रस्किन बॉन्ड साहित्य अकादेमी की महत्तर सदस्यता से सम्मानित

0
20

कला प्रतिनिधि, इंदौर स्टूडियो। साहित्य अकादेमी का सर्वोच्च महत्तर सदस्यता का सम्मान मशहूर अंग्रेज़ी लेखक रस्किन बॉन्ड को प्रदान की गई है। उनकी अस्वस्थता के कारण यह सम्मान उनके मसूरी स्थित निवास पर प्रदान किया गया। इसे विद्वान लेखक को साहित्य अकादेमी के अध्यक्ष माधव कौशिक और साहित्य अकादेमी के सचिव के. श्रीनिवासराव ने प्रदान किया। इस अवसर पर उनके पुत्र भी उपस्थित थे। 50 सालों से लेखन में सक्रिय: रस्किन बॉन्ड का जन्म हिमाचल प्रदेश के कसौली में 9 मई 1934 को हुआ था। वे पिछले 50 वर्षों से लेखन की दुनिया में सक्रिय हैं। आपने साहित्य की विभिन्न विधाओं में लिखा है। आपकी आरंभिक कथा कृतियों में कहानी संग्रह तथा उपन्यास के साथ-साथ कुछ आत्मकथात्मक कृतियां भी शामिल हैं। बाद में आपने कथेतर, रोमांस तथा बाल पुस्तकों की रचना भी की। आपकी प्रिय विधाएँ निबंध तथा कहानी हैं। रस्किन बॉन्ड की विशिष्ट कृतियां: आपकी उल्लेखनीय कृतियों में, वैग्रन्ट्स इन द वैली, वन्स अपॉन ए मानसून टाइम, एंग्री रिवर, स्ट्रेंजर्स इन द नाइट, ऑल रोड्स लीड टू गंगा, टेल्स ऑफ़ फ़ोस्टरगंज, लेपर्ड ऑन द माउंटेन तथा टू मच ट्रबल शामिल हैं। 1978 की हिंदी फ़िल्म ‘जुनून’ श्री रस्किन के उपन्यास ‘ए फ्लाइट ऑफ़ पिजन्स’ (1857 के भारतीय विद्रोह) पर आधारित है। आपकी कहानियों पर टीवी धारावाहिक ‘एक था रस्टी’ के नाम से दूरदर्शन पर प्रसारित किया गया।विद्यालीन पाठ्यक्रम में कहानियां: आपकी कई कहानियों ‘द नाइट ट्रेन ऐट देओली’, ‘टाइम स्टॉप्स ऐट शामली’ तथा ‘अवर ट्रीज़ स्टिल ग्रो इन देहरा’ को भारत के विद्यालयीन पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। 2005 में, आपके लोकप्रिय बाल उपन्यास ‘द ब्लू अम्ब्रेला’ पर फ़िल्म बनाई गई। आपने 2011 में विशाल भारद्वाज द्वारा निर्देशित फ़िल्म  ‘सात खून माफ़’ में एक छोटी भूमिका की थी, जो आपकी कहानी ‘सुसन्नाज़ सेवन हसबैंड’ पर आधारित है। मिले कृतियों को विशिष्ट पुरस्कार: आपके कहानी-संग्रह ‘अवर ट्रीज़ स्टिल ग्रो इन देहरा’ के लिए आपको 1992 में साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। आपको भारत सरकार द्वारा 1999 में पद्मश्री तथा 2019 में पद्म भूषण, साहित्य अकादेमी द्वारा बाल साहित्य पुरस्कार (2012 में) से भी सम्मानित किया गया है। https://indorestudio.com/

LEAVE A REPLY