इंदौर स्टूडियो, कला प्रतिनिधि। ‘रणभूमि की नायिका’ की नाट्य प्रस्तुति के साथ ग्वालियर में तीन दिवसीय बहुभाषिक ग्वालियर नाट्य समारोह संपन्न हो गया। स्थानीय टाऊन हाल में यह महोत्सव 28 दिसंबर से जारी था। इसे बड़ी संख्यां में दर्शकों ने देखा। वीमेंस नाट्य संस्था का नगर में यह पहला बड़ा प्रयास था। नाट्य समारोह संस्कृति मंत्रालय,नई दिल्ली और संस्कृति संचालनालय भोपाल के सहयोग से आयोजित हुआ।
वीरांगना वेलू नचियार ग्वालियर के मंच पर: ‘रणभूमि की नायिका’ भोपाल के सोशियो सोशल सोसायटी की प्रस्तुति थी। असल में यह नाटक शिवगंगा,चेन्नई की वीरांगना वेलू नचियार के जीवन पर आधारित है। 1730 में जन्मी वेलू नचियार भारत की पहली महिला स्वतत्रंता सेनानी थीं, उन्हें वीर मंगई के नाम से भी जाना जाता है। उनके काल में मद्रास की राजधानी शिवगंगा पर काबिज़ होने से पहले अंग्रेजों ने भारी मारकाट मचाई थी। वेलु नचियार अंग्रेज़ों पर आक्रमण कर शिवगंगा को फिर से स्वतंत्र करा लेती हैं। बचपन से ही तलवारबाज़ी और घुड़सवारी में निपुण वेलु ब्रिटिश सत्ता पर हमले के लिये मैसूर के सुल्तान हैदर अली से मदद लेती हैं और फिर अंग्रेजों पर हमला बोल देती हैं। इस नाटक का लेखन स्व.तारिक दाद ने किया है। नाटक का निर्देशन विभा श्रीवास्तव ने किया है। नाटक को उन्होंने काफी शोध के बाद तैयार किया है। उनके रंग समहू की प्रस्तुति के बाद वीमेंस नाट्य संस्था की सचिव गीतांजली गीत ने उनका सम्मान किया।
नृत्य,संगीत और संवाद के कार्यक्रम: रणभूमि की नायिका के प्रदर्शन से पहले आयुषी सरवरिया और आर्या त्रिपाठी ने कथक की प्रस्तुति दी। इसके बाद में कृतेन्द्र सिंह और उनके कलाकार साथियों ने बुंदेली लोक गीतों का कार्यक्रम प्रस्तुत किया।
‘रंगमंच और तकनीक’ विषय पर संवाद: तीसरे और अंतिम दिन दोपहर में ‘रंगमंच और तकनीक’ विषय पर रंग संवाद का कार्यक्रम भी हुआ।रंग संवाद में राजा मानसिह विश्वविद्यालय के नाटक विभाग की विभाग अध्यक्ष डा. हिमांशु द्विवेरी,भोपाल से पधारी विभा श्रीवास्तव, रंग सारथी के रविन्द्र जगताप, न्यानेश्वरी फिल्मस के प्रशांत चव्हाण और भोपाल के धन्नूलाल सिन्हा ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन समन्वय शिक्षा समिति के सचिव संजय सिंह जादौन ने किया। सभी ने रंगमंच की प्रस्तुति में तकनीक के उपयोग के महत्व की बात की। कहा, इससे नाटक और भी प्रभावशाली बनाया जा सकता है।
‘रणभूमि की नायिका’ के साथ ग्वालियर नाट्य महोत्सव का समापन
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