Wednesday, April 15, 2026
Homeकला खबरें‘रंग-राख’ में मंच पर बच्चों का बॉलीवुड!

‘रंग-राख’ में मंच पर बच्चों का बॉलीवुड!

शकील अख़्तर, इंदौर स्टूडियो। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) दिल्ली के संडे क्लब चिल्ड्रन ड्रामा फेस्टिवल ‘कलरव 2026’ का समापन नाटक ‘रंग-राख’ की प्रस्तुति के साथ हुआ। यह नाटक संडे क्लब के तीसरे ग्रुप ‘ए’ के 15 से 19 वर्ष के युवा कलाकारों ने प्रस्तुत किया। मंच पर यह प्रस्तुति फ़िल्मी ज़रूर थी लेकिन इसमें ‘थियेटर’ कहीं भी कम नहीं था। ‘रील जनरेशन’ की यह प्रस्तुति इतनी प्रभावशाली रही कि दर्शकों को पता ही नहीं चला—दो घंटे कब बीत गए! इन दो घंटों में दर्शकों ने नये थियेटर की नई धमक सुनी, देखा कि ‘जवां धड़कनों’ का रंगमंच किस तरह से बदल रहा है!पहली बार 400 से अथिक बच्चे हुए शामिल: बता दें कि 5 जनवरी से 18 जनवरी तक चले इस फेस्टिवल में अलग-अलग आयु वर्ग के बच्चों ने कुल 16 नाटकों का मंचन किया और थियेटर इन एजुकेशन के इतिहास में पहली बार कोई 400 से ज़्यादा बच्चों ने हिस्सा लिया। एनएसडी के परिसर में बीते 14 दिनों में युवा भावना का उत्साह से भरा नज़ारा देखने को मिला, इस दौरान अभिभावकों ने अपने बच्चों को पहले से बेहतर बनते और उन्हें थियेटर के जादू में ढलते देखा। नाटक में नज़र आई बच्चों की तैयारी: समापन संध्या पर प्रस्तुत नाटक ‘रंग-राख’ की स्क्रिप्ट ‘टीन एज’ युवाओं या आज की जनरेशन की पसंद के अनुरूप थी। इसे युवा कलाकारों ने पूरे जोश के साथ तैयार भी किया। एक के बाद इस नाटक की दोनों प्रस्तुतियां कामयाब रही। संध्याकालीन प्रस्तुति के बाद राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के रजिस्ट्रार प्रदीप के. मोहंती ने कहा—“नाटक देखते वक्त लग रहा था कि जैसे मंच पर बॉलीवुड के मंजे हुए कलाकार काम कर रहे हैं! प्रस्तुति इतनी अच्छी थी कि एक पल के लिए भी नाटक से ध्यान हट नहीं सका।” उन्होंने सभी बाल कलाकारों को शुभकामनाओं के साथ बधाई दी और उन्हें ‘कलरव 2026’ में भागीदारी के प्रमाण पत्र भेंट किए।डबल कास्ट के दो अलग-अलग शो: नाटक के निर्देशक एवं थियेटर इन एजुकेशन (TIE) के चीफ़ रिकेन गोमले ने नाटक की डबल कास्ट की वजह साफ की। उन्होंने कहा—“हमारा ध्यान थियेटर की प्रोसेस पर होता है लेकिन कोशिश रहती है कि मंच पर अधिक से अधिक बच्चों को अभिनय का अवसर भी मिले। इसीलिए नाटक में ‘तराना’ और ‘आभास’ जैसी भूमिकाओं के लिए दो अलग-अलग कलाकारों को लिया गया, नाटक की दो प्रस्तुतियां दी गईं’। उन्होंने कहा- ‘अक्सर पैरेंट्स शिकायत करते हैं कि उनके बच्चों को रोल नहीं मिला लेकिन सभी को अवसर देना संभव भी नहीं है।”