अच्छा गायक बनने के लिए रियाज़ बेहद ज़रूरी-उषा तिमोथी

0
26

प्रवीण कुमार खारीवाल, इंदौर स्टूडियो। ‘अच्छा गायक बनने के लिए रियाज़ के सिवा कोई रास्ता नहीं है। देश के नामी गायकों ने अपनी गायकी को उम्दा बनाये रखने के लिये ताउम्र रियाज़ की है। बॉलीवुड की वरिष्ठ पार्श्व गायिका उषा तिमोथी ने यह बात कही। वे स्टेट प्रेस क्लब, मध्य प्रदेश के ‘रूबरू’ कार्यक्रम में मीडिया कर्मियों से चर्चा कर रही थी। उन्होंने ये भी कहा कि ‘नई पीढ़ी के गायकों को यह बात गहराई से समझने की ज़रूरत है, हालांकि आजकल गायक रातों-रात फेमस होना चाहते हैं’।  कल्याण जी-आनंद जी की खोज: आपको बता दें, नागपुर में जन्मी उषा जी को संगीतकार जोड़ी कल्याणजी-आनंदजी ने खोजा था। उन्होंने 13 साल की उम्र में 1965 की फ़िल्म ‘हिमालय की गोद में’ मोहम्मद रफ़ी के साथ अपना पहला हिट गीत तू रात खड़ी थी छत पे” गाया। इससे पहले वे 1962 की फ़िल्म ‘दुर्गा पूजा’ में एक संस्कृत श्लोक गा चुकी थीं। कई भाषाओं में 5 हज़ार गीत गाये: उषा जी ने हिंदी, पंजाबी, मलयालम, भोजपुरी और मराठी सहित कई भारतीय भाषाओं में 5,000 से अधिक गाने गाए हैं। मोहम्मद रफ़ी, मुकेश और तलत महमूद जैसे गायकों के साथ 18 से अधिक विश्व दौरे किए हैं। ये अनुभवी गायिका 1965 से सक्रिय हैं। पुराने गायक भावों को समझकर गाते थे: उषा जी कहा कि पुराने दौर के गायक गीत-ग़ज़लों के भावों को अपनी आवाज़ में उतार लेते थे। यह भी ध्यान रखते थे कि वह गीत किस कलाकार पर फिल्माया जा रहा है। पुराने गीतों की उम्र इसीलिए अधिक रहती थी क्योंकि गायक उसमें अपना सर्वस्व लगा देते थे।रफी साहब के साथ कई कार्यक्रम: सुश्री तिमोथी ने गायक मोहम्मद रफी के साथ देश-विदेश में सैकड़ों कार्यक्रम प्रस्तुत किए हैं। उन्होंने रफी साहब को सदी का महान गायक बताया और कहा कि वह रिकॉर्डिंग हो या लाइव कार्यक्रम पूरी शिद्दत से गीत पेश करते थे। उन्होंने बताया कि ऐसा कई मर्तबा ऐसा हुआ जब संगीतकार ने एक-दो बार में ही गाने की रिकॉर्डिंग को ओके कर दिया, लेकिन रफी साहब ने गाकर ही ओके करवाया। उन्होंने फख्र से बताया कि वह उनके सिर पर आज भी रफी साहब का हाथ महसूस करती हैं क्योंकि उन्होंने सदा बेटी का दर्जा दिया।गायक-गायिकाओं के साथ भेदभाव: सुश्री तिमोथी ने स्वीकार की एक दौर में कतिपय गायिकाओं और संगीतकारों ने गायक-गायिकाओं के साथ भेदभाव किया। इस मामले में वह ज़्यादा नहीं बोलेंगे क्योंकि ऐसा करने वालों का भी गायकी के क्षेत्र में अविस्मरणीय योगदान तो रहा है। इंदौर में वर्कशॉप की ख़्वाहिश: उन्होंने कहा कि उनकी तमन्ना है कि वे नई पीढ़ी के गायकों को गीतों की बारीकियां सिखाएं। उन्होंने इंदौर में भी युवा कलाकारों के लिए कार्यशाला लगाने की इच्छा जताई। उन्होंने उस्ताद आमिर खाँ, लता मंगेशकर, किशोर कुमार का जिक्र करते हुए इंदौर की सरजमीं को प्रणाम किया।परिवार शास्त्रीय गायन और वादन से जुड़ा रहा: सुश्री तिमोथी ने बताया कि नागपुर में उनका परिवार शास्त्रीय गायन और वादन से जुड़ा रहा। उनके पिताजी दीनानाथ जी मंगेशकर के साथ हारमोनियम और बाद में उनके बड़े भाई तबला और वायलिन बजाते थे। उन्होंने बचपन में गणपति उत्सव से गायन की शुरुआत की और 7 साल की उम्र में नागपुर में मोहम्मद रफी, मुकेश, हेमंत और मन्नाडे के साथ फिल्मी गीत प्रस्तुत किया।स्टेट प्रेस क्लब में स्वागत-सत्कार: प्रारंभ में सुश्री तिमोथी का स्वागत रचना जौहरी, संजीव गवते एवं सीमा माहेश्वरी के साथ ही इस रिपोर्ट के लेखक ने भी किया। स्मृति चिन्ह अभिनय कला समाज के प्रधानमंत्री सत्यकाम शास्त्री ने एवं कैरीकेचर गोविंद लाहोटी कुमार ने भेंट किया। आभार दीपक माहेश्वरी ने व्यक्त किया। आगे पढ़िये – AI के दौर मैं Voice Actor का क्या होगा? https://indorestudio.com/ai-and-voice-artist/

LEAVE A REPLY