मुंबई से संजय भिसे और हृदयेश मयंक, इंदौर स्टूडियो। महान बांग्ला फिल्मकार ऋत्विक घटक को मुंबई में एक साहित्यिक और वैचारिक आयोजन में गहराई से याद किया गया। मौका था मीरा रोड स्थित इंदिरा गाँधी अस्पताल के विरूंगला केंद्र में उनके सिनेमाई योगदान पर केंद्रित पुस्तक के विमोचन और परिचर्चा का। जनवादी लेखक संघ और स्वर संगम फाउंडेशन ने यह आयोजन संयुक्त रूप से किया।
आयोजन में साहित्य और सिनेमा जगत की हस्तियों ने ऋत्विक घटक के सिनेमा को दिये योगदान की प्रशंसा की। उनके सिनेमा के अनूठे व्याकरण पर गहन मंथन किया। कहा, भारतीय ऋत्विक घटक ने सिनेमा को मनोरंजन के सांचे से निकालकर उसे यथार्थ, विस्थापन की पीड़ा और सामाजिक चेतना का धारदार हथियार बनाया। सिनेमा को दिये उनके अवदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
कार्यक्रम में ‘अनारकली ऑफ आरा’ के निर्देशक अविनाश दास ने ऋत्विक घटक के सिनेमा को ‘सबसे ज़्यादा ओरिजिनल’ करार दिया। उन्होंने कहा, “घटक ने सिनेमा का पूरा व्याकरण खुद खड़ा किया। एक फिल्म डायरेक्टर का जन्म ही अपमानित होने के लिए होता है, ऐसे में अपनी शर्तों पर सिनेमा बनाना घटक की एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।” वहीं, प्रमुख वक्ता पुलक चक्रवर्ती ने घटक के मार्क्सवादी रुझान और ‘इप्टा’ (IPTA) से उनके जुड़ाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि घटक का मानना था कि कला को हमेशा जनता की पीड़ा और आकांक्षाओं को व्यक्त करना चाहिए।
मुंबई विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर डॉ. हूबनाथ पांडे ने सिनेमा को समझने की कला पर ज़ोर दिया। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि मीरा रोड में एक ‘फिल्म सोसाइटी’ की शुरुआत की जानी चाहिए और वे अपने 10 हज़ार फिल्मों के संकलन में से हर महीने कमसेकम एक फिल्म दिखाने को तैयार हैं। इस प्रस्ताव का स्वागत करते हुए स्वर संगम फाउंडेशन के चेयरमैन हृदयेश मयंक ने जल्द ही एक कमेटी बनाकर, इस दिशा में कदम उठाने का आश्वासन दिया।
साहित्यकार से फिल्मकार बनने का सफर: कार्यक्रम के दौरान ज़ाहिद खान और जयनारायण प्रसाद द्वारा संपादित पुस्तक ‘ऋत्विक घटक: नव यथार्थवाद सिनेमा का कलात्मक सर्जक’ का विमोचन हुआ। इस अवसर पर ज़ाहिद खान द्वारा अनूदित कृष्ण चंदर के उर्दू नाटक ‘दरवाजा खोल दो’ के हिंदी अनुवाद का भी लोकार्पण हुआ। ज़ाहिद खान ने कहा कि ऋत्विक घटक मूल रूप से नाटककार थे, जो अपनी बात अधिक दर्शकों तक पहुँचाने के लिए सिनेमा की ओर मुड़े।
‘जलेस’ के केंद्रीय कमेटी सदस्य संजय भिसे ने कहा कि घटक ने सिनेमा को इतिहास, राजनीति और मानवीय संवेदना का माध्यम बनाया। कलकत्ता से विशेष रूप से आए जयनारायण प्रसाद ने सत्यजीत राय, मृणाल सेन और ऋत्विक घटक की ‘त्रयी’ पर विस्तार से बात की और ‘मेघे ढाका तारा’ को विभाजन की त्रासदी का अद्भुत दस्तावेज़ बताया।
कार्यक्रम में रंगमंच अभिनेता अजय रोहिल्ला ने महान फ़िल्मकार के सशक्त ‘विज़ुअल सेंस’ की तारीफ की, जबकि सिने पत्रकार हरि मृदुल और फरीद ख़ान ने उन्हें एक बड़ा कथाकार और यथार्थवादी सिनेमा का महत्वपूर्ण हस्ताक्षर बताया। मंच संचालन रमन मिश्र ने किया और आभार हरिप्रसाद राय ने व्यक्त किया। आगे पढ़िये – युद्ध और नफ़रत के ख़िलाफ़ जन-प्रतिबद्ध कला का विरोध –https://indorestudio.com/ipta-madhya-pradesh-anuppur-conference-detailed-report/
ऋत्विक घटक पर पुस्तक विमोचन: महान सिनेकार के अवदान की याद
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