कला प्रतिनिधि,इंदौर स्टुडियो। ग्वालियर के आईटीएम, सभागार में रविवार की शाम नाटक ‘नसीबाँवाली’ का मंचन हुआ। विभांशु वैभव द्वारा निर्देशित यह नाट्य कार्यशाला प्रस्तुति थी, इसमें कार्यशाला की समन्वयक अभिनेत्री गीताजंलि गीत (गिरवाल) सहित प्रतिभागी कलाकारों ने सराहनीय अभिनय किया। ख़ास बात यह भी है कि गीताजंलि ने नाटक का सह निर्देशन भी किया। ज़्यादातर कलाकारों की यह पहली प्रस्तुति थी, इस पहली प्रस्तुति के साथ नवोदित कलाकारों का रंगमंच पर शुभागमन हो गया। सर्वधर्म संगीत एवं कला महाविद्यालय और मेरा मंच सांस्कृतिक संस्था द्वारा संयुक्त रूप से नाट्य कार्यशाला शहर में एक महीने से जारी थी। राष्ट्रीय स्तर की एक आवासीय कार्यशाला थी। इसका नेतृत्व मुंबई से आये रंगकर्म के हस्ताक्षर विभांशु वैभव ने किया।
राजिंदर सिंह बेदी के उपन्यास पर आधारित नाटक :
नाटक राजिंदर सिंह बेदी के उपन्यास ‘एक चादर मैली सी’ पर आधारित था। कथा एक ऐसे परिवार की है जो आर्थिक रूप से कष्ट झेल रहा है। पति शराबी है जबकि घर में पत्नि का सम्मान नहीं है। पति की एक दिन हत्या हो जाती है। पति की मौत के बाद विधवा पत्नी को उसकी सास घर से निकाल देना चाहती है। गाँव की पंचायत अपनी आन-बान की वजह से विधवा का विवाह उसके देवर से करने के लिए मजबूर कर देती है। कहानी में उस समय एक बड़ा मोड़ आता है जब विधवा के पति का हत्यारा उसकी बेटी से शादी का प्रस्ताव रखता है।
स्त्री जीवन की विषमताओ की पड़ताल :
यह नाटक स्त्री जीवन की विषमताओं की पड़ताल करता है। ये नाटक स्त्री के जीवन की कठिनाईयों और उनके निजी संकट का जीवंत दस्तावेज है। नाटक की मुख्य पात्र रानो विपरीत परिस्थितियों में भी अपनों के भले के लिए अनचाहे फैसले लेने को तैयार होती है। ये नाटक स्त्री के मानसिक द्वंद , भावना और कर्तव्य के बीच हो रहे टकराव को बड़ी रोचकता और संवेनशीलता के साथ उजागर करता है। नाटक को रानो की बेटी के दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है, जिसमे एक बेटी अपनी भावनाओं से जूझती अपनी मां को परिभाषित करती है। बरसों पुराने लिखा गया उपन्यास आज भी समसामयिक है। आज वर्तमान में भी स्त्री की दशा और समस्या ज्यों की त्यों है। हमारी मान्यता, हमारी परंपरा में ऐसा क्यों है कि औरत कन्ही भी चली जाए, बिस्तर, रसोई, घर ज़रूर बदलेगा,लेकिन मर्द नहीं। औरत से जुड़े तमाम सवालों से ये नाटक रूबरू कराता है।
मंच पर भूमिका निभाने वाले कलाकार :
नाटक में गीताजंलि गीत (गिरवाल) ने रानो और शुभम सैनी ने मंगल की भूमिकायें निभाईं। साथ ही उनके साथ अन्य कलाकारों का भूमिका सहित परिचय इस प्रकार है। त्रिलोके – ज्ञान प्रकाश / बड़की – रिमझिम तेनगुरिया / जिन्दो – शर्मिला गुप्ते / हुजुरसिंग – अमितेश कुमार सिंह / चन्नो – शान्या यादव / सलामती – पूजा कुमारी / लाला,सरपंच – जितेंद्र सिंह तोमर / विजय – अभिषेक गोड़िया / चुन्नू / पंच – सुभाष विसारिया / मुराद, पंच,पुलिस – प्रियांशु यादव / बदरी,पंच, पुलिस – जतिन सांवले / तोतला – ज्ञान प्रकाश।
नाट्य संचालन से जुड़े सहयोगी,कलाकार:
नाटक में मंच का संचालन प्रशांत चव्हाण ने किया। संगीत संयोजन जुगल और प्रियांशु यादव का था। प्रकाश परिकल्पना जुगल और प्रियांशु यादव की रही। प्रकाश परिकल्पना संजय अरोरा और मंच परिकल्पना निर्देशक विभांशु वैभव की थी। सैट, प्रॉपर्टी, कॉस्ट्यूम प्रबंधन क्रमश: शर्मिला गुप्ते, ज्ञान प्रकाश, अभिषेक गोड़िया, पूजा कुमारी, रिमझिम तेनगुरिया, शान्य यादव, अनेरी पाटीदार, सुभाष विसारिया, शुभम सैनी, अमितेष सिंह, प्रियांशु यादव, जतिन सांवले और जितेंद्र सिंह तोमर ने किया। व्यवस्था टीम में कनिका श्रीवास्तव, सागर रजक, अनिकेत दुबे, पंकज शर्मा, दीप शाहू, जाह्नवी पाटीदार, कृष्ण गिरवाल, हिमांशी, मनीष शर्मा अखिलेश, प्रखर और अज़ीम की सम्मिलित भूमिका रही।
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