Wednesday, May 13, 2026
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मेलोडी क्वीन की मीठी आवाज़ और सुनहरे दौर के नग़मे

राजेश बादल, इंदौर स्टूडियो। इंडिया इंटरनेशनल सेंटर की एक शाम पुरानी फ़िल्मों के गीतों और गायिकाओं के नाम रही। डेढ़ घंटे तक सुनने वालों के दिलों में नूरजहां से लेकर रेखा भारद्वाज तक के सुरों का अहसास धड़कता रहा । ‘आवाज़ दे कहां है’ से शुरू हुआ सरगम का सफ़र ‘ससुराल गेंदा फूल’ तक गया । इन सबको हमने एक ही गले से निकलते देखा । इंटर नेशनल मेलोडी फाउंडेशन के सालाना सम्मान ‘मेलोडी क्वीन -2019’ से अलंकृत मुंबई की बरखा पिंच्छा ने इन गीतों के जरिए सबको सम्मोहित कर दिया।
सुश्री बरखा पिन्छा का सर्व-सम्मति
से हुआ चुनाव :
इंटर नेशनल मेलोडी फाउंडेशन का यह आयोजन तनिक अंतराल के बाद हुआ । फाउंडेशन के महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में कार्यक्रमों के कारण ऐसा हुआ । संस्था के सूत्रधार डॉक्टर हरीश भल्ला ने इस बार अपने कार्यक्रमों को नया रूप देने का प्रस्ताव रखा । इस बारे में एक जूरी का गठन किया गया । जूरी ने गायन के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले एक गायक / गायिका को हर साल सम्मान देने का फ़ैसला किया । यह भी तय किया गया कि सम्मान के लिए किसी से आवेदन नहीं मांगे जाएंगे ,बल्कि जूरी ख़ुद अपने स्तर पर इनकी खोज करेगी । जूरी के अध्यक्ष देश के जाने माने समाजसेवी,शिक्षाविद्, संगीत रसिक और पूर्व फौजी कैप्टन एल एस बहल थे। लोकप्रिय एक्सचेंज फॉर मीडिया के डायरेक्टर नवल आहूजा और मैं स्वयं इसका सदस्य था। जूरी ने साल के सम्मान के लिए मुंबई में अपने अनेक कामयाब शो से धूम मचाने वाली सुश्री बरखा का सर्व सम्मति से चुनाव किया और दिल्ली में अपनी प्रस्तुति के लिए आमंत्रित किया। बता दूं कि बरखा जी मुंबई और नागपुर से ताल्लुक रखती हैं ,लेकिन मध्यप्रदेश के मालवा में जन्मी और पली बढ़ीं। कौमी एकता की मिसाल जावरा में उनकी संगीत शिक्षा हुई।
सदाबहार गीतों में गुज़रे ज़माने का दौर हुआ जीवंत: बरखा जी ने नूरजहां के आवाज़ दे कहां है,सुरैया के ओ दूर जाने वाले, शमशाद बेगम के एक दो तीन आजा मौसम है रंगीन , जगजीत कौर के तुम अपना रंजोगम , सुधा मल्होत्रा के तुम मुझे भूल भी जाओ तो ये हक है तुमको, मुबारक बेगम के मुझको अपने गले लगा लो, सुमन कल्याणपुर का न तुम हमें जानों, रेशमा का लंबी जुदाई, इक़बाल बानो की गाई फ़ैज़ की अमर रचना हम देखेंगे , गीता दत्त का वक़्त ने किया क्या हसीं सितम, फरीदा खानम की आज जाने की ज़िद न करो , सलमा आगा की हवा भी है जवां जवां, आशा भोंसले का दम मारो दम, मलिका पुखराज का अभी तो मैं जवान हूं और लता मंगेशकर के तू चंदा मैं चांदनी जैसे अनेक सदाबहार गीतों को सुनाकर अतीत के अनेक चित्र जीवंत कर दिए।
समारोह का संचालन स्थाई सूत्रधार डॉक्टर हरीश भल्ला ने किया। बीच -बीच में मैंने कुछ अतिक्रमण करके गीतों और गायिकाओं के परदे के पीछे की कहानियां सुनाई । संगीत निर्देशक थे अपने ज़माने के मशहूर संगीत निर्देशक खेम चन्द्र प्रकाश के पौत्र श्रीधर। उनके संगीत निर्देशन ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।संगीत संध्या का लुत्फ़ उठाने के लिए आए ख़ास मेहमानों में न्यायमूर्ति जी एस सिस्तानी , सिक्किम के पूर्व राज्यपाल वाल्मीकि प्रसाद सिंह, साहित्यकार और कवि आलोचक बुद्धिनाथ सिंह , मुंबई के उद्योगपति किशोर बियानी, विकास पिं छा, राज्य सभा सांसद विवेक तनख़ा और समाज सेवी आलोक मुखर्जी, अभिनेत्री और फिल्मकार डॉक्टर लवलीन थड़ानी मुंबई की समाजसेवी और आहार पोषण विज्ञानी जुल्फी आहूजा, समाजसेवी दंपत्ति सचिन जैन और पूजा जैन वरिष्ठ पत्रकार वेद प्रताप वैदिक, विनोद अग्निहोत्री और इंडिया न्यूज़ के वरिष्ठ संपादक मनीष अवस्थी, गोपाल दीक्षित, फिल्मकार शरद दत्त और सांस्कृतिक हस्ती अमरजीत कोहली समेत सैकड़ों संगीत प्रेमी अंत तक इसका आनंद उठाते रहे।

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