Wednesday, May 20, 2026
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पोस्टकार्ड पर ‘हे राम’ और ‘हिन्द स्वराज’…पोलैंड में सिरज सक्सेना की कला प्रदर्शनी

इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम (शकील अख़्तर)। महात्मा गांधी ने अपने जीवनकाल में हज़ारों की संख्या में लोगों को पत्र लिखे। संवाद के सबसे सस्ते माध्यम पोस्टकार्ड का सामान्य पत्र व्यवहार और आज़ादी के आंदोलन में बखूबी सदुपयोग किया। भारत के जाने-पहचाने चित्रकार सिरज सक्सेना ने इस बार गांधी जी और उनके पोस्टकार्ड को ही अपनी कला का हिस्सा बनाया है। पोलैंड में महात्मा गांधी को समर्पित उनकी कला प्रदर्शनी 1 अगस्त से शुरू हो गई है। उनकी इस प्रदर्शनी को लेकर मेरी उनसे पोलैंड फोन पर बात हुई। सिरज ने इस मौके पर इंदौर स्टुडियो के लिये पोलैंड की आर्ट गैलरी से अपने कुछ शार्ट वीडियोज़ भी भेजे हैं। उनके वीडियोज़ हम यहां साझा कर रहे हैं। खा़स बात यह भी है कि भारत महात्मा गांधी की 150 वीं जयंति वर्ष मना रहा है। ऐसे में सिरज की यह कला प्रदर्शनी अंतरराष्ट्रीय पटल पर एक बड़ी कोशिश है।
चार तरह की कलाओं का समावेश: सिरज ने बताया, पोलैंड की प्रदर्शनी में उन्होंने अपना चार तरह से काम को प्रस्तुत किया है। टेक्सटाइल पोस्टकार्ड , सिरेमिक आर्ट, वुडकट ग्राफिक पेपर पोस्टकार्ड, ब्राउन पेपर पर ग्राफिक प्रिंट। सभी में महात्मा गांधी के व्यक्तित्व और आज़ादी के आंदोलन में सत्य और अहिंसा के प्रयोगों के साथ ही उनके प्रतीकों का  उपयोग किया गया है। एक तरह से महात्मा गांधी की यात्रा को कला और काम के माध्यम से प्रस्तुत करने की कोशिश की गई है। पोस्टकार्ड पर गांधी का चश्मा, उनकी लाठी, खड़ाऊ, चरखा और एक लंगोटी वाली उनकी देह या उनके सिर और कान को प्रतिबिंबित करती रेखाएं संयोजित की गई हैं। सिरज ने अपनी विषय वस्तु में जिस तरह से काग़ज़,कपड़े,मिट्टी जैसी चीज़ों का उपयोग किया है, वो भी गांधी की सरलता,सहजता को ही प्रतिबिंबित करती है।
मेरी कला प्रदर्शनी,गांधी जी को श्रद्धाजंलि: सिरज कहते हैं, ‘गांधी सार्वकालिक हैं, वे कल भी प्रासंगिक थे, वे आज भी प्रासंगिक है। ख़ासकर ऐसे वक्त में जब दुनिया एक बार फिर इंसानी अहसासों से दूर नफरत और हिंसा की गिरफ्त में जा रही है। एक नये किस्म की अधिनायकवादी प्रवृत्तियां उभर रही हैं। तब गांधी जी एक मिसाल और दर्शन की तरह फिर से हमारे सामने आते हैं। उनकी 150 वीं जयंति वर्ष पर मेरी कला उनके प्रति विनम्र श्रद्धाजंलि है।‘
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