सुभाष अरोरा, इंदौर स्टूडियो: चंडीगढ़ में सबके चहेते दिग्गज फोटोग्राफ़र रघु राय को विनम्र श्रद्धांजलि दी गई। उनकी याद में बाँसुरी की गूँज सुनाई दी और दिल की गहराइयों से शब्द निकले। पंजाब कला भवन में पंजाब ललित कला अकादमी और चंडीगढ़ ललित कला अकादमी ने संयुक्त रूप से यह कार्यक्रम आयोजित किया। इस श्रद्धांजलि सभा में कला जगत की बहुत सी दिग्गज हस्तियों ने शिरकत की।
कार्यक्रम की शुरुआत युवा संगीतकार नवदीप सिंह के बांसुरी वादन से हुई, जिसकी सुमधुर तानों ने वातावरण में एक गरिमामयी उदासी और शांति घोल दी। प्रसिद्ध कलाकार दीवान माना ने रघु राय के साथ बिताए क्षणों को साझा करते हुए कहा, “रघु राय केवल एक फोटोग्राफर नहीं, बल्कि संगीत, वनस्पति और मानवता के प्रति गहरे अध्यात्म से जुड़े व्यक्तित्व थे। वे जहां भी जाते, वहां से पौधे लेकर लौटते और कहते कि उनके घर में पूरे देश की मिट्टी महकती है।” इसी स्मृति को जीवंत करने के लिए दीवान माना सभा में पौधे लेकर आए ताकि रघु राय का प्रकृति प्रेम पल्लवित हो सके।
‘रघु राय: वेटिंग फॉर द डिवाइन’ की लेखिका सुश्री रचना सिंह ने काम के प्रति उनकी निष्ठा को याद करते हुए बताया कि ‘बिना मरे स्वर्ग नहीं मिलता’ की उक्ति उनके जीवन का दर्शन थी। यही समर्पण उन्हें भारतीय फोटोग्राफी का शीर्ष नक्षत्र बनाता है। वहीं, फोटो फीचर के दिग्गज प्रमोद पुष्करणा ने रघु राय की शुरुआत और उनके बड़े भाई एस. पाल की ‘फोटोग्राफी पाठशाला’ का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि रघु राय गुणवत्ता से कभी समझौता नहीं करते थे। आगरा की प्रदर्शनी के लिए सैकड़ों चित्रों को नकार कर केवल एक ‘ट्रांसपेरेंसी’ को चुनना या भोपाल गैस त्रासदी के उस भयावह चित्र को विश्व पटल पर लाना, उनकी पारखी नजर का ही कमाल था।
इस अवसर पर रघु राय पर बनी एक शॉर्ट फिल्म भी दिखाई गई जिसमें रघु राय अपनी फोटोग्राफ़ी की यात्रा के बारे में बताते नज़र आए। यह देखते हुए दर्शकों की आँखें भीग गई। मंच का संचालन पंजाब ललित कला अकादमी के अध्यक्षगुरदीप धीमानने किया और आभार प्रदर्शन भीम मल्होत्रा ने किया। सभा के अंत में आगंतुकों को रघु राय के चित्रों के प्रिंट निशुल्क भेंट किए गए। इस मौके पर शहर के तमाम कलाकार, साहित्यकार और बुद्धिजीवी अपने प्रिय कलाकार को नमन करने के लिए मौन खड़े नजर आए। (सुभाष अरोरा प्रख्यात मूर्तिकार और कला समीक्षक हैं।) आगे पढ़िये- अक्स तमाशा से NSD के समर थियेटर फेस्टिवल का आग़ाज़ https://indorestudio.com/nsd-summer-theatre-festival-2026-aks-tamasha-bhanu-bharti/
दिल की गहराइयों से निकले शब्द और रघु राय की याद
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