की कोशिश की गई थी हालांकि दुनिया का इतिहास बताता है, कोई भी बर्बरता खून खराबा तो कर सकती है लेकिन मानव वध से कोई ना खत्म होता है ना मिटता है। शायद इसलिये यहां की दिवारों पर उकेरे गये खून के रेलों के ऊपर लिखा है—EARTH CAN NOT COVER MY BLOOD. देखिये सीरज का स्मृति संग्रहालय से भेजा गया यह वीडियो।
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