Wednesday, May 13, 2026
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पुण्यतिथि विशेष : मुहम्मद रफ़ी के भक्त थे महेंद्र कपूर, रोहण कपूर ने की गायक पिता की याद

इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम। महेंद्र कपूर मुहम्मद रफ़ी के बहुत बड़े प्रशंसक या एक क़िस्म से उनके भक्त थे। यह बात मुंबई में एक रेडियो इंटरव्यू में खुद महेंद्र कपूर के बेटे रोहण कपूर ने बताई। उन्होंने बताया कि उनके पिता रफी़ साहब फिल्म ‘जुगनू’ में आये गीत ” यहां बदला वफा का बेवफाई के सिवा ” को सुनकर रफी साहब की आवाज़ और गायिकी के दीवाने हो गये थे। वे उस गीत के बाद से ही रफी साहब से मिलने को बेताब थी, यहां तक की वे उनसे संगीत की गुर सीखना चाहते थे। रोहण कपूर ने यह भी कहा कि जैसे लोग अपनी कॉपी में राम-राम लिखते थे, महेंद्र कपूर अपनी कॉपी मे मुहम्मद रफी,मुहम्मद रफी लिखा करते थे।

रोहण कपूर के मुताबिक, महेंद्र कपूर जब 10 साल के थे,तब उन्होंने किसी तरह रफी साहब के घर का पता लगाया और उनके घर पहुंच गये। महेंद्र के दरवाज़ा खटखटाने पर खुद रफ़ी साहब सामने आ गये। रफी साहब तब लुंगी और बनियान पहने हुए थे। रफी साहब ने महेंद्र से पूछा,किससे मिलना है ,महेन्द्र कपूर बोले जी मौहम्मद रफी से। रफी साहब बोले, मैं ही रफी हूं, बोलो क्या काम है। महेन्द्र कपूर की घिग्गी बंध गई। वह बोले कि मै आपके गाने सुनता हूं और मैं आपका फैन हूं। रफी साहब ने महेन्द्र कपूर को बिठाया और पानी पिलाया बातों ही बातों में पता चला कि महेन्द्र कपूर अमृतसर के रहने वाले हैं। इस बात को जानकर रफी साहब बहूत खुश हो गए। रफी साहब भी अमृतसर के थे। उस समय चाहकर भी महेंद्र कपूर यह रफी साहब से नहीं कह सके कि वे भी संगीत सीखना चाहते हैं। उन्होंने रफी से कहा, मेरे भाई को संगीत सीखना है, उसे म्यूजिक का शौक है। रफी साहब ने कहा कि वह कल अपने पिता और भाई को लेकर आ जाना ! अगले दिन महेंद्र कपूर अपने भाई और पिता को लेकर रफी साहब के घर पहुंच गए। वहां रफी साहब और हामिद भाई बैठे हुए थे। हामिद भाई एक सुलझे हुए इंसान थे वो रफी साहब से बोले, बेटा रफी तुम बाजा निकालो। इससे पहले कि रफी साहब बाजा लाते,महेंद्र कपूर ने दौडकर चटाई बिछा दी और हारमोनियम भी रख दिया। हमीद भाई फौरन बोले, रूको सही सही बताओ सीखना किसको है ? यह संगीत सीखने की आग है, वो मुझे इस बच्चे मे नजर आती है। बडा भाई बैठा हुआ है,महेन्द्र कपूर के पिता बोले ,दरअसल शौक इसी को है। मगर ये शरमा गया था, रफी साहब ने महेंद्र कपूर का हाथ थामा और उसपर गंडा बांधा। सारी रस्म की गई।मिठाई बांटी गई। इस तरह महेंद्र कपूर रफ़ी साहब के शागिर्द बने और उनकी संगीत की शिक्षा शुरू हो गई। रफ़ी साहब ने बहुत वक्त महेंद्र कपूर का साथ दिया उनकी तालीम जारी रखी। बहुत सी रिकार्डिंग में रफ़ी साहब ख़ुद महेंद्र कपूर को साथ ले जाते रहे।

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