Saturday, May 9, 2026
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प्रकाशकों की अविश्वसनीयता का शिकार हो रहे लेखक: विवेक अग्रवाल

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मुस्तफ़ा आरिफ़, इंदौर स्टूडियो। “भारत में प्रकाशकों की अविश्वसनीयता के शिकार देश के लेखक हो रहे हैं। लेखकों को मिलने वाली रायल्टी के प्रदान में कोई पारदर्शी नीति नहीं हैं। यहीं वजह हैं कि मुझे अपने स्वयं का प्रकाशन प्रारंभ करना पड़ा।” ये विचार देश के अपराध जगत को उजागर करने के लिए अनेक पुस्तकों के प्रख्यात लेखक श्री विवेक अग्रवाल ने पुस्तकों के प्रकाशन संबंधी जटिलता पर आयोजित एक संगोष्ठी मे अपने अनुभव साझा करते हुए व्यक्त किए।मुंबई के फनकार स्टूडियो में हुई संगोष्ठी: विश्व हिंदी अकादमी मुंबई और मालवा रंगमंच समिति के संयुक्त तत्वावधान में मुंबई के फनकार स्टूडियो में हुई। समन्वयक केशव राय के संचालन में यह महत्वपूर्ण संगोष्ठी हुई। इसमें सम्मिलिंत प्रख्यात लेखकों ने इस विषय पर अपने अनुभव साझा किये। लेखकों ने राय दी, बदलती परिस्थतियों में लेखकों को किस प्रकार प्रकाशकों के शोषण से बचकर अपनी पुस्तकों के प्रकाशन की प्रक्रिया अपनाना चाहिए। इससे धनोपार्जन के साथ उनकी ब्रांडिंग हो और प्रतिष्ठा व स्वाभिमान में वृद्धि हो।पुस्तकों के प्रकाशन का मार्ग अब सुलभ: वक्ताओं ने बताया कि किस प्रकार अमेजन और किंडल जैसे साधनों के आ जाने से पुस्तकों के प्रकाशन का मार्ग सुलभ हो गया हैं। ये ज़रूरी हो गया है कि किस प्रकार इन माध्यमों के सक्षम उपयोग से लेखक बेस्ट सेलर तक अपनी पुस्तक को पहुंचाए और अपनी राष्ट्रीय और वैश्विक प्रतिष्ठा बनाए, इसके लिए तकनीकी ज्ञान से अवगत होना आवश्यक है।
भारतीय प्रकाशकों का शोषण जारी: रायल्टी के नाम पर शोषण आज भी भारतीय प्रकाशकों का तरीका जारी है, और वैधानिक प्रावधानों के उपरांत अज्ञानता और उससे भी अधिक चुप रहने की प्रवृत्ति दक्ष और अनुभवी लेखकों के लिए आत्मघाती है। भारत मे विगत वर्षो में विदेशी प्रकाशकों का आगमन आधुनिक विपणन तकनीक, लेखकों के प्रति इमानदार रायल्टी वितरण की भावना के कारण फलित प्रफुल्लित हो रहा हैं। लेखकों को अपनी पुस्तक के विपणन और ब्रांडिंग के आधुनिक तरीको के अपनाने से ही शोषण से मुक्ति संभव है। संगोष्ठी को प्रख्यात लेखक अमित खान, विवेक अग्रवाल, सतीश पुरोहित, ब्रांडिंग विशेषज्ञ सतीश खूबचंदानी, सुरेश शर्मा, सुभाषचंद्र त्रिपाठी आदि ने संबोधित किया। इस रिपोर्ट के लेखक पंडित मुस्तफा आरिफ ने  भी अपने महागीत ईश्वर प्रेरणा के कुछ पद सुनाएं और अपनी प्रकाशित पुस्तकों के प्रकाशन के अनुभव साझा किये। आगे पढ़िये –

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