Tuesday, June 16, 2026
Homeकला खबरेंदीपिका पादुकोण मेरी टीचर, मैं उनसे सीखता हूँ: रणवीर सिंह

दीपिका पादुकोण मेरी टीचर, मैं उनसे सीखता हूँ: रणवीर सिंह

Getting your Trinity Audio player ready...

 जेद्दा (सऊदी अरब) से अजित राय की विशेष रिपोर्ट। ‘मेरी पत्नी दीपिका पादुकोण मेरी टीचर है। वह मुझसे बड़ी कलाकार हैं, मैं उनसे अभिनय की बारीकियां सीखता हूं। घर में वह अपना स्टारडम नहीं लाती। मैं भाग्यशाली हूं कि मुझे उन जैसी पत्नी मिलीं’। तीसरे रेड सी इंटरनेशनल फिल्म समारोह (Red Sea International Film Festival) में यह बात रणवीर सिंह (Ranveer Singh) ने कही। समारोह की शुरूआती संवाद में वे अपने विचार व्यक्त कर रहे थे।रणवीर सिंह एक ऑलराउंडर कलाकार: उद्घाटन समारोह में रणवीर सिंह को फिल्मों में उनके योगदान के लिये सम्मानित किया गया। उन्हें हॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री शैरोन स्टोन और फेस्टिवल प्रमुख मोहम्मद अल तुर्की ने सम्मानित किया। शैरोन स्टोन ने उनके बारे में लिखित वक्तव्य पढ़ा। उन्होंने कहा – ‘रणबीर एक ऐसे आलराउंडर कलाकार है जिन्होंने अपने अभिनय से सिनेमा में नये-नये प्रयोग किए हैं’।मैं बचपन से इंटरटेनर, दर्शक मोटिवेटर: संवाद कार्यक्रम में रणवीर सिंह ने खुलकर अपने दिल की बातें कहीं। उन्होंने कहा, मैं बचपन से ही एंटरटेनर रहा हूं और दर्शक ही मेरे मोटिवेटर है। मैं अपनी फिल्मों से दुःखों से भरी दुनिया में लोगों को खुशी बांटता हूं’। रणबीर ने कहा, एक फिल्म के हिट या फ्लॉप होने से कोई फर्क नहीं पड़ता। मसलन जब मनीष शर्मा की फिल्म ‘बैंड बाजा बारात’ (2010) रिलीज हुई, तब इसके हिट होने के साथ मैं रातों-रात मैं स्टार बन चुका था। मुझे लगने लगा था कि मुझसे ज़्यादा अभिनय के बारे में और कोई नहीं जानता। पर जल्दी ही मेरा भ्रम टूट गया। अपने से सीनियर अभिनेताओं से मिलकर मुझे महसूस हुआ कि मैं अभी कुछ भी नहीं जानता’। कपिल देव की भूमिका ने दी ख़ुशी: रणबीर ने कहा- ‘मुझे नाम और शोहरत तो खूब मिली। परंतु जो ख़ुशी कबीर खान की ’83’ में कपिल देव की भूमिका निभा कर मिली वह अभी तक याद है। ’83’ रेड सी के इसी फिल्म समारोह के पहले साल की क्लोजिंग फिल्म थी। उस वक्त मुझे कपिल देव के साथ रेड कारपेट पर चलने का मौका मिला था। तब मिली ख़ुशी के उस अहसास को मैं आज तक भूल नहीं सका हूँ। यह अकेली ऐसी फिल्म है जिसे मैंने कई बार देखा और बार-बार देखता हूं। इस फिल्म के लिये मैं कबीर ख़ान का शुक्रिया अदा करता हूँ’। मेरी नज़र में एक्टिंग ‘सेल्फ एक्सप्लोरेशन’: मुझे लगता है कि एक्टिंग अपने भीतर की एक खोज है -‘सेल्फ एक्सप्लोरेशन’। जब सालों बाद मैं अपनी पुरानी