Wednesday, April 15, 2026
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‘मिस्ट्री गर्ल’ यादों से महकी शाम: ‘स्वर-निनाद’ ने सजाई सुरों की महफ़िल

कला प्रतिनिधि, इंदौर स्टूडियो। हिंदी सिनेमा की अभिनेत्री साधना का नाम आते ही आँखों के सामने एक रूहानी चेहरा और उनकी वो मशहूर ‘साधना कट’ हेयरस्टाइल आ जाती है, जिसने एक दौर में लाखों दिलों को अपना दीवाना बना दिया था। ‘वो कौन थी’, ‘मेरा साया’ और ‘अनीता’ जैसी फिल्मों में अपनी रहस्यमयी मुस्कान से ‘मिस्ट्री गर्ल’ कहलाने वाली साधना की फिल्मों पर आधारित एक यादगार संध्या का आयोजन इंदौर के प्रीतमलाल दुआ सभागार  किया गया।A photograph from an event in Indore featuring actress Sadhana Shivdasani, based on film music. A report by Indore Studio.संस्था ‘स्वर-निनाद’ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का शीर्षक था“आजा आई बाहर”। इस शाम साधना जी के अभिनय से सजे उन सुपरहिट गीतों को पुनर्जीवित किया गया, जो आज भी संगीत प्रेमियों की पहली पसंद हैं।A photograph from an event in Indore featuring actress Sadhana Shivdasani, based on film music. A report by Indore Studio.‘लग जा गले’ से हुई शुरुआत: कार्यक्रम का आगाज़ किरण सांखला ने कालजयी गीत ‘लग जा गले’ से किया, जिसे सुनकर श्रोता भावविभोर हो उठे। इसके बाद उन्होंने संजय गर्ग के साथ ‘हम तुम्हारे लिए’ और ‘बेदर्दी बालमा’ जैसे गीतों से अपनी गायकी का लोहा मनवाया।A photograph from an event in Indore featuring actress Sadhana Shivdasani, based on film music. A report by Indore Studio.
सुरों का जादू और तालियों की गूँज: शाम जैसे-जैसे परवान चढ़ी, मंच पर गायन प्रतिभाओं के गीतों का नशा छाने लगा।
सीमा भटनागर ने ‘मैं तो तुम संग’ सुनाकर वातावरण में मधुरता घोली। अभिषेक वेद के साथ उनके युगल गीत ‘हम जब सिमट के आपकी’, ‘याद में तेरी’ और ‘तुझे जीवन की’ ने खूब तालियाँ बटोरीं।A photograph from an event in Indore featuring actress Sadhana Shivdasani, based on film music. A report by Indore Studio.सोनाली थालनेरकर ने शास्त्रीय पुट वाले गीत ‘ओ सजना बरखा बहार’ से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। संजय गर्ग के साथ ‘मेरे महबूब तुझे’ और ‘आजा आई बहार’ के साथ उन्होंने कार्यक्रम को शिखर पर पहुँचाया।A photograph from an event in Indore featuring actress Sadhana Shivdasani, based on film music. A report by Indore Studio.प्रीति कापड़िया की ऊर्जा ने महफ़िल में नई जान डाल दी। ‘कैसे रहूँ चुप’ पर उन्हें खूब वाहवाही मिली, वहीं अभिषेक के साथ ‘आप यूँ ही अगर’ और ‘तू जहाँ जहाँ चलेगा’ की प्रस्तुति भी सराहनीय रही। माया कोल्हेकर ने ‘तुझे जीवन की डोर से’ और संजय गर्ग के साथ छेड़छाड़ भरे गीत ‘ये पर्दा हटा दो’ को बखूबी पेश किया।A photograph from an event in Indore featuring actress Sadhana Shivdasani, based on film music. A report by Indore Studio.कुशल संचालन और सफल समापन: कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि साधना जी के जीवन के अनछुए पहलुओं को भी गीतों के माध्यम से पिरोया गया। सुषमा अवधूत ने न केवल ‘चेहरे पे खुशी छा जाती है’ जैसा खूबसूरत गीत गाया, बल्कि अपनी सधी हुई आवाज़ में मंच का सफल संचालन (सूत्र संचालन) भी किया। शाम के अन्य आकर्षणों में ‘नाच रे मन बदकम्मा’ और ‘अजी रूठकर अब’  जैसे गीत शामिल रहे, जिन्होंने श्रोताओं को बीते दौर की यादों में डुबो दिया। अंततः, यह शाम केवल गीतों का संग्रह नहीं, बल्कि उस अभिनेत्री को एक सुरीला नमन था, जिसकी अदायगी और सादगी आज भी बेमिसाल है।Film Actress sadhna shivdasani साधना: रहस्यमयी मुस्कान और सुरीले सफर की मल्लिका: 60 के दशक की सबसे प्रभावशाली और स्टाइलिश अभिनेत्रियों में शुमार साधना शिवदासानी ने 1960 में फिल्म ‘लव इन शिमला’ से अपने शानदार करियर की शुरुआत की थी। अपनी पहली ही फिल्म से वे न केवल अपनी अदाकारी बल्कि अपने मशहूर ‘साधना कट’ हेयरस्टाइल के कारण फैशन आइकन बन गईं। निर्देशक राज खोसला की सस्पेंस-थ्रिलर त्रयी— ‘वो कौन थी’ (1964), ‘मेरा साया’ (1966) और ‘अनीता’ (1967)—ने उन्हें हिंदी सिनेमा की ‘मिस्ट्री गर्ल’ के रूप में अमर कर दिया।Film Actress sadhna shivdasani हर फिल्म का संगीत सुपरहिट रहा: साधना का करियर उन चुनिंदा अभिनेत्रियों में से रहा है जिनकी लगभग हर फिल्म का संगीत सुपरहिट रहा। ‘मेरे महबूब’ (1963) में उनकी नज़ाकत ने उन्हें रातों-रात सुपरस्टार बना दिया, जबकि ‘वक्त’ (1965) और ‘आरज़ू’ (1965) जैसी फिल्मों ने उनकी व्यावसायिक सफलता पर मुहर लगा दी। Rajendra kumar and Sadhna in film Arzoo.उनके अभिनय से सजे गीत जैसे ‘लग जा गले’, ‘नैना बरसे रिमझिम’, ‘झुमका गिरा रे’, ‘तू जहाँ जहाँ चलेगा’, ‘ओ सजना बरखा बहार आई’ और ‘अभी न जाओ छोड़कर’ आज भी संगीत प्रेमियों की रूह में बसे हुए हैं। साधना केवल एक अभिनेत्री नहीं थीं, बल्कि वे ग्रेस (Grace) और मेलोडी (Melody) का एक ऐसा संगम थीं, जिसे आने वाली कई पीढ़ियां याद रखेंगी। आगे पढ़िये -सुरों के स्वर्णिम सफ़र में लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के संगीत को समर्पित कार्यक्रम की रिपोर्ट –https://indorestudio.com/suro-ka-swarnim-safar-laxmikant-pyarelal-musical-night-2026/

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