Saturday, May 9, 2026
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कितनी बदली है हमारे गांवों की कहानी : कल और आज की कहानियों पर होगी बात

28 मार्च ( इंदौर स्टुडियो)। छत्तीसगढ़ फ़िल्म एण्ड विज़ुअल आर्ट सोसाइटी देश की प्रतिष्ठित पत्रिका कथादेश के साथ मिलकर पूना में तीन दिवसीय कथा समाख्या का आयोजन करने जा रही है । कथा विमर्श की श्रृखंला में यह आयोजन 30 मार्च से होगा। इस कार्यक्रम में देश के ख्यातिनाम कहानीकार,समीक्षक भाग लेंगे। कथा समाख्या में आज के सवाल और हिंदी कहानी बदलते गांव की दास्तान” पर चर्चा होगी ।
 30 मार्च, 2018 को एक कहानी गाँव की पर चर्चा होगी। इस सत्र में प्रतिभागी 100 वर्षों से अधिक की इतिहास-यात्रा में मील का पत्थर मानी गई किसी एक कहानी पर चर्चा करेंगे। गाँवों के बदलते जीवन-यथार्थ रेखांकित करेंगे।
31 मार्च, 2018 को मेरा गाँव, मेरी कहानी विषय पर प्रतिभागी अपने विचार रखेंगे। इस सत्र में प्रतिभागी अपने गाँव को लेकर अपनी लिखी कहानियों पर अपनी बात करेंगे।  1 मार्च 2018 के अंतिम सत्र में समकालीन जीवन में पूँजी, टेक्नोलॉजी और बाज़ार, राजनीति, शिक्षा के हस्तक्षेप से होने वाले सामाजिक बदलाव की कहानियों पर चर्चा होगी।
पूना मे आयोजित कथा समाख्या में जिन कहानियों पर चर्चा की जाएगी उनमें महेश कटारे (पंच परमेश्वर ),शिवमूर्ति  (रसप्रिया, फणीश्वर नाथ रेणु), हृषीकेश सुलभ  (तीसरी कसम उर्फ मारे गए गुलफाम, फणीश्वर नाथ रेणु), सत्यनारायण (कोसी का घटवार, शेखर जोशी) देवेंद्र (मुक्तिमार्ग, प्रेमचंद) चरण सिंह पथिक ( गुनाह, जय नंदन ल) सत्यनारायण पटेल (एक गांव फुलझर, कैलाश बनवासी), आशुतोष (पानी,  मनोज कुमार पांडेय), रामकुमार तिवारी (पूस की रात, प्रेमचंद),जयप्रकाश (हिंगवा घाट में पानी रे, चंद्रकिशोर जायसवाल) सुभाष मिश्र ,पंचलेट ( फणीश्वर नाथ रेणु ),आनंद हर्षुल ,बुडान (पूरन हार्डी ) की कहानी पर चर्चा करेंगे ।
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