फिल्मों को देखता हूं तो मैं खुद को ही नहीं पहचान पाता। मैं समझता हूं कि यहीं मेरी विक्ट्री है। चाहे ‘लूटेरा’  हो या ‘रामलीला’, ‘दिल धड़कने दो’ हो या ‘गली बाय’, ‘बाजीराव मस्तानी’ हो या ‘पद्मावत’ या फिर रोहित शेट्टी की ‘सिंबा। ‘उन्होंने कहा कि सिंबा वापस आ रहा है। अभी-अभी रोहित शेट्टी की फिल्म ‘सिंघम 3’ की शूटिंग करके लौटा हूं। अजय देवगन और रोहित शेट्टी के साथ शूटिंग में इम्प्रोवाइज डायलॉग का मजा ही कुछ और है। रोहित शेट्टी अलग किस्म के डायरेक्टर हैं।रंधावा के चरित्र को ख़ूब प्यार मिला: करण जौहर की फिल्म ‘राकी और रानी की प्रेम कहानी’ में राकी रंधावा की भूमिका पर रणबीर ने कहा कि इस चरित्र को लोगों ने खूब प्यार दिया। उन्होंने कहा कि फिल्म के रिलीज के दूसरे हफ्ते में रात 11 बजे का शो देखने मैं मुंबई के एक थियेटर में गया। मैं चुपचाप दर्शकों के साथ अंधेरे कोने में बैठ गया। फिल्म के हर महत्वपूर्ण दृश्य पर दर्शकों की प्रतिक्रियाएं देखकर मैं हैरान रह गया। मेरे बगल की सीट पर एक जवान लड़की अपनी मां के साथ फिल्म देख रही थी। मैंने देखा वे कई दृश्यों पर रो रहीं थीं, दोनों मां-बेटी एक-दूसरे के आंसू पोंछ रही थी। यहीं हमारे भारतीय सिनेमा की ताकत है। यह फीलिंग हमें एक-दूसरे से जोड़कर रखती है। संजय लीला भंसाली का मैं शुक्रगुज़ार : अपने निर्देशकों के बारे में बात करते हुए कहा रणवीर ने कहा, मैं सबसे ज़्यादा संजय लीला भंसाली का शुक्रगुजार हैं। उनकी फिल्म ‘रामलीला ‘ के दौरान ही पहली बार दीपिका पादुकोण से उनकी मुलाकात हुई थी और बाद में प्यार और शादी हुई। उन्होंने कहा कि संजय लीला भंसाली ने सबसे पहले तो उन्हें निराकार (ब्लैंक) और फार्मलेस बनाया। जो कुछ मेरे अंदर था उसे खाली किया गया। मैं कोरी स्लेट की तरह, एक गीली मिट्टी की तरह हो गया। फिर उन्होंने मुझमें चरित्र गढ़े। उन्होंने अभिनय के अनंत आसमान में मेरी रचनात्मकता को विस्तार दिया।एक कलाकार के रूप में हंसाना मेरा काम: रणवीर ने कहा -‘ हमारी दुनिया में अधिकतर लोग दुखी है, परेशान हैं। एक कलाकार के रूप में मेरा काम है कि उन्हें दुःख से हटाकर हंसी की ओर लाना। उन्हें अपनी कला दिखाकर खुशी देना मेरा काम है। यदि आप लोगों के दिल का बोझ हल्का करेंगे तो दुआएं कमाओगे। मैं यहीं कर रहा हूं’। (अजित राय प्रख्यात कला और फिल्म समीक्षक हैं। दुनिया के प्रमुख फिल्म उत्सवों की हिन्दी में रिपोर्ट्स के वे अग्रणी पत्रकार हैं।) आगे पढ़िये –

‘डीप राइज़िंग’ और ‘प्लेस्टोनिक पार्क’ को ALT EFF का पुरस्कार

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments

जावेद अहमद शाह ख़ान "अल-हिंदी" on रंगमंच की नई उड़ान…सौम्या व्यास