कलासंग-कलारंग में जुटे 26 चित्रकार, राष्ट्रीय कला पर्व का समापन
इंदौर स्टुडियो,सुभाष अरोरा। कलारंग-कलासंग के दो दिवसीय राष्ट्रीय कला पर्व का कल देर रात समापन हो गया। 5 एवं 6 मई को आयोजित हुए इस कला पर्व में 26 चित्रकार शामिल हुए। इन कलाकारों ने अपने रंगों से मूर्त एवं अमूर्तन चित्रों का ऐसा रचना संसार रचा, जिसकी सभी ने प्रशंसा की।
डॉ.अनुराधा दुबे ने की सभी कलाकारों की सराहना: समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ की डॉ.अनुराधा दुबे शामिल हुईं। वे स्वयं भी कत्थक नृत्य शैली में पारंगत हैं। उन्होंने भी कार्यक्रम के साथ ही शिरकत करने वाले सभी कलाकारों की प्रशंसा की। उन्होंने एक- एक कलाकार की पेटिंग का गम्भीरता से अवलोकन किया और परिचय भी प्राप्त किया। अपने उद्बोधन में डॉ.अनुराधा ने छत्तीसगढ़ की ‘राम वन गमन परिपथ परियोजना’ का उल्लेख किया। उन्होंने कलाकारों को बताया कि वे इस परियोजना की नोडल अधिकारी हैं। मैं चाहूँगी कि कलाकार वहाँ ऐसे कला शिविर के माध्यम से थीम बेस्ड पेटिंग बनाएं। उन्होंने आगे कहा कि कोरिया से लेकर सुकमा तक श्री राम के वन गमन से सम्बद्ध पवित्र स्थल हैं जिन्हें चिन्हित कर धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ श्री राम की ननिहाल थी और देश का एकमात्र माता कौशल्या मंदिर चंद्रखुरी में है। माना जाता है कि 14 वर्ष के वनवास में से 12 वर्ष श्री राम ने छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्र में व्यतीत किये थे।उल्लेखनीय है कि शिविर में इंदौर से पधारी कलाकार श्रीमती वंदिता श्रीवास्तव ने राम वन गमन पथ को अपनी कल्पनानुसार पेंट किया जो भरपूर सराहा गया,साथ ही ग्वालियर की वरिष्ठ कलाकार श्रीमती नीना खरे ने उन्हें ‘शबरी और श्री भगवान राम की मतंग ॠषि के आश्रम में भेंट’ पर बनाई अपनी पेटिंग डा.अनुराधा दुबे को भेंट की।
सृजनात्मकता की विधाता से तुलना: समापन कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि सेवानिवृत्त नेवल अधिकारी श्री नरेंद्र सिंह यादव ने अपने उद्बोधन में कलाकारों की सृजनात्मकता की तुलना ईश्वर से करते हुए कला पर्व में मिले आनंद का उल्लेख किया और कलाकारों को भरपूर साधुवाद दिया। इस अवसर पर अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कलाकार श्री प्रकाश सक्सेना (बत्ती) ने छत्तीसगढ़ व मध्य प्रदेश के कलाकारों के संयुक्त शिविर आयोजित करने का सुझाव दिया।आज दिन में छत्तीसगढ़ पर्यटन विभाग के प्रबंध संचालक श्री अनिल कुमार साहू ने आकर कलाकारों की पेटिंग का अवलोकन किया और बधाई दी। शाम को ग्वालियर की पूर्व महापौर श्रीमती समीक्षा गुप्ता, अटल बिहारी बाजपेई डिजिटल म्यूजियम गोरखी के सी ई ओ श्री मनोज शर्मा,सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी श्री प्रभात रंजन उपाध्याय , प्रख्यात लेखक एवं स्त्री विमर्श के कवि श्री पवन करन ,वयोवृद्ध कलाकार श्री के पी श्रीवास्तव , मूर्तिकार श्री चंद्र सेन जाधव सहित कलारसिकों एवं गण मान्य नागरिकों ने आकर कलाकारों का भरपूर उत्साहवर्धन किया।
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कार्यक्रम के अंत में कलारंग-कलासंग के अध्यक्ष एवं गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड होल्डर हरिकृष्ण कदम ने सभी आमंत्रितों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन कलागुरू और अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कलाकार श्री बृजमोहन आर्य ने किया। इस कला पर्व में श्रीमती वंदिता श्रीवास्तव इंदौर, श्री आदित्य सिंह राजपूत जबलपुर, श्री प्रमोद गायकवाड़ भोपाल, श्री पंकज सरोज दिल्ली एवं ग्वालियर से सर्वश्री प्रकाश सक्सेना, बलवंत भदौरिया, अनूप शिवहरे, आलोक शर्मा, गिरिराज गुप्ता, श्रीमती नीना खरे, श्रीमती सुनीता प्रजापति, श्री बृजमोहन आर्य, उमा मीना, दिनेश जाटव, डॉ. संजय धवले, हरीकृष्ण कदम, उपेन्द्र वर्मा, मनीष चंदेरिया, सुश्री अल्पना ठाकुर, शहंशाह मित्तल, मुनि शर्मा एवं श्रीमती तापाजनी साहा व श्रीमती राजबाला अरोड़ा सहित अन्य कलाकार शामिल थे। ( समीक्षक श्री सुभाष अरोरा ग्वालियर के ख्यात मूर्तिकार हैं।)