दर्शकों को पसंद आई नाटक की कहानी: ‘रंग-राख’ की सफलता का आधार इसकी संवेदनशील कहानी रही। इसे युवाओं के चहेते एक्टर-सिंगर, पीयूष मिश्रा ने लिखा है। शीर्षक है- ‘जब शहर हमारा सोता है’। इस पर पीयूष मिश्रा की अपनी स्क्रिप्ट है। उस कहानी और आडियाज़ के मूल भावों पर बच्चों के हिसाब इस नाटक का रूपांतरण छत्रपति सिंह ने किया है। यह कहानी आभास और तराना नामक दो प्रेमियों की है, जिनकी मुलाकात एक डांस पार्टी में होती है। दोनों को पहली नज़र में ही प्यार हो जाता है। दोनों जीवन साथ बिताना चाहते हैं, लेकिन उनके रास्ते में धर्म, समाज और हिंसा से भरा माहौल खड़ा है।हर तरह से निशाने पर ‘मासूम इश्क़’: दोनों का नाता- दो खूंखार गैंग से जुड़ा है, जो एक-दूसरे के दुश्मन हैं। वर्चस्व की लड़ाई में दोनों गैंग एक-दूसरे को मरने-मारने को तैयार हैं। ऐसे हालात में आभास और तराना का ‘मासूम इश्क़’ हर तरह से निशाने पर है। अंततः उनके प्यार की जीत होती है, लेकिन इसके लिए उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ती है। यही क़ीमत इस नाटक का संदेश है, जो दर्शकों के मन में गहरे सवाल छोड़ जाता है। प्रसंगवश, नाटक की कहानी शेक्सपियर के ‘रोमियो जूलियट’ और इस्माइल चुनारा लिखित नाटक ‘लैला मजनूं’ की याद दिलाती है। दोनों नाटक में अंतिम दृश्यों के संदर्भ अलग हैं लेकिन यहीं पर यह ध्यान आता है कि हर युग की अपनी प्रेम कहानी है और उसकी अपनी चुनौतियां भी।  गीत-संगीत ने प्रस्तुति में डाली जान: प्रस्तुति का एक प्रबल पक्ष संगीत रहा। पीयूष मिश्रा की लेखनी और प्रेमकथा ने संगीत की संभावना को जन्म दिया। रिन दाओ सैनरी के संगीत और गरिमा दिवाकर की आवाज़ ने इसे जीवंत बनाया। नरेंद्र कुमार ने आक्टोपैड पर संगत दी। इनके साथ ही सहयोगी निर्देशकों- पार्था प्रतिम हज़ारिका और साधना की भी ख़ासी सराहना हुई। निर्देशक रिकेन गोमले ने कहा-“संडे क्लब और कलरव का आयोजन आसान नहीं है। इसमें क्रियेटिव टीम के साथ, सभी का सहयोग महत्वपूर्ण है। यह एनएसडी के अधिकारियों, स्टाफ और थियेटर इन एजुकेशन (संस्कार रंग टोली) के सभी साथियों के सहयोग से ही संभव हो सका।”‘रंग-राख’ के निर्माण में इनकी भी भूमिका: प्रस्तुति में नलिनी जोशी, बामीदांग (कॉस्ट्यूम), पुन्यो नानकू ( प्रॉपर्टी मैनेजर), रजनीश मन्नी (सैट डिज़ाइनर), सरस कुमार (लाइट डिज़ाइनर), निर्मल भट्ट (प्रॉडक्शन मैनेजर), जतिन कुमार (मेक अप), शत्रुघ्न यादव (अटेंडेंट) के साथ ही थियेटर इन एजुकेशन टीम के साथियों में मुहम्मद राशिद, सुनील कुमार, रीना काला, दरमियां सिंह, शैलेंद्र कुमार, जयंत राभा की भूमिकाएं विशिष्ट रहीं।मंच पर इन कलाकारों ने निभाई भूमिका: नाटक के दोनों शोज़ में जिन कलाकारों ने काम किया उनके नाम हैं- कबीर डे, हमद अली ख़ान, इतिश्री देविका रस्तोगी, नियति गुप्ता, नबीहा ख़ान (Nabeeha), निखिल चावला, जगरित अग्रवाल, माही सैनी, अनिका यादव, विशाल गौतम, प्रकृति सिंह, मुहम्मद साजिद सैफ़ी, गुंजिता कपूर, अदम्य वाट्स, नील वासवानी, माही वाडिया, चारू सिंह, युवराज रोहित आर्या, गुंजन सिंह, महीन अबीर इब्न आसिफ़, इरमा आरा, युवराज सिंह चौहान। रंग-राख का नया शो भी जल्द:  नाटक में सभी कलाकारों का तालमेल और उनकी अभिनय ऊर्जा एक अच्छी बात रही। ज़्यादातर कलाकारों ने अपनी भूमिका को अपने चरित्र के अनुरूप जीवंत किया। उनके परफॉरमेंस को देखकर श्री मोहंती का ये कहना सही लगा कि इस नाटक के और भी शोज़ होना चाहिये। दोनों ही प्रस्तुतियों से जुड़े कार्यक्रम का बढ़िया संचालन आशीष आत्रेय ने किया। 