कला संवाददाता, इंदौर स्टूडियो। साहित्य कला परिषद दिल्ली द्वारा उत्कृष्ट मौलिक हिंदी नाट्य लेखन 2021-22 के लिए मोहन राकेश सम्मान पुरस्कारों की घोषणा हाल ही में की गई है। तीन सदस्यों वाली निर्णायक समिति ने पहले पुरस्कार के लिये ख्यात नाटककार राजेश कुमार के नाटक ‘निःशब्द’ को चुना है। श्रीराम शर्मा कापरेन के नाटक ‘धनपति नवाब से प्रेम’ को द्वितीय, डॉ. प्रतिभा जैन के नाटक ‘महाश्रमण चंद्रगुप्त मौर्य’ को तृतीय और दयानंद शर्मा के नाटक ‘इश्क रामचंदर’ को सांत्वना पुरस्कार के लिए चुना गया। पुरस्कृत नाटकों का मंचन हिंदी के चर्चित नाट्य निर्देशकों के निर्देशन में आने वाले महीनों में दिल्ली के प्रेक्षागृह में किया जाएगा। पुरस्कार के लिए 68 नाट्यालेख मिले थे। (अनुकृति,रंगमंडल कानपुर द्वारा मंचित नाटक ‘नि:शब्द’ का एक दृश्य)
‘निःशब्द’ नाटक कोरोना काल के दौरान महामारी से जूझते एक परिवार की कहानी है। नाटक में एक दम्पति को कोरोना महामारी से जूझते, ऑक्सीजन सिलेंडर, हॉस्पिटल सहित कोरोना से चरमराई व्यवस्था से लड़ते और दम तोड़ते दर्शाया गया है। राजेश कुमार ने नाटक के माध्यम से व्यवस्था पर करारी चोट की है। राजेश कुमार भागलपुर, बिहार के मूल निवासी हैं। उनका जन्म 11 जनवरी, 1958 को पटना में हुआ था। राजेश कुमार वर्तमान में गाजियाबाद में रहते हैं। उन्होंने भागलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। राजेश कुमार 1976 से लगातार रंगमंच और सामाजिक कार्य के क्षेत्र में सक्रिय हैं। सारिका और धर्मयुग जैसी पत्रिकाओं में नियमित कहानियां लिखने के बाद राजेश कुमार ने रंगमंच की तरफ रुख किया। उन्होंने विभिन्न विषयों पर दर्जनों मंच नाटकों और नुक्कड़ नाटकों से रंगमंच को राजनीतिक चेतना से लैस किया है। उनके बहुचर्चित नाटकों में ‘गांधी और अम्बेडकर’, ‘हिन्दू कोड बिल’, ‘मूक नायक’, ‘गांधी ने कहा था’, ‘सत भाषै रैदास’, ‘घर वापसी’, ‘ट्रायल ऑफ़ एरर्स’, ‘मर गया सुखिया भूख से’ आदि प्रमुख हैं। ‘ज़िन्दाबाद-मुर्दाबाद’, ‘रंगा सियार’, ‘जनतंत्र के मुर्गे’ और ‘हमें बोलने दो’ जैसे चर्चित नुक्कड़ नाटक हैं। राजेश कुमार उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन में मुख्य अभियंता के पद से रिटायर होने के बाद पूरी तरह से रंगमंच को समर्पित हैं।
राजेश कुमार के नाटक ‘निःशब्द’ को मोहन राकेश सम्मान का पहला पुरस्कार
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