इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम। रंग त्रिवेणी साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समिति, भोपाल द्वारा जारी ऑननलाइन नाट्य आयोजन में सघन सोसायटी फाॅर कल्चरल एवं वेलफेयर द्वारा नाटक ’’मंत्र’‘ का प्रदर्शन किया गया। मुंशी प्रेमचंद लिखित इस नाटक का निर्देशन सुश्री रचना मिश्रा ने किया।
नाटक मंत्र में जात-पात का विरोध किया गया है। गांव में एक महात्मा पहुचते हैं जो व्याख्यान देते है और गांव में छूत-अछूत की भावना पर बात करते हैं। वे कहते हैं कि अछूतों को मांस मदिरा छोड देना चाहिए तभी हम पंडित उन्हें अपना सकेंगे। इस बात से गांव में सभी अछूत उनका विरोध करते हैं ओर उनकी सभा छोड कर चले जाते हैं। रात में महात्मा पर कुछ गुंडे हमला करते हैं घायल महात्मा को एक बूढा अछूत अपने घर ले जाता है और पूरे मन से सेवा करता है। महात्मा को जब होश आता है तो उसे अहसास होता है कि छूत-अछूत कुछ नहीं होता। कथा आगे बढती है गांव में प्लेग फैलता है जिसकी चपेट में बूढा अछूत भी आ जाता है जिसने महात्मा की सेवा की थी। जब गांव वाले यह सोच कर उसे मरने के लिए छोड जाते हैं कि इसको भगवान ने यह बीमारी दी है। तब महात्मा उस बूढे की सेवा कर उसे ठीक करते हैं। और उपदेश देते हैं कि संसार में प्रत्येक मनुष्य बराबर है। बस उसके कर्म पृथक-पृथक होते हैं मनुष्य को कर्म से पहचनना चाहिए न कि उसके जात से।

