Wednesday, May 13, 2026
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राजा बुंदेला और सुष्मिता की कोशिशों ने बांधा समां, ओरछा में भारतीय फिल्म महोत्सव यादगार बना

ओरछा,25 मई (कला प्रतिनिधी)। कई रचनात्मक कार्यक्रमों के साथ ओरछा में पांच दिवसीय भारतीय फिल्म महोत्सव 2018 संपन्न हो गया। राजा बुंदेला और सुष्मिता मुखर्जी की सार्थक पहल इस आयोजन को विशिष्ट पहचान देने में सफल रही। स्थानीय प्रतिभाओं को इस आयोजन के माध्यम से एक बड़ा मंच मिला। कला,संस्कृति और पर्यटन की दृ्टि से ओरछा एक बार फिर सुर्खियों में छाया रहा। तेज़ गर्मी और सीमित साधनों के बावजूद आयोजन का सफल प्रबंधन एक बड़ी खूबी रही। मां-वेत्रवंती की आरती जैसी पहल ने आयोजन में नई सांस्कृतिक धारा को विस्तार दिया।

फेस्टिवल के अंतिम दिन मां-वेत्रवंती की आरती की गई। यह पहला मौका था जब फिल्म-फेस्टिवल में जीवनदायनी नदी की आरती की नींव रखी गई| राजा बुंदेला ने राज्य सरकार से हर दिन शाम 7 बजे इस आरती की परंपरा की मांग भी की है।

इस फिल्म फेस्टिवल में कई हस्तियों ने शिरकत की। आखिरी दिन केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर,फिल्म अभिनेता यशपाल शर्मा, अभिनेत्री नफीसा अली और फिल्मकार पवन शर्मा शामिल हुए। श्री तोमर ने इस विशिष्ट आयोजन के लिये अभिनेता राजा बुंदेला और सुष्मिता मुखर्जी की प्रशंसा की| उन्होंने मुंबई से आये कलाकारों और नवोदित फिल्मकारों को सम्मानित किया।

आयोजन के दौरान राजा बुंंदेला को ग्वालियर के फिल्मकार और लेखक एमजी सचिन ने अपनी पुस्तक -मेरा रंगमंच..मेरे नाटक, भेंट की।

सौ फिल्में दिखाईं गईं, कला का रंग छाया  

आयोजन के दौरान सौ से ज़्यादा फिल्मों का टपरा टॉकीज़ में प्रदर्शन किया गया। गीत,संगीत के साथ कई कलाकारों का सम्मान किया गया। आयोजन स्थल पर चित्रकला प्रदर्शनी लगाई गई और करीब सौ युवाओं और बच्चों ने नि:शुल्क थिएटर और फिल्म वर्कशॉप में भाग लिया। अभिनय और निमार्ण से संबंधित बारिकियां सीखीं। ओरछा में यह आयोजन रूद्राणी कलाग्राम में हुआ। 43 से 45 डिग्री की तेज़ गर्मी के बावजूद बड़ी संख्यां में इस आयोजन मों दर्शकों और कलाकारों ने हिस्सा लिया। जंयत देशमुख की कला सज्जा और आंचलिक सहजता इस आयोजन की खूबी रही। यह पहला ऐसा आयोजन भी था जिसमें अध्यात्म और योग के पहलुओं को भी समाहित किया गया। बकायदा योग की क्लासेस लगीं।

ओरछा में फिल्म फेस्टिवल क्यों ? 

राजा राम की नगरी ओरछा धर्म और पुरातत्व महत्व की होने के साथ “Special Economic Zone” (SEZ)  के अंतर्गत आती है| मध्यप्रदेश का यह क्षेत्र आज भी कला-मनोरंजन-सिनेमा की मुख्यधारा से काफी पीछे है| कला-मनोरंजन-सिनेमा की अपार संभावनाओं के साथ स्थानीय कला प्रतिभाओं के लिये भी ऐसे आयोजनों का बड़ा महत्व है|इसी मकसद से राजा बुंदेला और सुष्मिता ने इस आयोजन की कल्पना की, इसका आयोजन किया । फेस्टिवल के माध्यम से युवा प्रतिभाओं को कला की मुख्यधारा से जोड़ना और उनकी प्रतिभा का विकास करना है| ऐसे आयोजनों के ज़रिये ओरछा को पर्यटन की दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण बनाना है। साथ ही फिल्मकारों को शूटिंग के लिये ओरछा और बुंदेलखंड की ओर आकर्षित करना है।

हर दिन हो मां-वेत्रवंती की आरती: राजा बुंदेला 

फेस्टिवल के अंतिम दिन मां-वेत्रवंती की आरती की गई। यह पहला मौका था जब फिल्म-फेस्टिवल में जीवनदायनी नदी की आरती की नींव रखी गई| राजा बुंदेला ने इस संबंध में राज्य सरकार से हर दिन शाम को सात बजे इस आरती की परंपरा की मांग भी की है। मां वेत्रवंती की आरती में राजा बुंदेला और सुष्मिता मुखर्जी के साथ ही हरगोविन्द सिंह कुशवाहा (मन्त्री मध्य-प्रदेश शासन), फिल्म अभिनेता यशपाल शर्मा , मानवेन्द्र सिंह जी (डीएम. ललितपुर), झाँसी महापौर,   अभिनेत्री नफीसा अली, फिल्मकार  पवन शर्मा, राजा बुंदेला, वरिष्ठ रंगकर्मी और फिल्मकार अरुण काटे,मुंबई के प्रसिद्ध शायर रमीज़ जी भाई, प्रयास प्रोडक्शन के प्रमुख जगमोहन , राकेश वर्मा, प्रो. मोहम्मद नईम , लेखिका गीतिका वेदिका, फिल्म लेखिका गीतकार सुश्री सरिता चौरसिया शामिल हुए। आरती का लेखन किया लेखक-अभिनेता आरिफ़ शहडोली ने जिसका संगीत और गायन जयकारन निर्मोही ने किया है|

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