प्रवीण कुमार खारीवाल, इंदौर स्टूडियो। ‘पुराने गाने पांच-छह दशकों बाद भी बांध कर रखते हैं क्योंकि उनमें संगीत की आत्मा बसती है। एकॉस्टिक या असली वाद्य यंत्रों का असर भी डिजिटल वाद्य यंत्रों के मुकाबले बहुत गहरा है। रेडीमेड कल्चर से शब्द पंच कर करके तैयार आज के गाने चंद दिनों में स्मृति से उतर जाते हैं, इसमें आश्चर्य की बात भी नहीं है’!
स्व.मुकेश के नग़मों की पुरकशिश आवाज़ : ये गहरी और अनुभवी बातें ख्यात स्टेज सिंगर मुख़्तार शाह ने कही। श्री शाह स्टेज प्रेस क्लब, मध्यप्रदेश द्वारा आयोजित रूबरू कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। आपको बता दें कि मुख़्तार स्व.मुकेश की आवाज़ और अंदाज़ को मंच पर प्रस्तुत करने वाले सर्वाधिक लोकप्रिय गायकों में से एक हैं। बहुत बार उनकी गायिकी मुकेश की आवाज़ होने का अहसास देती है। मुख़्तार शाह बीते चालीस सालों में मुकेश जी के गानों के लगभग 7 हज़ार शोज़ देश-विदेश में कर चुके हैं।
पुराने गीत-संगीत की निराली है बात: मुख़्तार एक ऐसे सिंगर भी हैं जिनके इंदौर में भी हाऊस फुल शोज़ होते रहे हैं। उन्होंने पुराने गीतों को आज भी पसंद किये जाने के सवाल पर कहा, पुराने गीत बहुत सशक्त हैं, उनके शब्दों के मायने बहुत गहरे हैं। उनकी कंपोज़िशन्स भी कमाल की है। इतना ही नहीं उन्हें निभाने वाले गायकों ने कई दिनों की रिहर्सल के बाद उनके भावों में भीगकर गाया है। इसी तरह उन गीतों को परदे पर अभिनीत करने वाले कलाकारों और उन्हें फिल्मांकित करने वाले निर्देशकों ने भी उतना ही इंसाफ़ किया है।
सादगी और इमोशन्स का तालमेल: मुख़्तार ने कहा, मुकेश साहब की गायकी के लिए सबसे ज़रूरी उनकी सादगी, इमोशनल फील को अपनाना सबसे ज़रूरी है। मुकेश जी का हर गाना दिल से गाया गया है और ये बात उनके गीतों को गाते समय दर्शकों तक पहुंचनी ज़रूरी है। वे पुराने गीतों को गाते समय वक्त बेवजह की हरकतों के समर्थन में नहीं है। मुख़्तार बोले, गायन में कुछ अलग जोड़ना, असल में यह दिखाने की कोशिश है कि हम मूल गायक से अधिक जानते हैं। मगर श्रोता अपने दिल में बसे गीत को ही जस का तस सुनकर ज़्यादा लगाव महसूस करते हैं।
वकालत छोड़कर इस तरह बना सिंगर : मुख्तार शाह ने बताया कि स्कूल के ज़माने में ही उन्हें दोस्त मुकेश शाह कहने लगे थे। लेकिन परिवार के लोग चाहते थे कि मैं वकालत करूँ। मैंने वकालत शुरू भी की लेकिन जल्दी ही दोनों प्रोफेशन को साथ चलाना मुश्किल हो गया। ऐसे ही समय में यूके का एक टूर मिला। उस टूर में भारतीय क्रिकेट टीम के सदस्य भी शामिल थे। मैंने देखा कि वकालत के पेशे में जहां वक्त टेंशन और निगेटिविटी के बीच गुज़रता है। वहीं संगीत की वजह से कपिल देव, वेंगसरकर, सचिन तेंदुलकर, सिद्धू जैसे खिलाड़ियों का ना सिर्फ साथ मिलता है बल्कि माहौल भी खुशनुमा रहता है। बस वहीं से संगीत जीवन बन गया।
नितिन मुकेश के साथ शो का इन्तज़ार : आख़िर में मुख़्तार शाह ने कहा, उन्होंने बॉलीवुड के कई नामी सिंगर्स के साथ शोज़ किये हैं लेकिन नितिन मुकेश के साथ प्रस्तुति का उन्हें अभी इंतज़ार है। नितिन मुकेश ने एक बार कहा था कि मुकेश साहब की बाकी सारी विरासत हमें मिली है, बस आवाज़ मुख्तार को मिली है, जिसे वे बहुत बड़ा कॉम्प्लीमेंट मानते हैं। शाह ने पत्रकारों की फरमाइश पर कुछ गीत भी सुनाये। उन्होंने ‘राम कहे ऐसा हो जाए’ गीत गाकर भाव विभोर कर दिया। कार्यक्रम के पहले चरण में स्टेट प्रेस क्लब के महासचिव आलोक बाजपेयी और जितेन्द्र भाटिया ने अतिथियों का स्वागत किया। सचिव श्री आकाश चौकसे ने स्मृति चिन्ह प्रदान किए। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट प्रेस क्लब, इंदौर के साथ ही अभिनव कला समाज के अध्यक्ष भी हैं।) आगे पढ़िये, मेघदीप बोस ने क्यों कहा, उन्हें मिला महादेव का आर्शीवाद – https://indorestudio.com/band-of-boys-ke-liye-sangeet/
पुराने गीतों में है संगीत की आत्मा, इसीलिये वो आज भी सुपरहिट!
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