मंदाकिनी माथुर, इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम। दूसरे ऑल लिविंग थिंग्स,एनवायरमेंटल वर्चुअल फ़िल्म फेस्टिवल (ALT EFF) में भारतीय फीचर फ़िल्म की श्रेणी में ‘मोती बाग‘ ने पुरस्कार हासिल किया है। फेस्टिवल की की तरफ़ से अलग-अलग श्रेणियों की अवार्ड सूची भी जारी कर दी गई है। ‘मोती बाग’ के निर्देशक निर्मल चंदन ने फ़िल्म को पुरस्कार दिये जाने पर ख़ुशी जताई है। ख़ास बात यह भी है कि फ़िल्म ‘मोती बाग’ को ऑस्कर के लिये भी नामांकित किया गया है।
फिल्म ‘ओफिर’ का दृश्य
समारोह में 31 देशों की 44 फ़िल्में शामिल की गईं। सभी में निर्देशकों ने दुनिया में पर्यावरण के बिगड़ते हालात की चिंताजनक तस्वीर पेश की है। यह फ़िल्में बताती हैं कि दुनिया के तमाम देशों को अपने पर्यावरण और उससे जुड़े मुद्दों की बदलती तस्वीर पर सजग कदम उठाये जाने की ज़रूरत है। फेस्टिवल की तरफ़ से विजेता सूची इस तरह से है। अंतर्राष्ट्रीय शॉर्ट्स अमी विटाले द्वारा निर्देशित हाथियों के वन्यजीव संरक्षण पर केंद्रित फिल्म ‘शाबा‘ ने पुरस्कार जीता है। इंटरनेशनल फीचर्स की श्रेणी में दो फिल्मों ने बेस्ट डायरेक्टर का अवार्ड हासिल किया। इनमें अलेक्जेंड्रे बर्मन द्वारा निर्देशित,’ओलिवियर पोलेट‘ और क्रिस्टी कूपर द्वारा निर्देशित ‘यूथ वर्सेस गवरमेंट‘ रहीं।
फिल्म ‘दि पेंगोलिन मैन’
भारतीय शॉर्ट्स की श्रेणी में, निर्देशक धीरज ऐथल और प्रदीप हेगड़े की जोड़ी ने अपनी फ़िल्म में ‘मेंढक’ पर ध्यान केंद्रित किया। इस फ़िल्म ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया और पुरस्कार जीता। भारतीय फीचर फिल्म की श्रेणी में निर्मल चंदर द्वारा निर्देशित फिल्म ‘मोती बाग‘ ने बाज़ी मारी। यह फ़िल्म उत्तराखंड के गांवो की दिल दहला देने वाली कहानी है। स्टूडेंट फिल्म्स की श्रेणी में, नवोदित निर्देशक ऐली स्टोन्स ने फिल्म, ‘द पैंगोलिन मैन‘ के लिये पुरस्कार प्राप्त किया।
‘मोती बाग’ के लिये पुरस्कार पाने वाले निर्देशक निर्मल चंदर ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा, ‘उनके लिये इस फ़िल्म का निर्माण आसान नहीं था। यह उत्तराखंड के गांवों की दुर्दशा का एक ईमानदार चित्रण है। मुझे ख़ुशी है कि एएलटी ईएफएफ (ALT EFF) में जूरी ने हमारे काम पर विश्वास किया। फिल़्म को ऑस्कर नामांकन भी मिला है। इसलिये अब इस विषय पर दुनिया का ध्यान और भी आकर्षित हो सकेगा’। आपको बता दें, ऑल लिविंग थिंग्स एनवायरनमेंटल फिल्म फेस्टिवल (ALT EFF) भारत का इकलौता पर्यावरण सिनेमा आधारित फेस्टिवल है। को-फाउंडर कुणाल खन्ना ने फेस्टिवल के बारे में कहा,’ इस मंच के माध्यम से हमारा उद्धेश्य जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना है। ताकि हमारी दुनिया अपनी ग़लतियों से सीखकर बेहतर दिशा में आगे बढ़ सके। ऐसे मुद्दों पर सच्चे और सकारात्मक अर्थों में बात आगे बढ़ सके। यह फ़िल्म फेस्टिवल 17 अक्टूबर को समाप्त हो जायेगा। (मंदाकिनी माथुर, पर्यावरणप्रेमी और फिल्म डायरेक्टर हैं। आप पंचगनी,महाराष्ट्र में रहती हैं। पंचगनी में पर्यावरण हित से जुड़े कार्यक्रमों और जागरूकता अभियान के लिये निरंतर काम करती हैं। )
पर्यावरण केंद्रित फ़िल्म उत्सव में ऑस्कर नामांकित फ़िल्म ‘मोती बाग़’ पुरस्कृत
RELATED ARTICLES