16 ग्रुप्स वाले 400 बच्चों का कलरव: संडे क्लब के ‘कलरव 2026’ में तीन आयु वर्ग—8 से 11 वर्ष, 11 से 14 वर्ष और 15 से 19 वर्ष के 16 समूहों ने भाग लिया। इस बार 400 से अधिक बाल एवं किशोर कलाकार शामिल हुए, जो थियेटर इन एजुकेशन के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी संख्या है। बच्चे समर वर्कशॉप से लेकर अगस्त में शुरू होने वाले संडे क्लब और फिर 22 दिसंबर से 18 जनवरी तक चलने वाले प्रॉडक्शन वर्कशॉप में भाग लेते हैं। इस तरह वे राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के साथ थियेटर का यादगार सफर तय करते हैं।16 समूहों ने दी 16 प्रस्तुतियां: इस बार संडे क्लब के सभी 16 समूहों ने कुल 16 नाटकों की प्रस्तुतियां दीं। ये प्रस्तुतियां 5 जनवरी से 18 जनवरी 2026 तक राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय परिसर के सम्मुख और अभिमंच प्रेक्षागृहों में हुईं। सभी नाटक बच्चों की उम्र से जुड़े विषयों पर केंद्रित रहे। दर्शकों ने कई प्रस्तुतियों को विशेष रूप से पसंद किया।14 दिनों में प्रस्तुत नाटकों के नाम: 5 जनवरी से 18 जनवरी तक संडे क्लब के अलग-अलग आयु वर्ग के बच्चों ने जो नाटक प्रस्तुत किये हैं, उनके नाम हैं क्रमश: – ख़ज़ाने, ज़रूरी है, पीपल, जब जागो तब सवेरा, अंतरंगी-सतरंगी, मैं हूं भी और नहीं भी, रणभेदी, आउट ऑफ स्टॉक, ये रफ्तारें, इधर-उधर, जाना है उस पार, हुनर ही विनर है, द जर्नी टू ग्रेटनेस, प्रेमचंद की लड़कियां और रंग-राख।खेल-खेल में रंगकर्म और शिक्षा: आपको बता दें, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) के थियेटर इन एजुकेशन (TIE) प्रोग्राम की शुरूआत 16 अक्तूबर 1989 से हुई थी। तब से यह इकाई रंगमंच के माध्यम से शिक्षा और संस्कार का कार्य कर रही है। संडे क्लब के जरिये बच्चों को खेल-खेल में थियेटर की बुनियादी जानकारी दी जाती है। (समीक्षक शकील अख़्तर इंदौर स्टूडियो के संस्थापक संपादक हैं, 35 सालों से रंगमंच के साथ ही कला गतिविधियों पर निरंतर लेखन कर रहे हैं। कई कला महोत्सवों को कवर किया है। एक कविता संग्रह सहित 8 नाटकों का लेखन किया है। उनके लिखे दो बाल नाटकों के मंचन राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय दिल्ली में भी हुए हैं। आप इंडिया टीवी के सीनियर एडिटर रहे हैं। ) आगे पढ़िये – मुंबई में कैसा रहा ‘नाट्य रतन उत्सव’ https://indorestudio.com/natya-ratan-utsav-mumbai-2025/

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments

जावेद अहमद शाह ख़ान "अल-हिंदी" on रंगमंच की नई उड़ान…सौम्या व्यास