कला प्रतिनिधि, इंदौर स्टूडियो। स्थानीय अभिनव कला समाज में सदाबहार गीतों और ग़ज़लों के कार्यक्रम ने समां बांध दिया। कार्यक्रम में 1985 के पहले के तरानों की मनभावन प्रस्तुति दी गई। संगीत रसिकों ने इस सुरीले कार्यक्रम का जमकर आनंद लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ अभिनव कला समाज के अध्यक्ष प्रवीण कुमार खारीवाल और समस्त गायकों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। संचालन जितेन्द्र सिंह भाटिया ने किया।
सुनहरे दौर के यादगार गीत से शुरूआत: शुरूआत यादगार गीत -‘सुबह ना आई, शाम ना आई’ से की गई। सतीश दुबे ने इस गीत को लाजवाब अंदाज़ में प्रस्तुत किया। उनके इस गीत पर श्रोताओं ने जमकर तालियां बजाई। गीत को सुनते हुए संगीत प्रेमी, पुराने दिनों की यादों में खो गए। कार्यक्रम में राजेन्द्र केकरे, मंगला जैन, जितेंद्र सिंह भाटिया, वंदना अग्रवाल ने भी मनभावन गीत प्रस्तुत किये। चुनिंदा नग़मों से सजी शाम को सुनहरे संगीत के दौर में पहुँचा दिया। कार्यक्रम में कोई 25 गीतों और गज़लों को गायकों ने आवाज़ दी। श्रोता अंत तक कुर्सियों पर जमे रहे और हर प्रस्तुति का डूबकर आनंद लेते रहे। कार्यक्रम में बहादुरशाह जफर की लिखी ग़ज़ल ‘मैं अपने आप से घबरा गया हूं’ को गाकर सतीश दुबे ने समा बांध दिया। आगे पढ़िये –https://indorestudio.com/lapata-ladeis-me-dulhano-ki-adla-badli


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