कला प्रतिनिधि,इंदौर स्टुडियो। रंगमंच को आज सबसे बड़ी ज़रूरत नये विषयों की हैं। ऐसे विषय जो आज के हालात और परिवेश को मंच पर जीवंत करते हों, उनके माध्यम से दर्शकों को नया संदेश देते हों। इंदौर के अभिनव कला समाज के नव-संयोजित मंच पर नाट्य समूह ‘पथिक’ ने ऐसी ही रोचक और उद्देश्यपूर्ण प्रस्तुति दी। सतीश श्रोत्री निर्देशित इस नाटक का नाम है ‘रिश्तों का लाइव टेलिकास्ट’। इस प्रस्तुति ने बार-बार दोहराये जाने वाले पुराने नाटकों के बीच एक नई ताज़गी का अहसास कराया। कथ्य के चुनाव की दृष्टि से रंगमंच को एक नई दिशा दी।

नाटक का विषय आज घर-घर की कहानी है। आज मध्यम वर्गीय परिवारों के घर का पता तो एक है। परंतु घर के अंदर सब अपने-अपने कमरों में बंद अपनी ऑनलाइन दुनिया में व्यस्त हैं। घर में संवादहीनता की स्थिति है। घर की परिस्थियों से अलग सबके अपने सपनों की दुनिया है। यही सबकुछ नाटक के कथानक का विषय है। परिवार में बेटा राहुल एक एक्टर बनना चाहता है। वो अपना पोर्टफोलियो बनवाने के लिये पिता से 50 हज़ार की मांग करता है। परंतु मध्यम वर्गीय पिता के लिये यह संभव नहीं होता। बेटे को एक रियेलिटी गेम शो ‘रिश्तों का लाइव टेलिकास्ट’ में शामिल होने का अवसर मिल जाता है। शो में भाग लेने वाले प्रतियोगी और उसके परिवार के लिये 50 लाख मिलने वाले होते हैं। जबकि जीतने पर 1 करोड़ का इनाम घोषित किया जाता है। शो के नियमानुसार पूरे परिवार को गेम में शामिल होना पड़ता है।
परंतु गेम में इसके एक किरदार गॉड फादर की वजह से रोचक बदलाव आते हैं। इस कार्यक्रम में सभी की भूमिकायें बदल जाती हैं और परिवार में सभी को अपनी कमियों का अहसास होता है। ऐसा गेम में भूमिकायें बदलने की वजह से होता है। आख़िर परिवार में आपसी संवाद के तार जुड़ जाते हैं। सभी को अपने दायित्व का बोध होता है। परिजन 1 करोड़ की इनामी राशि पाने की जगह परिवार को ही महत्व देते हैं। यही नाटक का सुखद अंत होता है। नाटक की प्रस्तुति मंच पर प्रभावशाली रही। संजय पांडे, शुभदा केकरे,राहुल प्रजापति,वेदांगी सिन्नरकर,गौतम मालवीय,रोशनी दिपके,अनिल धाकताड़,मिलिंद शर्मा,सागर शेंडे ने अपनी-अपनी भूमिकाएं बेहतर तरीके से प्रस्तुत की। दर्शकों को प्रभावित किया। नाटक में प्रकाश योजना अविनाश शिवनकर,संगीत प्रणित केकरे,वेशभूषा स्वाति श्रोत्री,रंगमंच व्यवस्था राहुल दिपके,राजकुमारी सोनी और प्रकाश अग्निहोत्री की रही। वरिष्ठ रंग निर्देशक सतीश श्रोत्री की यह लॉक डाउन के बाद इंदौर में एक नई आशा जगाने वाली प्रस्तुति भी रही।

