- जयति चक्रवर्ती के गायन की सुमधुर स्वर लहरियों ने बाँधा समां
- सुखन सूफियाना बैंड ने भी बिखेरे सुर
- बरेलाल के बैंड ने सुनाए पुराने नगमे
भोपाल। सोखी भाएनो कहा रे बोले, सोखि जानो ना कहा रे बोले… जब ख्यातिलब्ध रवींद्र संगीत की गायिका जयति चक्रवर्ती ने इस गीत की तान छेड़ी तो श्रोताओं के मन में आनन्द के भाव हिलोरे लेने लगे। उन्होंने एक के बाद एक सुमधुर रवींद्र संगीत की यादगार प्रस्तुतियाँ दीं। संगीत की सुमधुर स्वर लहरियों पर श्रोता देर तक मंत्रमुग्ध होते रहे। सोखी भाएनो कहा रे बोले, सोखि जानो ना कहा रे बोले… और शेरिन दूजो ना फूले छीना बोने, फूलों डोरों बाँधा भूलो ना… जैसे गीतों को श्रोताओं से खूब दाद मिली।
यह सांस्कृतिक आयोजन पुस्तक यात्रा के समापन अवसर पर भोपाल में हुआ। अंतरराष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव के अंतर्गत देश के पाँच स्थानों भोपाल, खंडवा, बिलासपुर, हजारीबाग और वैशाली से प्रारंभ हुई पुस्तक यात्राएँ सैकड़ों शहर, कस्बों और गाँवो से पुस्तक संस्कृति से जन-जन को जोड़ने की मुहिम में अपने गन्तव्य तक पहुँची। पुस्तक यात्रा का समापन भोपाल के रवीन्द्र भवन में हुआ। यहाँ युवा उत्सव के शुभारम्भ के साथ पुस्तक यात्रा का स्वागत किया गया।

इस आयोजन की अगली कड़ी में नरसिंहगढ़ के बरेलाल म्यूजिकल बैंड ने उपशास्त्रीय संगीत पर आधारित पुराने फ़िल्मी गीतों की लाजवाब प्रस्तुति दी। इन कर्णप्रिय गीतों ने श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। शाम को सुखन सूफियाना बैंड की प्रस्तुति से श्रोताओं के लिए यह कभी न भूलने वाली शाम साबित हुई. अपनी लाजवाब प्रस्तुतियों से बैंड ने समां बाँध दिया।
इस अवसर पर वरिष्ठ कथाकार-कवि तथा रबींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति संतोष चौबे ने विश्व रंग अंतर्राष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव और पुस्तक यात्रा पर सविस्तार अपनी बात रखी। कार्यक्रम का सञ्चालन बद्र वास्ती ने किया।


