Wednesday, August 19, 2026
Homeकला खबरें'रंगोली' की प्रस्तुति के साथ राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय,दिल्ली में 'बाल संगम' शुरु

‘रंगोली’ की प्रस्तुति के साथ राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय,दिल्ली में ‘बाल संगम’ शुरु

इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम।  राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में 9 नवंबर से 11वें बाल संगम का शुभारंभ हो गया है। पारंपरिक लोककलाओं और लोक नाट्य के समारोह की शुरुआत राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के प्रांगण में हरे-भरे मैदान में हुई। बाल संगम के उद्घाटन समारोह को रंगमंच के जाने पहचाने निर्देशक और प्रोफेसर रामगोपाल बजाज, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के प्रभारी निदेशक प्रोफेसर सुरेश शर्मा, संस्कार रंग टोली ( टीआईए) के प्रमुख अब्दुल लतीफ खटाना ने अपनी मौजूदगी से सुशोभित किया। उद्घाटन समारोह के अवसर पर लोक कलाओं में पारंगत बाल कलाकारों ने रंगोली पेश की। निर्देशन कोरियोग्राफर भरत शर्मा ने किया।

बच्चों को जोड़ते हैं बाल संगम जैसे उत्सव : उद्घाटन के मौके पर प्रोफसर राम गोपाल बजाज ने कहा, “संबंधों और आपसी बातचीत के बिना कोई दुनिया नहीं है। बाल संगम जैसे फेस्टिवल  विभिन्न संस्कृतियों वाले बच्चों के बीच संबंध बनाने में सक्षम होते हैं। मजबूत संबंध और आपस में जुड़ाव मजबूत राष्ट्र का निर्माण करते हैं।”एकेडेमिक विभाग के डीन  प्रोफेसर (डॉक्टर) अभिलाष पिल्लई ने मुख्य अतिथि, बच्चों और दर्शकों को अपना कीमती समय निकालकर बाल संगम का हिस्सा बनने के लिए धन्यवाद दिया। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के प्रभारी निदेशक प्रोफेसर सुरेश शर्मा ने कहा, “मैं उन सभी लोगों को धन्यवाद देना चाहूंगा, जो अपना मूल्यवान समय निकालकर यहां आए और कार्यक्रम में भागीदारी निभा रहे बच्चों को सराहा व प्रोत्साहित किया। मैं सभी भागीदारों और महोत्सव में आए सभी दर्शकों का स्वागत करता हूं। हमें काफी गर्व है कि संस्कार रंग टोली (थियेटर इन एजुकेशन) बच्चों को अपने देश की संस्कृति, परंपरा और मूल्यों को समझाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय भविष्य में भी इस तरह की पहल करता रहेगा।”

बच्चों के जीवन में रंग घोलने की कोशिश : संस्कार रंग टोली के प्रमुख श्री अब्दुल लतीफ खटाना ने कहा, “थियेटर-इन-एजुकेशन पिछले तीन दशकों से लगातार देश भर में बच्चों की जिंदगी तक पहुंचने और उनके जीवन में रंग घोलने की कोशिश कर रहा है। पारंपरिक लोककलाओं और लोक नाट्य के प्रदर्शन के अलावा हम देश के विभिन्न भागों में बच्चों के लिए सक्रिय कार्यशालाएं आयोजित कर रहे हैं। यह समारोह बच्चों को कम उम्र में ही अनुभव और खुलकर भागीदारी करने का मौका देता है।जिससे बच्चे भविष्य में लोक, पारंपरिक लोक कलाओं और लोक नाट्य के क्षेत्र में निश्चित रूप से कुछ अलग हटकर करने के लिए प्रोत्साहित होंगे।”  आपको बता दें,बाल संगम ने उन प्रतिभाओं को मंच प्रदान किया है, जिन्हें कभी अपनी प्रतिभा के प्रदर्शन का मौका नहीं मिला । इन बच्चों की परफॉर्मेंस को कभी राष्ट्रीय स्तर पर नहीं देखा गया। लॉन्ग मैन, राजस्थानी कठपुतली, बहरुपिया और जादूगर महोत्सव का विशेष आकर्षण है। महोत्सव के दैरान कई कला और शिल्प से संबंधित कार्यशालाओं का आयोजन किया गया।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments

जावेद अहमद शाह ख़ान "अल-हिंदी" on रंगमंच की नई उड़ान…सौम्या व्यास